सुबह के 5 से लेकर दोपहर के 1 बजे तक चाय की दुकान चलाना और फिर घर का काम और थोड़ा आराम करने के बाद शाम 6 बजे से अभ्यास शुरू करना, यह है दिनचर्या राजेश कुमार कसाना की। यह शख्स अपने सपनों को लेकर बहुत ही गंभीर है। हालांकि, यह उनके पिता का सपना था कि उनका बेटा देश का नामचीन बॉक्सर बने।

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वन इंडिया के एक लेख के अनुसार, विजेंद्र को अपना आदर्श मानने वाले हरियाणा के भिवानी में रहने वाले राजेश, भारत के नंबर वन लाइटवेट कैटेगरी में बॉक्सर हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया से हुई बातचीत में उन्होंने बताया, “10 रूपए की चाय और कुछ सामान बेचकर गुजारा कर रहा हूँ। इस काम में मेरा भाई मदद करता है।”

ग़रीबी से गुजरने के बाद भी राजेश ने हार नहीं मानी और वे एक सफल बॉक्सर बनने के लिए लगातार मेहनत कर रहे हैं। सुबह 5 से दोपहर के 1 बजे तक दुकान चलाते हैं और फिर जब भाई दुकान पर आ जाता हैं तो वे घर जाकर घर का काम और आराम करते हैं और इसके बाद शाम 6 बजे से बॉक्सिंग की प्रैक्टिस शुरू करते हैं।

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राजेश ने बताया कि यह उनके पिता का सपना है कि उनका बेटा बॉक्सर बने। वे कैंसर से पीड़ित थे। दुर्भाग्य से उनकी मौत उसी वक्त हो गई जब वे स्कूल में पढ़ते थे। इसके बाद राजेश को अपनी पढ़ाई छोड़नी पड़ी लेकिन मुसीबतों ने उनका पीछा नहीं छोड़ा। वर्ष 2013 में उनकी बहन की भी कैंसर के कारण ही मौत हो गई।

राजेश ने अपने करियर में फ़िलहाल कुल 10 मैच खेले हैं और आप उनके जज्बे का अंदाजा इसी बात से लगा लें कि उन 10 मैचों में से उन्होंने 9 मैच जीते जबकि एक मैच ड्रॉ रहा। रॉयल स्पोर्ट्स प्रमोटर्स ने उनकी बॉक्सिंग को देखते हुए उन्हें आर्थिक सहायता प्रदान की है।

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