रात खुले आसमान के नीचे बिताना, दिन तपती धूप में गुजारना, दिन-भर भूखे प्यासे गेंद के पीछे भागना। घुटने फूटे या कोहनी टूटे कोई फर्क नहीं पड़ता, उन्हें तो बिना रूके अभ्यास करते जाना है। कितनी रातें भूखे गुजारनी हैं या फिर कितने किoमीo यात्रा करनी है, इससे भी फर्क नहीं पड़ता बस वक्त के साथ लड़ते जाना है। ऐसा  होता है एक क्रिकेटर बनने का सफर। आज हम आपको अपने देश के कुछ ऐसे ही क्रिकेटरों से रूबरू कराने जा रहे हैं जिन्होंने हालात के सामने कभी घुटने नहीं टेके।

1. विरेंद्र सहवाग!

 

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नजफगढ़ के नवाब कहे जाने वाले सहवाग ने अपना बचपन एक संयुक्त परिवार में बिताया जहाँ एक ही घर में बहुत से लोग रहते थे। पिताजी चाहते थे कि सहवाग आगे जाकर उनके गेंहूँ के व्यापार का काम संभाले। सहवाग हर रोज क्रिकेट सिखने के लिए लगभग 60 कि.मी. से भी ज्यादा दूरी तय किया करते थे। उनकी यही मेहनत रंग लाई और फिर एक दिन आया जब विश्व क्रिकेट में वे सितारे बनकर चमके।

2. उमेश यादव!

 

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इन भारतीय फास्ट बॉलर को तो पूरी दुनिया जानती है लेकिन क्या आपको पता है कि उमेश कितनी मशक्कत कर और हालात से लड़कर यहाँ तक पहुंचे हैं? उमेश के पिता कोयले की खान में काम करते थे। पैसों की कमी के कारण वे सिर्फ टेनिस बॉल से ही खेला करते थे। लेकिन एकबार बोलिंग ट्रायल में चुनाव होने के बाद उन्होंने घर, पढ़ाई सब छोड़ क्रिकेट पर अपना ध्यान लगा दिया।

3.  हरभजन सिंह!

 

भारत के फिरकी गेंदबाज हरभजन सिंह ने 1998 में क्रिकेट करियर की शुरूआत की लेकिन टीम के लिए ज्यादा कुछ कर नहीं पाए। पिता के स्वर्गवास के बाद जब उन पर घर की जिम्मेदारी आई तो इन्होंने कनाडा जाकर ट्रक ड्राइवर की नौकरी करने की सोची लेकिन तभी कुछ ही महीनों के बाद उन्हें ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेलने का मौका मिला, फिर क्या था इन्होंने साबित कर दिया कि वे एक बेहतरीन खिलाड़ी हैं और तीन टेस्ट में लगातार 30 विकेट लेकर रिकॉर्ड बनाया ।

4. मोहम्मद शमी!

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Credit: ESPNcricinfo

मोहम्मद शमी एक ऐसे गाँव से उभरकर सामने आए हैं जहाँ न तो लाइट ठीक से आती थी और न ही क्रिकेट खेलने के लिए कोई ढंग का ग्राउंड था। उनका चुनाव कोलकाता के एक क्रिकेट क्लब में हुआ, उस वक्त उनके पास वहाँ रहने के लिए पैसे तक नहीं थे तो वे अपने कोच के साथ रहने लगे। जब उनका सिलेक्शन भारतीय टीम के लिए हुआ तो अनके साथ-साथ उनके गाँव का भी काया पलट गया ।

5. रविन्द्र जडेजा!

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Credit: NDTV Sports

रविंद्र जडेजा के पिता एक सिक्योरटी गार्ड थे और घर की माली हालत भी ठीक नहीं थी। जडेजा की माँ ने हमेशा क्रिकेट खेलने में उनकी मदद की। वर्ष 2005 में माँ के देहांत के बाद इन्हें लगा कि अब क्रिकेट पीछे छूट जाएगा लेकिन इनकी बहन ने नौकरी करनी शुरू की और इस तरह इन्होंने अपने खेल को जारी रखा। वर्ष 2008 के अंडर-19 विश्वकप विजेता टीम के ये उप-कप्तान थे और फिर यहीं से इनके जीवन में बदलाव शुरू हुआ और आज ये भारत के सबसे सफल खिलाड़ियों में से एक हैं।

6. जहीर खान!

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Credit: The Indian Express

जहीर खान को जब मुंबई क्रिकेट क्लब में चुना गया तो उन्हें अपना घर छोड़ अपनी आंटी के साथ अस्पताल में रहना पड़ा। उनकी आंटी अस्पताल में एक हेल्पर का काम किया करती थीं । हालात ये थे कि वे बिना खाए हुए ही प्रैक्टिस के लिए चले जाया करते थे। फिर 17 वर्षीय जहीर ने नौकरी करनी शुरू कर दी। नौकरी के साथ वे क्रिकेट भी खेलते थे और उनकी यही मेहनत रंग लाई। आज उनकी पहचान विश्व पटल पर एक सफल गेंदबाज के रूप में है।

7. मुनाफ पटेल!

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Credit: CricketCountry.com

भारत के तेज गेंदबाज मुनाफ पटेल के पिता एक मजदूर थे और घर की माली स्थिति ठीक न होने के कारण वे भी एक फैक्ट्री में चाइल्ड लेवर के रूप में काम करते थे। मुनाफ के प्रदर्शन को देखते हुए उनका सिलेक्शन एम.आर.एफ. की पेस अकादमी में हुआ । एक बार स्टीव वॉ (Steve Waugh) की नजर मुनाफ पर पड़ी और उन्होंने सचिन को उनके बारे में बताया और फिर यहीं से शुरू हुई मुनाफ की सफलता की कहानी।

8. पठान ब्रदर्स!

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Credit: post.jagran.com

विश्व क्रिकेट में पठान भाइयों को कौन नहीं जानता। इरफान की बॉलिंग तो यूसूफ की बैटिंग धमाकेदार है। लेकिन क्या आपको पता है कि इन स्टार खिलाड़ियों के पास बचपन में अपना घर भी नहीं था और वे मस्जिद में रहा करते थे। उनके पिता की मासिक कमाई महज 250 रूपए थी। आप सोच सकते हैं कि उस स्थिति से क्रिकेटर बनने तक का सफर कितना दर्द देने वाला रहा होगा।

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