मानसिक स्वास्थ्य एक भ्रांतिजनक विषय है, लेकिन बात जब चिंता की आती है, अस्पष्टता और भी अधिक विस्तृत हो जाती है। हालांकि, हम में से ज्यादातर लोगों के लिए, यह हमारे रोजमर्रा के कार्यों और निर्णय लेने में हस्तक्षेप नहीं करता। वास्तविक चिंता, हम कैसे काम करते हैं उसको प्रभावित करती है। यह हमारी सोच को रोक देता है, और हम विभिन्न परिस्थितियों में कैसे बर्ताव करते हैं इसको प्रभावित करता है, हमारे व्यक्तिगत जीवन से लेकर काम पर हमारे प्रदर्शन तक। लेकिन, चिंता के बारे में वास्तव में हम कितना जानते हैं? बहुत से लोग तो यह भी नहीं मानते हैं कि चिंता होती भी है? वे इसे बिना किसी बड़ी बात के टाल देते हैं… लेकिन, यह सच्ची चीज़ है, बहुत सच्ची जो कि हम सभी को होती है, या किसी समय हम इसे टाल देते हैं। इस कारण के लिए, यहां पांच ज़रुरी बातें दी गई हैं जिन्हं आपको जानना चाहिए।

1. चिंता भावनाओं की एक स्थिति है जो दिमागी बीमारी हो भी सकती है और नहीं भी!

Everyone Needs To Know About Anxiety
Credit: Idiva

चिंता और चिंता की बीमारी के बीच में अंतर है। पहली में तनावपूर्ण स्थितियों में सामान्य प्रतिक्रिया होती है, दूसरी में कमज़ोर करने वाली बीमारी हो जाती है जो अपने आप दूर नहीं होती, और अक्सर अनिंद्रा, थकान और मनोदैहिक दर्द के साथ प्रकट होती है।

2. चिंता शरीर को भी प्रभावित करती है, और इसके भौतिक लक्ष्ण भी हो सकते हैं!

हाल ही में एक रिसर्च में पता चला है कि हमारे पेट की सेहत हमारे मानसिक सेहत से जुड़ी होती है। इसका एक उदाहरण यह भी है कि चिंता अक्सर पाचन संबंधि समस्या उत्पन्न करती है—चिंता से ग्रसित बहुत से लोगों ने बताया है कि उन्हें डायरिया या कब्ज़ है, और आमतौर पर IBS से इसका पता लगाया जा सकता है। लेकिन ज्यादा स्पष्ट बीमारियों में श्वासन समस्या, मुहांसे, हृदय समस्या और यहां तक की प्रजनन समस्याएं शामिल हैं। चिंता के अन्य शारीरिक समस्याओं में घबराहट, सांस की तकलीफ, खराब सपने, अत्यधिक पसीना, झटके और सिरदर्द जैसी समस्याएं शामिल हैं।

3. चिंता अन्य मुश्किल भावनाओं के आवरण के रुप में हो सकती है, जैसे कि क्रोध!

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फ्रायड (Freud) ने कहा है कि जब हमारे लिए कुछ मुश्किल होता है तो हम उसे दबा देते हैं। हमारी संस्कृति में, कई भावनाएं सामाजिक रुप से स्वीकार्य नहीं की जाती  है। महिलाओं के लिए, यह गुस्सा है। पुरुषों के लिए, यह दुःख और डर है। आमतौर पर जब हम किसी भावना को दबाने की कोशिश करते हैं जो हम बहुत ज्यादा महसूस करते हैं, लेकिन इसे व्यक्त नहीं कर पाते, वह चिंता के रुप में प्रकट हो सकती है।

4. यदि किसी को चिंता विकार है, तो उसे इलाज़ की ज़रुरत है!

यदि चिंता ज्यादा है, तो इसके इलाज़ की ज़रुरत होती है। चिंता विकार का मनोचिकित्सा (psychotherapy) और औषधि से इलाज किया जा सकता है, हालांकि कभी-कभी, बिना दवाई के संभाली जा सकती है।

5. अपने रोजाना के जीवन में ध्यान, व्यायाम, और सेहतमंद भोजन के मिश्रण से चिंता को नियंत्रित किया जा सकता है।

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चिंता, जबकि पूरी तरह से विकार नहीं है, जो आमतौर पर तनाव की प्रतिक्रिया होती है। इसलिए, सामान्य बोध चिंता को रोकने और संभालने की तरफ इशारा करता है, हम अपने तनाव का पता लगाते हैं। हमारी ज़िंदगी की सच्चाई है—सभी दायित्वों, प्रतियोगिताओं और जटिलताओं के साथ—यदि हम खुद को संंभालने का उचित प्रयास नहीं करेंगे तो और भी तनावपूर्ण हो सकती है। कोई मायने नहीं रखता कि आपकी नौकरी कितनी रौबदार है या आपकी सामाजिक दिनचर्या कितनी व्यस्त हो सकती है, छोटा ही सही आप अपने जीवन में एक व्यापक बदलाव ला सकते हैं—जैसे कि आरामदायक व्यायाम और ध्यान सम्मिलित कर के—जो कि आपके मानसिक तंदुरुस्ती को बनाए रखने के लिए काफी मदद कर सकते हैं।

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