पिछले कुछ सालों में इंटरनेट इस्तेमाल करने वाले लोगों में बहुत बढ़ोतरी हुई है, खासतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट यूजर की संख्या में कुछ ज्यादा ही इज़ाफा हुआ है। एक रिपोर्ट के अनुसार साल 2021 तक देश के कुल इंटरनेट यूज़र में से 75 प्रतिशत क्षेत्रिय भाषाओं वाले इंटरनेट यूज़र्स होंगे।

टाइम्स इंटरनेट अध्ययन, ‘दी चेंज़िंग लिंगुअल फेस ऑफ डिजिटल इंडिया” (The Changing Lingual Face of Digital India) के अनुसार, “किफायती फोन और सस्ते 3जी और 4जी कनेक्शन, इंटरनेट और डिजिटल साक्षरता की तरफ लेकर आया और अब हाई-स्पीड इंटरनेट कनेक्शन केवल मेट्रो शहरों तक ही सीमित नहीं रह गया है, जो ऑनलाइन सामग्री उपभोग पैटर्न में बहुत बदलवा कर रहा है।”

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साल 2011 से 2016 के बीच भारत में ग्रामीण भाषाई यूज़र की संख्या 41 प्रतिशत की दर से बढ़कर 234 मिलियन हो गई है। यह उम्मीद की जा रही है कि 2021 तक 18 प्रतिशत की CAGR बढ़कर 536 मिलियन तक पहुंच जाएगी, अग्रेज़ी से ज्यादा, जिनके 3 प्रतिशत CAGR की दर से 2021 तक 199 मिलियन तक पहुंचने की उम्मीद है।

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टाइम्स इंटरनेट (The Times Internet) अध्ययन ने 90 मिलियन से भी अधिक लोगों का सर्वेक्षण किया और नोट किया कि क्षेत्रिय सामग्री उपभोग की तरफ डिजिटल यूजर का रुझान बढ़ रहा है, क्योंकि उनमें से आधे से भी ज्यादा यूजर अंग्रेज़ी पढ़ने वाले नहीं हैं। यह भी देखा गया है कि, दो-तिहाई से भी अधिक हिन्दी पाठक अग्रेज़ी भी पढ़ते हैं।

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“कुल कंटेंट उपभोग में से 66 फीसदी के साथ क्षेत्रिय भाषाओं ने अंग्रेज़ी को मात दे दी है।” सभी क्षेत्रिय भाषाओं में, एक शैली के रुप में समाचार पढ़ने वालों की संख्या में सबसे ज्यादा इज़ाफा हुआ है, जो कि 67 प्रतिशत रहा, 17 प्रतिशत खेल और 16 प्रतिशत मनोरंजन कंटेंट के साथ।

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महिला यूजर्स में, गुजराती भाषा का सबसे ज्यादा इस्तेमाल करने वाले है, जो 44.78 प्रतिशत है। यह भी देखा गया कि क्षेत्रिय भाषाओं वाले सामग्री की तरफ युवाओं की संख्या में तेज़ी से बढ़ोतरी हो रही है, जो कि 25-34 वर्षीय भारतीय युवाओं के बीच सबसे ज्यादा है।

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