देश की सर्वोच्च अदालत ने आज निर्भया गैंगरेप मामले में दोषियों की सजा समीक्षा याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है। 

अमर उजाला की एक खबर अनुसार, इस याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि “समीक्षा याचिका पर उस वक्त गौर किया जाता है जब उसमें कोई ऐसा बिंदु हो जो पहले अदालत में उठाया न गया हो या उसे नजरअंदाज किया गया हो। इस याचिका में ऐसा कुछ नहीं था, इसलिए अदालत इनकी सजा को बरकरार रखते हुए इन्हें फांसी की सजा देती है।”

अदालत के इस फैसले के बाद मीडिया से बात करते हुए निर्भया की मां ने कहा, “वे बच्चे नहीं थे। यह दुर्भाग्य है कि उन्होंने ऐसा कृत्य किया। कोर्ट के इस फैसले ने हमारा विश्वास और दृढ़ कर दिया है कि हमें न्याय ज़रुर मिलेगा।”


तो वहीं निर्भया के परिवार की तरफ से केस लड़ रहे वकील रोहन महाजन ने इस संबंध में कहा, “यह हमारे लिए विजयी क्षण है। हम आज संतुष्ट हैं। केंद्र सरकार से हमारा सिर्फ इतना ही अनुरोध है कि आगे की जो भी प्रक्रिया है उसे तेज़ करें।”

बता दें कि दिसंबर 16, 2012 को देश की राजधानी दिल्ली में  निर्भया के साथ दरिंदगी के बाद नृशंस रुप से उसकी हत्या कर दी गई थी। इस मामले की सुनवाई करते हुए सितंबर 2013 में दिल्ली हाई कोर्ट ने चारों दोषियों को मौत की सज़ा सुनाई थी।

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