कहते हैं कि अगर कोई देश अपनी धरोहर या संपत्ति को सहेज कर नहीं रख सकता है तो उस देश में धरोहर के होने का कोई विशेष लाभ ही नहीं होता है। किसी देश के लिए उनके खिलाड़ी किसी धरोहर से कम नहीं होते क्योंकि दूसरे देश जाकर वे अपने देश का प्रतिनिधित्व करते हैं और जी- जान से खेलते हैं और जीत हासिल करके देश का नाम विश्व में रौशन करते हैं लेकिन हाल ही में यूपी से अपने घर वापस जा रहे खिलाड़ियों को तीस घंटे का सफर ट्रेन के टॉयलेट के पास बैठ कर गुजारना पड़ा ।

नवभारत टाइम्स के अनुसार, हाल ही में महाराष्ट्र के कुछ पहलवान यूपी में आयोजित राष्ट्रीय चैंपियनशिप में भाग लेने आए थे। यहाँ उन्होंने एक स्वर्ण सहित कुल पाँच पदक अपने नाम किये। खुशी-खुशी जीत से उत्साहित जब ये अपने घर वापस जाने के लिए यूपी के फैजाबाद स्टेशन पहुंचे तो इन्हें पता चला कि इनकी तो टिकट ही कनफर्म नहीं हुई है।

इस बाबत जब वे टीटीसी से बात करने गए तो इनकी मदद करने के बजाए उन्होंने उन खिलाड़ियों को डांट दिया। मजबूरन इन्हें फैजाबाद से महाराष्ट्र तक के 30-35 घंटे तक का सफर टॉयलेट के पास बैठकर गुजारना पड़ा। इनकी टीम में कुछ महिला पहलवान भी थीं जिन्हें और भी परेशानियों का सामना करना पड़ा।

 बदन पर तिरंगा लपेटे देश के इन धरोहरों को अगर इस प्रकार ईज्जत दी जाएगी तो बेशक कोई भी खेल के मैदान में करियर बनाने के लिए थोड़ी देर सोचेगा। जहाँ इन खिलाड़ियों के कोच हवाई जहाज से अपने गंतव्य तक पहुंचे, वहीं इन खिलाड़ियों को उस नुकसान की भरपाई के लिए महज 400-500 रूपए दिए गए। उन खिलाड़ियों का देश से बस एक ही सवाल है कि आखिर कब ऐसा होगा जब एसोसिएशन खिलाड़ियों पर ध्यान देगा और पर्याप्त खर्च मुहैया कराएगा।

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