देश की अखंडता और एकता को दर्शाती सरदार पटेल की “स्टेचू ऑफ़ यूनिटी” दुनिया की सबसे ऊँची प्रतिमा है जिसकी ऊंचाई 182 मीटर (597 फीट) है। गुजरात के सरदार सरोवर बांध के पास अखण्ड भारत के निर्माता भारत रत्न सरदार बल्लभ भाई पटेल को श्रद्धांजलि अर्प‍ित करने के लिए स्‍टैच्‍यू ऑफ यूनिटी का निर्माण किया गया है। इस मूर्ति को बनाने वाले भारत के 93 वर्षीय सुप्रसिद्ध मूर्तिकार राम विनजी सुतार हैं जिन्होंने अपने सात दशक के कार्यकाल के दौरान भारत को 8000 से ज्यादा मुर्तियां दी हैं। 

statue of unity
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19 फरवरी 1925 में महाराष्ट्र में धुले जिले के गौंडर गांव में राम सुतार का जन्म हुआ। उनके पिता बढ़ई का काम करते थे। अपने गुरु रामकृष्ण जोशी से प्रेरणा लेकर उन्होंने मूर्तिकार बनने की शुरुआत की। और सर जे. जे. स्कूल ऑफ़ आर्ट से में दाखिला लिया और इसी स्कूल में पढ़ाई के दौरान, सुतार ने मॉडलिंग में स्वर्ण पदक जीता।

पढ़ाई पूरी करने के बाद, राम सुतार ने अजंता और एलोरा की मूर्तियों पर काम करना शुरू किया। जहां उन्होंने वर्ष 1954 से वर्ष 1958 तक कार्य किया। वर्ष 1958 में, सुतार ने दिल्ली में सरकारी नौकरी के लिए आवेदन किया। जिसके परिणामस्वरूप वह सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (आई एंड बी) में तकनीकी सहायक (मॉडल) के रूप में कार्य करने लगे।

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वर्ष 1959 में, उन्होंने मूर्तिकार बनने के लिए सरकारी नौकरी छोड़ दी थी। उनके द्वारा निर्मित प्रसिद्ध मूर्ति चम्बल की थी। जिसकी ऊंचाई 45 मीटर है, जिसे मध्य प्रदेश में गांधी सागर बांध पर स्थापित किया गया है। इस कार्य से भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू बहुत प्रभावित हुए थे।

उन्होंने सुप्रसिद्ध महात्मा गाँधी की प्रतिमा को भी बनाया है। जिसे विश्व स्तर पर काफी लोकप्रियता मिली। राम वी सुतार की प्रसिद्ध कलाकृतियों की प्रतिलिपियां भारत सरकार द्वारा अन्य देशों को दी गईं हैं, जैसे कि – इटली, फ्रांस, जर्मनी, अर्जेंटीना, बारबाडोस, रूस, इत्यादि।

उन्‍होंने 45 फुट ऊंची चम्बल देवी की मूर्ति गंगासागर बांध मध्य प्रदेश में, 21 फुट ऊंची महाराजा रणजीत सिंह की मूर्ति अमृतसर में,18 फुट ऊंची सरदार बल्लभ भाई पटेल की मूर्ति संसद भवन में, 17 फुट ऊंची मोहनदास कर्मचन्द गांधी की मूर्ति गांधीनगर के गुजरात में, 9 फुट ऊंची भीमराव अम्बेडकर की मूर्ति जम्मू में और भारत के राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा की प्रतिमा को भी बनाया।

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स्टेचू ऑफ़ यूनिटी को बनाने के लिए राम सुतार ने सबसे पहले सरदार पटेल का तीन फुट का मॉडल बनाया था। बाद में 18 फीट का मॉडल तैयार किया गया जिसे प्रधानमंत्री मोदी जी ने देखा। फ‍िर पास होने के बाद इसकी लंबाई 30 फीट की गई। 522 फीट ऊंची मूर्ति निर्माण का काम एल एंड टी को मिला। भारत में सुविधाओं के अभाव के कारण केवल मूर्ति की सतह का निर्माण कार्य चीन में पूरा किया गया।
 
राम सुतार के कलात्मक शिल्प साधना को सम्मानित करते हुए भारत सरकार ने उन्हें 1999  में पद्मश्री और 2016 में पद्मभूषण पुरस्कार से सम्मानित किया। वर्तमान में राम सुतार अपने बेटे अनिल सुतार के साथ नोएडा में रहते हैं और यहां उनका स्‍टूड‍ियो है। दुनिया की सबसे ऊँची प्रतिमा का अनावरण कल यानी 31 अक्टूम्बर 2018 को देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कर-कमलों द्वारा होगा।

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