हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने मंगलवार को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को राष्ट्रीय राजधानी में करीब 60 मिलियन गैलन प्रति दिन (एमजीडी) की वर्तमान पानी की कमी पर पत्र लिखा है।

पत्र में उन्होंने कहा कि यह 900 मिलियन गैलन प्रति दिन (एमजीडी) से अधिक की कुल प्रशोधन क्षमता का लगभग 6.7 प्रतिशत ही है। खट्टर ने कहा कि इस कमी को दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) के आंतरिक कार्यों के माध्यम से आसानी से सुलझाया जा सकता है।

पिछले महीने केजरीवाल द्वारा भेजे गए एक अर्ध-आधिकारिक पत्र के जवाब में खट्टर ने कहा, मुझे बताया गया कि शायद आपके समक्ष सभी तथ्यों को प्रस्तुत नहीं किया जा रहा है। आपको अपने अधिकारियों से एक साधारण प्रश्न पूछना होगा कि निम्नलिखित तीन बिंदुओं में से किस वजह से हरियाणा दिल्ली को अधिक पानी मुहैया कराए।

यह हैं; 1- दिल्ली के हिस्से और आवंटन के अनुसार, 2-सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के अनुसार, 3-दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश अनुसार।

उन्होंने कहा, वजीराबाद जलाशय के विशेष स्तर को बनाए रखने का कार्य डीजेबी को खुद ही करना होगा। कैरियर लाइन चैनल के संचालन के बाद हरियाणा, दिल्ली संपर्क बिंदु बावाना में पूरी आपूर्ति कर रहा है।

हरियाणा के मुख्यमंत्री ने कहा, हमने जल संसाधन मंत्रालय के सचिव के अनुरोध को स्वीकार कर लिया है। सचिव ने केवल वर्तमान गर्मी के लिए डायवर्जन ड्रेन 8 के माध्यम से 120 क्यूसेक पानी की आपूर्ति करने का अनुरोध किया था।

उन्होंने कहा, दिल्ली को अगले साल से खुद ही अपने लिए इंतजाम करना होगा क्योंकि हरियाणा द्वारा डायवर्जन ड्रेन -8 के माध्यम से कोई आपूर्ति नहीं की जाएगी। इसके लिए हमने सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष हमारे जवाबों में विस्तार से बता दिया है।

खट्टर ने 16 मई को केजरीवाल द्वारा लिखे गए पत्र का संदर्भ देते हुए दिल्ली सरकार के विवादास्पद रुख को भी चिन्हित किया।

उन्होंने कहा, हम अपर यमुना रिवर बोर्ड द्वारा दिल्ली में पानी के आवंटन और हिस्से के संदर्भ में हमारे सभी दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं। हमारे हजारों गांवों और कई कस्बों में पेयजल आपूर्ति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने के बावजूद हमने दिल्ली के लिए आपूर्ति में कभी कमी नहीं की। वास्तव में फिलहाल हम अपने दायित्वों का निर्वहन करते हुए 120 क्यूसेक से अधिक की आपूर्ति कर रहे हैं।

केजरीवाल ने उपराज्यपाल अनिल बैजल और खट्टर को पत्र लिखा था, जिसमें उन्होंने पड़ोसी राज्य से उतने पानी की आपूर्ति की मांग की थी, जो पिछले 22 साल से हरियाणा करता आ रहा है।

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