वैज्ञानिकों ने हिमालय क्षेत्र में तीव्र भूकंप आने की चेतावनी जारी की है। हिमालय क्षेत्र में हो रही भौगोलिक घटनाओं को देखते हुए वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि यहाँ कभी भी 8.5 तीव्रता वाला भूकंप आ सकता है। जवाहरलाल नेहरू सेंटर के भूकंप विशेषज्ञ सी.पी. राजेंद्रन के अनुसार इस क्षेत्र में भारी मात्रा में तनाव की वजह से यह आपदा आ सकती है। 

 
 
 
 
 
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@climbery0614 arriving at Camp III on the SW-ridge of Ama Dablam in the Everest Region of Nepal. This picture taken with a fish eye lense I took in October 1998. In the middle of the background you can see the more prominent 6000ers Kangtega and to the right Thamserku and more on the left some lower, fairly unknown 6000ers. Ama Dablam (6,812 m / 22,349 ft) means “mother’s necklace”; the campsite is on the right side of the rapidly shrinking hanging glacier which is thought of as the ‘dablam’, the traditional necklace worn by Sherpa women (see my Ama Dablam pictures from a month ago). . ————————————————– Live your life to the fullest. Fill your heart with love and positive energy. Travel the world, so that you have a great story to share. ➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖🌟➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖ 📷 : @ralfdujmovits ➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖🌟➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖ 🙏Namaste and Welcome🙏 Thank you for visiting our page @Trekadviser. Experience Nepal with us. We aim to make your stay in Nepal beautiful and memorable. Ask us for any SERVICES or INFORMATIONS. WhatsApp / Viber: +9779841784192 Visit us: www.trekadviser.com Email: [email protected] ➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖🌟➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖

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जियोलॉजिकल जर्नल में प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक, शोधकर्ताओं ने दो नए खोजी गई जगहों के आंकड़ों के साथ-साथ पश्चिमी नेपाल और चोरगेलिया में मोहन खोला के आंकड़ों के साथ मौजूदा डेटाबेस का मूल्यांकन किया, जोकि भारतीय सीमा के अंदर आता है। 

शोधकर्ताओं ने भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो के कार्टोसैट -1 उपग्रह से गूगल अर्थ और इमेजरी का उपयोग करने के अलावा भूगर्भीय सर्वेक्षण के भारत द्वारा प्रकाशित स्थानीय भूविज्ञान और संरचनात्मक मानचित्र का उपयोग भी किया है। 

शोधकर्ताओं ने विश्लेषण में बताया कि, “अध्‍ययन हमें यह निष्कर्ष निकालने के लिए मजबूर करता है कि केंद्रीय हिमालय, औसत 15 मीटर सरक चुका है। जिस कारण 1315 और 1440 के बीच खिंचाव उत्पन्न होकर 8.5 या उससे अधिक तीव्रता का एक बड़ा भूकंप क्षेत्र लगभग 600 कि.मी. तक फैल रहा है।”

वर्तमान अध्ययन इस बड़े पैमाने पर होने वाले भूकंप के तथ्य को रेखांकित करता है। यह क्षेत्र  600-700 वर्षो से भूकंप से बचा रहा। जो इस क्षेत्र में भारी तनाव निर्माण करता है। राजेंद्रन के अनुसार यह भूकंप बढ़ती आबादी और पर्यावरण के लिए काफी विनाशकारी साबित हो सकता है। और इस अकस्मितता से निपटने के लिए अभी से तैयारी शुरू कर देनी चाहिए। 

 
 
 
 
 
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This photo is the view of my live that is saved deeply into my brain together with the story below. The picture can only show a small bit of my wonderful memories up there at Renjo La Pass (5340m). Already an altitude where your lungs slow you down. . On the way up there was a young porter who did it first time with 70kg on his back. He was very exhausted and in need of water. I could give him some water but could not take away the burden. . When he reached the top he was instantly smiling again seeing this view across 4 of the worlds 8.000m peaks including the highest mountain on earth, Mt. Everest. My powerful learning from this moment: Does not matter how bad your sorrow is, it can be changed into happiness from one to the other moment.

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कोलोरोडो विश्वविद्यालय के अमेरिकी भूभर्ग विज्ञानी रोजर बिल्हाम जो वर्षों से भूकंप का अध्ययन कर रहे हैं उन्होंने भारतीय वैज्ञानिकों के निष्कर्षों को सही माना है। उन्होंने कहा कि, भारतीय वैज्ञानिक निष्कर्ष निकालने में निर्विवाद रूप से पूरी तरह से सही हैं, भूकंप हो सकता और उसकी तीव्रता 8.5 हो सकती है।”

 25 अप्रैल 2015 हिमालय क्षेत्र स्थित नेपाल में आए भूकंप ने भयंकर तबाही मचाई थी। उस समय नेपाल में आए दो भयंकर भूकंपों से 8635 लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा था। जबकि 89 विदेशियों समेत 300 से अधिक लोग अब भी लापता हैं । नेपाल पुलिस के अनुसार, 49 भारतीयों समेत कम से कम 79 विदेशी इन विनाशकारी भूकंपों में मारे गए थे। 

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