स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने धूम्रपान की लत छोड़ने को प्रोत्साहित करने के लिए राष्ट्रव्यापी अभियान “वॉट डैमेज विल दिस सिगरेट/बीड़ी डू” लांच किया है।यह अभियान धूम्रपान करने वाले लोगों को यह सोचने के लिए प्रेरित करेगा कि सिगरेट या बीड़ी से कई संभावित हानिकारक प्रभाव हो सकते हैं, जिसमें हार्ट अटैक, कैंसर, फेफड़े का कैंसर जैसी बीमारियां शामिल हैं।

इस अभियान में तंबाकू के इस्तेमाल से स्ट्रोक और हृदय संबंधी बीमारियां होने के खतरे को प्रमुखता से दिखाया गया है और दुनियाभर के तंबाकू उपयोगकर्ताओं में मृत्यु का सबसे प्रमुख कारण यही है। वाइटल स्ट्रेटजी ने इस अभियान को विकसित करने और इसे लागू करने में तकनीकी मदद प्रदान की है।

वाइटल स्ट्रेटजी के ग्लोबल पॉलिसी और रिसर्च उपाध्यक्ष डॉ. नंदिता मुरूकुतला ने कहा, हाल ही में ग्लोबल एडल्ट टोबैको के अनुसार फिलहाल 90 फीसदी से ज्यादा धूम्रपान करने वाले वयस्क धूम्रपान के नुकसान और उनके साथ खड़े लोगों को धुएं से होने वाली बीमारियों के बारे में जागरूक हैं। इस अभियान में ग्राफ की मदद से तंबाकू का धूम्रपान करने के विशेष और प्रमाणित नुकसान को दिखाया गया है और यह देखकर लोग सोचने पर मजबूर होंगे कि धूम्रपान छोड़ना उनकी सेहत के लिए फायदेमंद है।

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इस अभियान के माध्यम से धूम्रपान करने वालों को इस लत को छोड़ने के लिए प्रोत्साहित किया गया है और धूम्रपान छोड़ने वाले लोग नेशनल क्विट लाइन (1800112356) पर कॉल कर सलाह ले सकते हैं। यह अभियान 17 भाषाओं में सभी मुख्य राष्ट्रीय सरकारी और निजी टीवी व रेडियो चैनलों के माध्यम से देशभर में अपनी पहुंच बनाएगा। इसके अलावा अभियान को सोशल मीडिया अभियान के तहत सभी प्रमुख डिजिटल मंचों जैसे कि यूट्यूब, फेसबुक, हॉटस्टार और वूट पर चलाया जाएगा।

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टोबैको एटलस के अनुसार, हर साल नौ लाख से ज्यादा भारतीयों की तंबाकू से होने वाली बीमारियों से मृत्यु होती है। अध्ययन में कहा गया है कि तंबाकू के इस्तेमाल को कम करने के लिए तंबाकू नियंत्रण से जुड़े मजबूत उपायों की मदद से भारत में हार्ट अटैक और स्ट्रोक के करीब 25 फीसदी मामलों को कम किया जा सकता है। पुरुषों में करीब 45 फीसदी सभी तरह के कैंसर, 17 फीसदी महिलाओं में और 80 फीसदी से ज्यादा ओरल कैंसर के लिए सीधे तौर पर तंबाकू का इस्तेमाल होना जिम्मेदार है।

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