देश में अगले शैक्षणिक सत्र से एमबीबीएस के पाठ्यक्रम में 21 साल बाद बदलाव किया जा रहा है। इस नए पाठ्यक्रम में कई पुराने अध्यायों को हटाकर नए अध्याय शामिल किये जाएंगे। नए पाठ्यक्रम में एमबीबीएस छात्रों की हर स्पेशियलिटी की थोड़ी-थोड़ी पढ़ाई कराई जाएगी ताकि एमबीबीएस चिकित्सकों का महत्व बढ़े और बिना पोस्ट ग्रेजुएशन किए भी वे शुरुआती दौर में हर बीमारी से पीड़ित मरीजों का इलाज कर सके।  

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दैनिक भास्कर के अनुसार देश के नामी 62 चिकित्सकों की टीम ने इस नए पाठ्यक्रम को तैयार किया है। इस नए पाठ्यक्रम की खास बात यह है कि  छात्रों को अब प्रथम वर्ष से ही पढ़ाई के साथ अस्पतालों में प्रैक्टिस करने का मौका मिलेगा। इससे पहले छात्रों को तृतीय वर्ष में प्रैक्टिस करने का मौका दिया जाता था। 

मेडिकल के क्षेत्र में पिछले बीस सालों में काफी बदलाव देखने को मिला है और साथ ही कई नई तकनीक भी आयीं हैं। इसलिए अब छात्रों को नई तकनीक के बारे में अलग से पढ़ाया जाएगा।

मैटरनल एंड चाइल्ड हेल्थ, सेनिटेशन और वाटर सप्लाई, कम्युनिकेबल और नॉन कम्युनिकेबल डिजीज, इम्यूनाइजेशन, हेल्थ एजुकेशन, बॉयोमेडिकल वेस्ट से कैसे निपटा जाए, साथ ही संस्थान में काम करने के तौर-तरीका भी पाठ्यक्रम में पढ़ाये जाएंगे।

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पिछले कुछ सालों से डॉक्टर-मरीज के संबंध में विश्वास की कमी आई है। और इसी कमी को दूर करने के लिए इस पाठ्यक्रम में लाइफ स्किल्स जैसे -फैसले लेने की क्षमता, नैतिक मूल्यों, कौशल, योग्यता, आचार-विचार और संप्रेषण आदि विषयों को भी शामिल किया गया है।

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