महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में आंदोलनरत किसानों के प्रतिनिधियों और राज्य सरकार के बीच चल रही मीटिंग समपन्न हो गई है। इस संबंध में पत्रकारों से बात करते हुए महाराष्ट्र के मंत्री गिरीश महाजन ने कहा, “किसानों के साथ हमारी बातचीत सकारात्मक रही, उनकी 12-13 मांगे थीं, जिनमें से  कुछ को हमने स्वीकार कर ली है और लिखित तौर पर उन्हें मंजूरी नामा दे दिया जाएगा। “महाजन ने यह भी कहा कि, हमें उम्मीद है कि किसान हमारे निर्णयों से सहमत होंगे।

बता दें कि, अपनी विभिन्न मांगो को लेकर आंदोलन पर उतरे अन्नदाता महाराष्ट्र की राजधानी और देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में सैकड़ों किलोमीटर की यात्रा तय कर हज़ारों की संख्या में एक जुट हुए हैं, जिनकी संख्या 30 हज़ार से भी ऊपर है।

महाराष्ट्र में महाअांदोलनः जानिए- क्या है किसानों की मांग अौर क्या है सरकार का रुख
Credit; Jagran

ऑल इंडिया किसान सभा की अगुवाई में मुंबई पहुंचे ये किसान विधानसभा घेरने के भी मूड में दिखें। आंदोलनरत धरती पुत्रों की सरकार से क्या कुछ मांगे हैं, चलिए एक नज़र उस पर भी डाल लेते हैं…

  1. आंदोलन कर रहे किसानों की सबसे पहली मांग पूर्ण कर्जमाफी है। मौसम की मार से तबाह हो चुकि फसलों की वजह से किसान बैंको से लिया कर्ज चुकाने में असमर्थता जता रहे हैं, ऐसे में उनकी मांग है कि सरकार उनके सर पर बोझ बने बैंक कर्ज को पूर्णतः माफ कर दे।
  2. किसान संगठनों का कहना है कि बर्बाद हो चुकी फसलों की वजह से किसान बिजली  का बिल भी नहीं चुकता कर सकते, इसलिए उन्हें बिजली बिल में भी छूट देनी चाहिए।
  3. अपने फसलों की सही कीमत नहीं मिलने की वजह से भी किसान नाराज़ हैं। मालूम हो कि हाल के बजट में सरकार ने किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) का तोहफा दिया था, लेकिन किसान संगठनों का मानना है कि सरकार की यह स्कीम किसानों के लिए लाभकारी नहीं है, उनका कहना है कि सरकार की ये स्कीम दिखावा मात्र है।
  4. इन सब मांगों के अलावा, किसान स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें भी लागू करने की मांग कर रहे हैं।

क्या है स्वामीनाथन आयोग?

किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए नवंबर 18, 2004 को केंद्र सरकार ने एमएस स्वामीनाथन की अध्यक्षता में राष्ट्रीय किसान आयोग का गठन किया गया था। इस आयोग ने पांच रिपोर्ट सौंपी थी, जिसमें भूमि सुधारों को बढ़ाने पर जोर, अतिरिक्त और बेकार जमीन को भूमिहीनों में बांटना, किसानों की आत्महत्या की समस्या का हल करना, न्यूनतम समर्थन मूल्य लागत से 50% ज़्यादा करना, वित्त-बीमा की स्थिति पुख़्ता बनाना, राज्य स्तरीय किसान आयोग बनाना, किसानों की सेहत सुविधाएं बढ़ाना आदि शामिल हैं । इस आयोग की रिपोर्ट तो आ चुकी है, लेकिन अभी तक यह आयोग लागू नहीं किया जा सका है।

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