ओंटारियो (Ontario), कनाडा (Canada) की लौरा हिलिएर (Laura Hillier), को मात्र 13 साल की छोटी उम्र में ही एक्यूट माइलॉयड ल्यूकेमियाका निदान दिया गया था। बहुत उग्रता से उपचार करने के बाद, वे चार सालों के छोटे से समय के लिए ठीक हो गई थी। लेकिन उन्हें फिर से कैंसर हो गया।

हालाँकि, उन्हें स्टेम सेल थेरेपी की सूची में रखा गया था और एक डोनर भी मिल गया था, अस्पताल में बिस्तरों की कमी के कारण, वह उपचार प्राप्त करने में असमर्थ थी जिसकी उन्हें बहुत ज़रूरत थी और दुर्भाग्य से जनवरी 16, 2016 में उनका निधन हो गया। उस समय लौरा मात्र 18 वर्ष की थी।

उसके माता-पिता ने “होप फॉर लौरा” फेसबुक पेज पर, उसे मार्मिक विदाई देते हुए कहा, “वह बहुत बहादुरी से लड़ी और आप सभी को उस पर गर्व होगा। उसकी शान, उसकी हिम्मत, उसकी ताकत और उसकी पवित्र आत्मा अंत तक चमकती रही। “

©Facebook । Hope for Laura Hillier

क्योंकि लौरा स्नातक स्तर तक पहुंचने में असमर्थ रही, उनके परिवार वालों और दोस्तों ने आखिरी विदाई और श्रद्धांजलि के तौर पर तय किया कि उनकी शवपेटिका को एक साल की किताब में बदल देंगे।

वे दिल को छू लेने वाली श्रद्धांजलि लिखकर अपनी भावनाओं को व्यक्त करने में सक्षम रहे, उन्होंने बहुत सारे रंगों के मार्कर का इस्तेमाल किया, ख़ास तौर पर लौरा के पसंदीदा रंग, बैंगनी का इस्तेमाल किया और बहुत जल्द उनकी श्वेत शवपेटिका कुछ अलग ही नज़र आने लगी, वह प्यारे विचारों के इन्द्रधनुष से ढक गई।

©Facebook । Hope for Laura Hillier

कितना प्यारा भाव प्रदर्शन है अपने प्रिय की मृत्यु पर। लौरा को थियेटर और संगीत से प्यार था।

©Imgur

कैंसर किसी भी परिवार में हो सकता है और यहाँ तक कि इलाज के साथ भी, आपके प्रिय के जीवन को कम कर सकता है। हमें अपने परिवार और दोस्तों के साथ बिताए गए समय को सँजो कर रखना चाहिए।

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