शहरीकरण की ओर बढ़ रहे भारत में जहाँ दोहरी कमाई और छोटे परिवार का प्रचलन बढ़ रहा है, वहीं अब पुरुष के कन्धों पर घर की जिम्मेदारियां भी बढ़ रहीं है। कामकाजी माता-पिता ने यह चिंता करना छोड़ दिया है कि अगर वे बाहर रहेंगे तो उनके बच्चों की देखभाल कौन करेगा। इसके अलावा, जब भारत में पालनाघर की सुविधा आती है तो अत्यधिक मांग के कारण इसकी आपूर्ति करना मुश्किल हो जाता है।

यद्यपि पालनाघर की सुविधाएं प्राथमिक रूप से महिला कर्मचारियों के लिए होती हैं, ज्यादातर कंपनियां रिपोर्ट करती हैं कि पुरुष भी इस सुविधा को चाहते हैं। पिछले कुछ वर्षों में, कंपनियों को हजारें महिलाओं द्वारा अपने बच्चों की देखभाल के कारण नौकरी छोड़कर जाने की समस्या का सामना करना पडा। एक चाइल्डकेयर को चलाना महंगा और जटिल साबित हो सकता है। लेकिन इसका फायदा कंपनी को भविष्य में कर्मचारियों के मनोबल में वृद्धि और उन्हें रोक पाना होगा।

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प्रोईवस (ProEves) के एक सर्वे के अनुसार, जो कम्पनियों को चाइल्डकेयर, मातृत्व और अभिभावकीय समर्थन समाधान की सहायता प्रदान करता है, 70 प्रतिशत कम्पनियों द्वारा कम्पनी के अन्दर ही पालनाघर की सुविधा दी जाती है या फिर पुरुष और महिला दोनों के लिए यह सेवा प्रदान की जाती है। प्रोईवस की सह-संस्थापक केतिका कपूर ने TOI से कहा, “हमारे साथ कम्पनी की पालनाघर रणनीति पर बातचीत से हमने पाया कि कम्पनियों में पुरुष और महिला दोनों कर्मचारीयों के द्वारा इस सुविधा का उपयोग किया जाता है। यह माता-पिता की जिम्मेदारियों में समानता लाने के लिए एक सही निर्णय है।”

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जॉनसन एंड जॉनसन (J&J), एशियन पेंट्स और हिंदुस्तान यूनिलीवर जैसी कम्पनियों ने पुरुषों के लिए इस सुविधा का विस्तार किया है। रिपोर्ट से पता चलता है कि पिछले कुछ वर्षों में पुरुषों द्वारा इस क्रेच की सुविधा के उपयोग में वृद्धि हुई है. जे&जे ने समावेशी कार्यक्षेत्र के निर्माण पर ध्यान देते हुए हाल ही में पुरुषों के लिए दो महीने के पितृत्व अवकाश की घोषणा की है। कामकाजी माता पिता अब ऑनसाईट पालनाघर को एक बड़े प्रोत्साहन के रूप में देखते हैं—जिसमें वे अपने बच्चों के बारे में बिना ज्यादा चिंता किए अपने काम को अच्छे से कर सकते हैं।

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