आज भारत ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बना ली है, लेकिन बात यदि महिलाओं की करें तो भारत में आज भी उनकी स्थिति में कुछ ज्यादा सुधार नहीं हुआ है। इस आधुनिक भारत में भी कई स्थानों पर महिलाओं को घुट-घुटकर जीना पड़ता है, कहीं उनकी आवाज़ दबा दी जाती है, तो कहीं तथाकथित सामाजिक नियम-कायदों की बेड़ियां उनकी राह रोकती हैं।

हालांकि, भारतीय संविधान ने आधी आबादी को कई अधिकार दिए हैं। इनकी जानकारी हरेक महिला को होनी चाहिए ताकि भविष्य में यदि उनके साथ कोई दुर्व्यवहार होता है या उनका हक मारने की कोशिश की जाती है, तो निडर होकर वे अपनी आवाज़ उठा सकें।

1. कार्य स्थल पर उत्पीड़न के खिलाफ कानून!

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Credit: Shabdnagri

यौन उत्पीड़न अधिनियम के तहत आप कार्य स्थल पर हुए यौन उत्पीड़न के खिलाफ शिकायत दर्ज करा सकती हैं। महिला कर्मचारियों के संबंध में केंद्र सरकार ने भी कानून लागू किए हैं, जिसके तहत कार्य स्थल पर यौन शोषण की शिकायत दर्ज होने पर महिलाओं को जांच लंबित रहने तक 90 दिन की पेड लीव दी जाएगी।

2. मातृत्व अवकाश!

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Credit: CrimeHillor

भारतयी संविधान के अनुच्छेद-42 के तहत गर्भवती महिलाओं को तमाम अधिकार दिए गए हैं। इसके तहत उन्हें 12 सप्ताह की मैटरनिटी लीव मिलती है। इस दौरान उनकी तनख्वाह में किसी भी तरह की कोई कटौती नहीं की जा सकती है और उन्हें वही तनख्वाह और भत्ता मिलेगा जो आखिरी बार मिला था।

इस कानून के तहत यह भी प्रावधान है कि यदि महिला का गर्भपात हो जाता है या फिर समय से पूर्व प्रसव आदि के कारण महिला बीमार हो जाती है, तो उन्हें एक महीने का अतिरिक्त अवकाश भी मिल सकता है।

3. गोपनियता का अधिकार!

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Credit: Humphreys

किसी भी तरह के यौन उत्पीड़न की शिकार महिलाओं को अपने नाम की गोपनीयता बनाए रखऩे का पूरा अधिकार है। जिसके तहत कोई भी महिला किसी महिला पुलिस अधिकारी की मौजूदगी में ही या फिर ज़िलाधिकारी के सम्मुख अपना बयान दर्ज करा सकती हैं।

दुष्कर्म जैसे मामलों में कुछ अन्य प्रावधान भी है, जिसके तहत ऐसे मामलों की सुनवाई महिला जज करेंगी। पीड़िता का बयान महिला पुलिस ही ले सकती हैं। यह भी जरुरी है कि पीड़िता का बयान परिजनों की मौजूदगी में लिया जाए। यह सुनिश्चित करना आवश्यक होता है कि दो महीनों के अंदर सुनवाई कर दी जाए।

4. यदि महिला मुजरिम हो तो!

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Credit: Patrika
  • यदि किसी मामले में कोई महिला मुजरिम होती है, तो उनकी तलाशी केवल महिला पुलिसकर्मी ही ले सकती है।
  • किसी भी महिला मुजरिम को पुलिस सूर्यास्त के बाद अथवा सूर्योदय से पहले गिरफ्तार नहीं कर सकती।
  • गिरफ्तार महिला के परिजनों को सूचित करने की जिम्मेदारी पुलिस की होती है।
  • यदि महिला को लॉकअप में बंद करने की नौबत आती है, तो उसे अलग सेल में रखा जाएगा।
  • महिला को जिस भी जज के सामने सबसे पहले पेश किया जा रहा हो, उस जज का कर्तव्य है कि वह सबसे  पहले महिला से पूछे कि उन्हें पुलिस हिरासत में कोई दिक्कत या बुरे बर्ताव का सामना तो नहीं  करना पड़ा।

5. मुफ्त कानूनी सहायता!

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Credit: Patrika

यदि कोई महिला किसी मामले में मुजरिम साबित होती है तो वह मुफ्त में कानूनी सहायता प्राप्त करने की हकदार हैं। वह अदालत से गुहार लगा सकती है कि उन्हें सरकारी खर्चे पर वकील चाहिए। ध्यान रखने वाली बात यह भी है कि यह अधिकार प्रत्येक महिला को दिया गया है, अतः महिला की आर्थिक स्थिति चाहे जैसी भी हो यदि वह मुफ्त सरकारी वकील की गुहार लगाती हैं,तो उन्हें यह सुविधा जरुर प्रदान की जाएगी।

6.  संपति पर अधिकार!

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Credit: Grishobha

भारतीय कानून महिला को पिता की पुश्तैनी संपति में पूरा अधिकार देता है। पिता की मृत्यु के बाद लड़की को भी भाइयों के बराबर पिता की संपति में हिस्सा मिलेगा, यहां तक की शादी के बाद भी यह नियम लागू होता है।

बात यदि पति के संपति की करें तो, इस पर महिला का मालिकाना हक तो नहीं होता लेकिन शादी के बाद यदि अलग होने की स्थिति पैदा होती है, तो वह पति से गुजारा भत्ता ले सकती हैं।

7. घरेलू हिंसा के खिलाफ लड़ाई!

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घरेलू हिंसा अधिनियम 2005 के अनुसार यदि कोई भी महिला अपने पति या फिर ससुराल वालों द्वारा प्रताड़ित की जाती हैं, तो वह उनके खिलाफ घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत मामला दर्ज करा सकती हैं।

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