एक ऐसे युग में जहां भ्रष्टाचार और सत्तावाद व्याप्त है,अक्सर आम लोगों को ही सबसे ज्यादा कष्ट भुगतनापड़ता है। हैती में लाखों लोग कुपोषित हैं और पौष्टिक आहार का खर्च वहन नहीं कर सकतें, इसलिए इनमें से बहुत से लोगों को अपना पेट भरने  के लिए मिट्टी से बने बिस्कुट का सहारा लेना पड़ता है।

बिना किसी स्थाई सरकार के एक दरिद्र देश के रुप में हैती (Haiti) एक ऐसा देश है जहां करीब तीन लाख लोगों के पास खाने के लिए पर्याप्त भोजन नहीं है। भूख यहां सबसे बड़ी समस्या बन गया है। जबकि 10 प्रतिशत हैति वासी देश की कुल आय का 70 प्रतिशत हिस्सा कमाते हैं, ज्यादातर हैति वासी रोज़ाना के US$1 या US$2 से भी कम पर जीते हैं। बहुत से वयस्क और उनसे अधिक बच्चे कुपोषण का शिकार हैं।

पौष्टिक आहार जैसे की फल और अन्य आहार आमतौर पर ज्यादातर हैतीवासियों के लिए विलासिता की चीज़ें मानी जाती है। इन मुश्किल परिस्थितियों से बचने के लिए, कुछ हैतीवासियों ने नमक, वनस्पति तेल और मिट्टी के मिश्रण के पुराने नुस्खे का सहारा लिया, जिसे स्थानीय  लोगों द्वारा “बोन-बोन टेरेस” (bon bon terres) कहा जाता है यानि की—कीचड़ की बिस्कुट।

“बोन बोन टेरेस” (Bon bon terres) को मिट्टी, नमक और वनस्पति तेलों के मिश्रण से बनाया जाता है।

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यह महिला मिट्टी की लेई बना रही है, जिससे बाद में बिस्कुट बनाया जाएगा।

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मिट्टी का बिस्कुट बनाने वाली महिलाओं में से एक सिलेन डेनिस (Celaine Denies) ने वर्ल्ड फोकस (World Focus) से एक इंटरव्यू में कहा कि, “यह आपका पेट भर देता है। जब हम कुछ भी नहीं खाए होते हैं, तब यह मिट्टी का बिस्कुट हमारा पेट भरता है।”

अक्सर गंदी परिस्थितियों में सूरज की रोशनी में सुखाने के लिए कीचड़ को फैलाया जाता है।

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महिला द्वारा मिट्टी और पानी को मिलाकर लेई तैयार करने के बाद, इन बिस्कुटों को सूरज की रोशनी में सूखने के लिए जमीन पर डाल दिया जाता है। हैती के कुछ इलाकों में इन बिस्कुटों को बेचना आय का मुख्य श्रोत है। इस मिटटी को एक स्थान से ट्रक में भरकर पहाड़ी क्षेत्रों में ले जाया जाता है, और जो महिलाएं इसे बनाती हैं उनका मानना है कि इसमें विटामिन और कैल्शियम जैसे खनिज प्रचूर मात्रा में होते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि, “जो हैति वासी ये बिस्कुट खाते हैं उनमें मिट्टी से होने वाली बीमारियों, कुपोषण, और और भी अन्य दुष्कर खतरा रहता है।”

डेनिस कहती हैं कि, “यह एक आवश्यक बुराई है। मैं खराब परिस्थितियों में हूं, और इस वजह से मैं इन्हें बनाती हूं। यह मेरे दिल को दुःख पहुंचाता है, लेकिन मेरे पास इसके अलावा कोई और चारा भी नहीं है। हमें इसे मजबूरन खाना पड़ता है। यह हमें बीमार बनाता है, लेकिन इतना नहीं जितना की किसी को इसे खाने की आदत ना हो और वह इसे खा ले।”

कैलेनी डेनिस कहती  हैं कि, यह आपका पेट भर देता है। जब हम कुछ नहीं खाए होते हैं, यह मिटटी का बिस्कुट हमारा पेट भरता है।”

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बिना किसी पोषण तत्व के यह मिट्टी का बिस्कुट इसे खाने वाले हैतीवासियों में कुपोषण और बीमारियों की संभावना बढ़ा देता है। हालांकि कई बार बहुत से वयस्क इसे खाने में शर्मिंदगी महसूस करते हैं, आमतौर पर बच्चे ही इसका आनंद लेते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि मिट्टी के इस बिस्कुट का स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है, जिससे दांत सड़ने, मिटटी से फैलने वाली बीमारियाँ, कुपोषण और भी कई गंभीर समस्याओं की संभावना बढ़ जाती है। हैतीवासियों और बच्चों का भविष्य इसकी वजह से अंधकारमय होता जा रहा है, सरकार को स्थायी रखने और बिना पैसों के देश को गरीबी से बाहर निकालना असंभव है।

हमें मजबूरन इसे खाना पड़ताहै। यह हमें बीमार बनाता है, लेकिन इसके अलावा हमारे पास कोई चारा भी नहीं है।

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