महिलाएं बेसब्री से ख़ास त्योहारों का इंतजार करती हैं। त्योहारों पर महिलाएं अपने-अपने पारंपरिक परिधानों में नज़र आती हैं जैसे साड़ी, पटियाला सलवार सूट, एथनिक सूट, लाचा स्टाइल लहंगा या धोती सलवार आदि। शायद परिधानों को पहनने के लिए महिलाएं त्योहारों का इंतज़ार करती हैं।

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आज यहाँ हम आपको खूबसूरत फुलकारी डिजाइन्स के साथ अपने पारंपरिक लुक पूरा करने का तरीका बतायेंगे, जिनके ज़रिये आप खूबसूरत और आकर्षक लुक पा सकती हैं। फुलकारी एक तरह की फूलों वाली कढ़ाई है जो कपड़ों पर की जाती है। इसको ये नाम भी फूल शब्द से ही मिला है।

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फुलकारी की शुरुआत 15वीं सदी में हीर-रांझा की दुखभरी प्रेम कहानी से हुई थी। ऐसा माना जाता है कि हीर के पास काफी कपड़े थे जिसमें फुलकारी गार्मेंट्स भी थे, जो उसे उसकी शादी पर तोहफे में दिए गए थे। कई लोगों का मानना है कि ये कला पर्शिया से आई है, जहां इसे गुलकारी कहा जाता है, जिसका मतलब भी लगभग यही होता है (गुल मतलब फूल और कारी मतलब काम)।

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भारतीय संस्कृति में पंजाब का योगदान सबसे अधिक है। क्योंकि पंजाब के शानदार संगीत, लाजवाब खाने और खूबसूरत रंगों की तो कोई अन्य राज्य बराबरी ही नहीं कर सकता है।  पटियाला सलवार सूट और फुलकारी एम्ब्रॉएडरी के बिना इंडियन फैशन बेहद नीरस होता। इस कढ़ाई का जन्म प्राचीन भारत (अब पाकिस्तान) में हुआ था जिसमें बेहद कुशल कारीगरी की ज़रूरत होती है।

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आप अपनी पसंद के किसी भी रंग के सिंपल व सादे पटियाला सूट के साथ रंगबिरंगी फुलकारी ट्राई कर सकती हैं क्योंकि यह फुलकारी हर रंग के साथ आसानी से मैच कर जाती है।

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आप चाहे तो अपने लाचा स्टाइल लहंगे के साथ हैवी फुलकारी भी पहन सकती हैं जो आपके पारंपरिक लुक को और भी खूबसूरत दिखाने में कारगर सिद्ध होगा।

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