मुंबई के वर्सोवा(Versova)में एनुअल फिश फेस्टिवल 2018 (Annual fish festival 2018) चल रहा है, अपने अाप में अलग ये फेस्टिवल सी-फूड और मछली खाने के शौकीन लोगों को खासा आकर्षित कर रहा है। ऐसा प्रतीत होता है मानों अपने स्वाद की महक और संस्कृति की झलक लिए यह फिश फेस्टिवल लोगों को वर्सोवा के मछुआवारों के गांव में आमंत्रित कर रहा हो। 

1. भूख भी बढ़ जाएगी और कदम भी थिरकने लगेंगे!

Credit: Youtube(Eastindiaculture)

प्रत्येक साल वर्ली कोली गांव में आयोजित होने वाले फिश फेस्टिवल की तरह ही यह भी एक फिश फेस्टिवल है, जहां ना केवल सी-फूड और मछलियों से नाना प्रकार के व्यंजन आपकी भूख बढ़ा देंगे, बल्कि इस फेस्ट में आयोजित होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम और कोली नृत्य, आपके भी पांव थिरका देंगे। इसके अलावा मछली से लेकर विभिन्न प्रकार के सी-फूड को चखने का मौका भी मिलेगा।

2. मछुआरों की संस्कृति को करीब से जानने का मौका!

Credit: Youtube(Eastindiaculture)

इस फिश फेस्टिवल की सबसे खास बात यह है कि, यहां स्वाद के साथ-साथ मछुआरों के नृत्य-संगीत और उनकी जिंदगी को करीब से  देखने का मौका भी मिलता है। इस फेस्ट में मिलने वाले सभी प्रकार के व्यंजन बाहर के किसी भी रेस्त्रां से सस्ते मिलते हैं। वैसे यदि आप सी-फूड के शौकीन हैं तो आपको पता होगा कि बाज़ार और यहां के पकवानों में कितना फर्क है।

3. बाज़ार से सस्ते और स्वादिष्ट मिलेंगे व्यंजन!

Credit: Youtube(Eastindiaculture)

इतना ही नहीं, यह फर्क आपको कीमतों में भी नज़र आएगा। यहां आप ₹50 से ₹150 आराम से स्वादिष्ट सी-फूड्स का आनंद उठा सकते हैं, जो कि खास कोली मसाले से निर्मित हैं, और आपकी थाली में गरमा गरम परोसे जाते हैं। वैसे तो ये सामान्य मराठी भोजनों की तरह ही है, लेकिन हां, थोड़ा सा अलग है क्योंकि इसमें वर्सोवा बीच के लोगों के स्टाइल का तड़का लगा होता है।

4. पारंपरिक परिधान में व्यंजन परोसती मिलेंगी महिलाएं!

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यहां आपको बाम्बू का बोम्बिल, टैंगी, पॉम्फ्रेट, टुना, सुरमई, और सेलफिश जैसे करीब 15 से 20 प्रकार की मछलियों और केकड़ों से निर्मित व्यंजन मिल जाएंगे। इस फेस्ट में लगे प्रत्येक स्टॉल पर आपको कोली समुदाय की एक अलग-अलग झलक मिलेगी, जहां पारंपरिक कोली परिधान में महिलाएं आपकी थाली में भोजन परोसती मिल जाएंगी।

5. एक दिन में एक टन ताज़ी मछलियां बनाई जाती हैं!

Credit: Youtube(Eastindiaculture)

जिस तरह भोजन पकाने में कई तरह के तरीके अपनाये जाते हैं ठीक उसी प्रकार ही यहां के लोग अपने भोजन में खास तरह के मसालों का भी इस्तेमाल करते हैं। तीन दिनों के इस फेस्टिवल में महिलाएं करीब 1 टन ताज़ी मछलियां हर रोज़ बनाती हैं। वैसे मुंबई की भागदौड़ भरी ज़िंदगी से थोड़ा सा सुकून पाने के लिए भी आप इस फेस्ट की तरफ अपना रुख कर सकते हैं और यदि मन करे तो ज़ायकेदार सी-फूड्स का दिलखोलकर लुत्फ उठा सकते हैं।

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