सैली एपर्ट (Sally Appert) सैन होसे, सीए (San Jose, CA), की 27 वर्षीय एकाउंटेंट हैं। वह व्यग्रता के साथ बड़ी हुई जो अंततः जुनूनी-बाध्यकारी विकार (obsessive-compulsive disorder – OCD) में विकसित हुआ। अपने सबसे निचले बिंदु पर, उनका हर दिन ओसीडी से आने वाले डर से भरा होता था, और वह अपना नियंत्रण खो बैठी थी। यह कहानी उनके बारे में है जब छुट्टियों पर एक अप्रत्याशित खोज के बाद—उनका जीवन कैसे बदल गया, और उन्होंने अपनी व्यग्रता पर कैसे काबू पाया।

युवावस्था में डर से अपंग

मुझे लगता है कि मैं डर के साथ ही पैदा हुई थी। अगर मेरे मा़ता-पिता के अलावा किसी और ने मुझे उठाया तो मैं रोती थी। एक छोटी लड़की के रूप में, मैं जोर की आवाजों से डरती थी, विशेष रूप से पानी के बहने की आवाज़ से।

जब मैं करीब बारह वर्ष की थी, तब मुझे बहुत चीजों से डर लगने लगा था: रोगाणुओं, भीड़, किसी और के घर जाकर सोना, भोजन, बुरी गंध, बीमारी के मामूली लक्षण, और यहां तक कि मेरे स्टफ्ड खिलौनों के पुराने होकर टूट जाने की भविष्य की संभावना। मुझे पता है कि यह आखिरी वाला अजीब लगता है, लेकिन मैं इस चिंता से सारी सारी रात जागती थी और खुद को बीमार कर लेती थी।

12 साल की उम्र तक, मेरी इन चिंताओं के लिए सहायता ढूँढने के अलावा मेरे पास कोई विकल्प नहीं था, और मुझे मेरे डॉक्टर ने दवा दी। हालांकि दवा ने मुरी शुरुआत में मदद की, लेकिन15 साल की उम्र में मेरी चिंता जुनूनी बाध्यकारी विकार (OCD) के लक्षणों में विकसित हुई।

आपको यह बताना चाहती हूँ कि ओसीडी के साथ जीने का क्या मतलब है, उदाहरण के लिए, हर जगह जहाँ मैं जाती थी, हर वो शब्द जो मैं देखती थी, उसे पढ़ने के लिए मजबूर हो जाती थी। बिलबोर्ड और लेबल से निर्देश या पुस्तक कवर, या हाथ में कुछ भी, मैं हर वो चीज़ पढ़ने पर मजबूर होती थी जिसपर मेरी नज़र पड़ती। अगर मैंने ऐसा नहीं किया, तो मुझे भयानक चिंता महसूस होती, जैसे कि मेरे पेट में गर्म पानी डाल दिया गया हो। ऐसा लगता था जैसे मैं अपने मन को नियंत्रित नहीं कर सकती थी, और यह बहुत ही डरावना एहसास था।

“बिलबोर्ड और लेबल से निर्देश या पुस्तक कवर, या हाथ में कुछ भी, मैं हर वो चीज़ पढ़ने पर मजबूर हो जाती थी जिसपर मेरी नज़र पड़ती।”

पीछे मुड़कर जब मैं अपने जीवन को देखती हूँ, तो मुझे लगता है कि मैं भाग्यशाली थी कि मैं घर पर ही स्कूली शिक्षा प्राप्त करती थी। यदि मैं किसी सार्वजनिक स्कूल में होती, तो मुझे नहीं पता कि मैं हर दिन कैसे बिताती। घर पर, मैंने शब्दों को देखने से बचने के लिए जितना संभव हो सके फर्श पर अपनी आंखें रखकर इसे प्रबंधित किया।

जैसे-जैसे मेरे लक्षण बिगड़ते गए, मुझे ओसीडी को नियंत्रित करने के लिए दोगुनी दवा लेनी पड़ी, लेकिन दवा से मैं पूरी तरह से ठीक नहीं हुई। मुझे पता था कि दवा के रसायन मेरे शरीर के लिए अच्छे नहीं थे, और मैंने सुना था कि यह दवा एक नशे की लत की तरह होती है और इन्हें छोड़ना मुश्किल होता है, और जैसे जैसे समय बीतता, मुझे उन्हें अधिक से अधिक लेना पड़ सकता है। मैं नहीं चाहती थी कि ऐसा हो, लेकिन मैं इन्हें छोड़ने से डरती थी।

एक बार, जब मैं लगातार दो दिन तक दवा लेना भूल गई, तो मैं किसी भी कारण के बिना चिड़चिडी हो गई। मुझे अजीब से चक्कर आ रहे थे, और मुझे संदेह था कि यह दवाई छोड़ने के लक्षण थे। इससे मुझे दवा छोड़ने के लिए और भी डर लग गया।

“जैसे-जैसे मेरे लक्षण बिगड़ते गए, मुझे ओसीडी को नियंत्रित करने के लिए दोगुनी दवा लेनी पड़ी, लेकिन दवा से मैं पूरी तरह से ठीक नहीं हुई।”

यह ध्यान में रखते हुए कि मुझमें ऑटिज़्म (autism) के कुछ लक्षण भी थे, मेरी सौतेली माँ ने मुझे 18 साल की उम्र में सोशल सिक्योरिटी विकलांगता सहायता के लिए आवेदन करने में मदद की, क्योंकि वह डर रही थी कि मैं किसी भी नौकरी को लम्बे समय तक कर पाने में सक्षम नहीं रहूंगी।

एक यात्रा जिसने सबकुछ बदल दिया

मेरे ओसीडी के बावजूद, मैंने अभी भी एक सामान्य जीवन जीने की कोशिश की। मुझे उम्मीद थी कि एक दिन किसी भी दवा की मदद के बिना मेरी व्यग्रता दूर हो जाएगी।

उन गर्मियों में, जब मैं 19 वर्ष की थी, मैं अपनी माँ, बहन और सौतेले पिता के साथ अलास्का (Alaska) की यात्रा पर गई। एक अच्छा समय बिताने के अलावा, मैंने अपनी माँ के स्वास्थ्य में कुछ अदभुत बदलावों को देखा।

उस यात्रा के दौरान, मेरी माँ असामान्य रूप से ऊर्जावान थी और उन्हें कभी थकान नहीं लगती थी। वह एक विशाल ग्लेशियर पर चढ़ी, एक गुफा की खोज की, और हमारे साथ सभी प्रकार के पर्यटक स्थलों का दौरा किया, और उन्होने कभी थकान की शिकायत नहीं की। वह ऐसे काम करने के लिए कोई आवश्यक सख्त आहार और पोषक तत्वों की खुराक भी नहीं ले रही थी। ऐसा लगता था जैसे वह अचानक एक बार फिर से जवान हो गई है, जैसे कि उन्हें एक नया जीवन मिल गया है।

जुलाई 2010 में अलास्का की यात्रा के दौरान अपनी माँ और बहन के साथ सैली एपर्ट | Courtesy Sally Appert

सालों से, मेरी माँ को दीर्घकालिक टाइप1 मधुमेह और फाइब्रोमाल्जिया (fibromyalgia) के लक्षणों से पीड़ित रही थी, इसलिए मुझे उन्हें स्वास्थ्य की नाजुक स्थिति में देखने की आदत हो गई थी।

उदाहरण के लिए, अलास्का यात्रा के कुछ ही समय पहले, हमने कैलिफ़ोर्निया (California) के सबसे ऊंचे पुल, फारेस्टहिल ब्रिज (Foresthill Bridge) का दौरा किया था। मैं नदी तक जाने के लिए पुल के नीचे घाटी के किनारे से उतरना चाहती थी, लेकिन यह एक लंबी, सीधी ढलान थी। मेरी बहन और मैं जवान और फिट थे, लेकिन हमारी माँ कमजोर और थकी हुई थीं। हम घाटी के नीचे थोड़ी दूर तक उतर गए, लेकिन हमारी माँ ने कहा कि अगर हम और आगे गए तो वह वापस चढ़ने में सक्षम नहीं होगी, इसलिए हम लौट आए। वे मुश्किल से वापस पहाड़ी पर लौट पाई— हमने दोनों ओर से उनके हाथ पकड़े, और हम उन्हें सहारा देकर ऊपर तक ले गए।

तो मैं उनमें यह अचानक बदलाव देखकर बहुत ही खुश थी। बाद में, उन्होने मुझे बताया कि क्या हुआ था। उनके मन और शरीर में सुधार का कारण फालुन दाफा, एक प्राचीन चीनी ध्यान अभ्यास था। बस कुछ ही दिनों में, फालुन दाफा के अभ्यास करने से उन्होंने बहुत अच्छा और अधिक ऊर्जावान महसूस किया था।

कुछ महीने बाद, वे फारेस्टहिल ब्रिज केनोन के नीचे पूरी तरह उतर पाईं और फिर वापस लौटी, मेरे और मेरी बहन के साथ। कोई हाथ पकड़ने की आवश्यकता नहीं थी।

ज़ाहिर है, मैं इस अभ्यास के बारे में और जानना चाहती थी। अंततः मैंने फालुन दाफा का अभ्यास करना शुरू कर दिया, चीन और दुनिया भर में लाखों लोगों से जुड़ते हुए जिन्होंने उसके अदभुत लाभ अनुभव किए हैं। यह एक अप्रत्याशित उपहार की तरह था, न केवल मेरी माँ के लिए, लेकिन अब मेरे लिए भी।

शांत रहने की सीख

20 साल की उम्र में, मैंने “ज़ुआन फालुन” पढ़ना शुरू किया, एक मुख्य किताब जो फालुन दाफा के सिद्धांतों को और अभ्यास करने के तरीके को सिखाती है। किताब ने मुझे सच्चाई, करुणा और सहनशीलता के अभ्यास के मार्गदर्शक सिद्धांतों का पालन करके अपने चरित्र को सुधारने के लिए सिखाया।

सैली एपर्ट ने फालुन दाफा के सिद्धांतों को समझाती हुई मुख्य पुस्तक “ज़ुआन फालुन” किताब पढना शुरू किया।| Courtesy Sally Appert

यह अभ्यास ध्यान, और सरल और शांतिपूर्ण चिगोंग अभ्यास सिखाता है जो आध्यात्मिक शिक्षाओं का पूरक है और आपकी आंतरिक ऊर्जा को संतुलित करने में आपकी सहायता करता है। मेरे मामले में, मैंने पहले पुस्तक को पढ़ना शुरू किया, लेकिन इससे पहले कि मैं फालुन दाफा अभ्यास करती, ओसीडी के लक्षण शांत हो गए थे। मैंने अपने दिमाग पर बेहतर और अधिक नियंत्रण महसूस करना शुरू कर दिया।

इससे पहले, दवा लेने से मुझे काम करने में मदद मिलती थी, लेकिन लक्षण वास्तव में कभी गायब नहीं हुए थे। मुझे “मैं अपने डर की गुलाम हूँ” ऐसा महसूस होता था, जैसे कि मेरी स्वतंत्र इच्छा का हिस्सा हटा लिया गया था। अब मुझे लगा कि बीमारी वास्तव में दूर जा रही थी, और अब मैं मुक्त थी।

कुछ महीने बाद, मैंने अंततः ध्यान सहित व्यायाम के पांच सेट का अभ्यास करना शुरू कर दिया। इसके तुरंत बाद, मैंने धीरे-धीरे व्यग्रता की दवा को लेना बंद कर दिया क्योंकि मुझे लगा कि अब इसकी जरूरत नहीं थी।

सैली एपर्ट फालुन दाफा का ध्यान अभ्यास कर रही हैं | Courtesy Sally Appert

इस बार, जब मैं दवा लेने भूल गयी, तो मुझे पहले की तरह कोई परेशानी महसूस नहीं हुई थी। ओसीडी के लक्षण वापस नहीं आए, और दवा लेना जारी रखने की कोई आवश्यकता नहीं थी।

बेहतर व्यक्ति बनना

फालुन दाफा से सीखी पहली चीजों में से एक यह था कि मेरे दृष्टिकोण और चरित्र को कैसे सुधारा जाए और मेरे जीवन के हर पहलू को बेहतर बनाने के लिए आत्म-प्रतिबिंब का उपयोग कैसे करना चाहिए।

उदाहरण के लिए, मैं अपने दिनचर्या के काम करने के बारे में शिकायत करती थी, भले ही मेरे पास बहुत अधिक काम नहीं होता था। सहनशीलता और निःस्वार्थता के सिद्धांतों को सीखने के बाद, मैंने बर्तन धोए, बाथरूम साफ किया, और शिकायत के बिना मुझे जो भी करने के लिए कहा जाता उसमें मैं मदद करती।

सैली एपर्ट फालुन दाफा का दूसरा स्थायी अभ्यास कर रही हैं | Courtesy Sally Appert

एक दिन, मैंने अपने पिता से तर्क किया और उनके प्रति अपमानजनक थी। हालांकि, उसके बाद जब मैंने सोचा कि “ज़ुआन फालुन” पढ़ने से मैंने क्या सीखा है, तो मैंने तुरंत अपनी गलती को महसूस किया और उनसे क्षमा मांगी और कहा कि मैं कठोर थी। वे मुस्कुराए और मुझे गले लगा लिया, और तुरंत संघर्ष खत्म हो गया। यह आत्म-प्रतिबिंब की शक्ति का कार्य था। मुझे एहसास हुआ कि आज मैंने इसे जिस तरीके से संभाला था वह अतीत से पूरी तरह अलग था। मैं वास्तव में बदल रही थी।

इसके अलावा, मैं अपनी सौतेली माँ के साथ बहस किया करती थी और उनके साथ मेरी बहुत अच्छी तरह नहीं बनती थी, लेकिन फालुन दाफा ने मुझे और अधिक दयालु होना सिखाया, और मैंने अपना रवैया बदल दिया। उसके बाद, हम आश्चर्यजनक रूप से घुल मिल गए।

तब से, जब भी मुझे संघर्ष का सामना करना पड़ा, मैंने हमेशा अपने अंदर झाँक कर देखा और सच्चाई, करुणा और सहनशीलता के सिद्धांतों का पालन करने की कोशिश की। परिणाम अदभुत रहे हैं, और इस अभ्यास ने मुझे अपने मन की मनोदशा को सुधारने में मदद की है।

अक्षमता से खुशी और स्वतंत्रता तक

आज, मैं 27 साल की हूं, और मैं कह सकती हूं कि फालुन दाफा की शक्ति के कारण मेरा पूरा जीवन बदल गया है।

मैं ओसीडी से पूरी तरह से ठीक हो गई हूँ, और अब मैं एक जूनियर एकाउंटेंट के रूप में एक इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी के लिए काम करती हूँ। मैंने सोशल सिक्योरिटी स्टाफ को भी लिखा और समझाया कि अब मैं अक्षम नहीं थी। जब भी मैं अभिभूत महसूस करती हूं, तो मैं फालुन दाफा का अभ्यास करती हूँ, ध्यान करती हूँ, या फिर पुस्तक ही पढ़ लेती हूँ।

मैंने एक ऐसे व्यक्ति से विवाह किया जो खुद भी फालुन दाफा का अभ्यास करते हैं। चूंकि हम दोनों सच्चाई, करुणा और सहनशीलता का पालन करते हैं, इसलिए हम दोनों में बहुत अच्छी तरह बनती है और शायद ही कभी एक-दूसरे से नाराज होते हैं। अब मैं सामान्य जीवन जीने, एक खुश शादी शुदा ज़िन्दगी और शांतिपूर्ण मन पाने में सक्षम हूं। वह चिंतित बच्चा जो बिस्तर पर पड़ा रहता था और अपने स्टफ्ड खिलौनों के बारे में चिंतित था, अब चला गया था।

मुझे उम्मीद है कि यह कहानी इस तथ्य के लिए एक प्रमाण पत्र के रूप में कार्य करेगी कि यदि आपने कभी भी अभिभूत महसूस किया है या मेरे जैसे कठिनाइयों से निपट रहे हैं, तो हमेशा आशा रखें। यह अलास्का की यात्रा के दौरान नाटकीय रूप से आ सकती है जैसे कि मेरे साथ हुआ था, या रोजमर्रा की स्थितियों के माध्यम से, जैसे इस तरह के लेख को आकस्मिक रूप से पढ़ना।

मुझे उम्मीद है कि मेरी कहानी से अधिक लोगों को सच्चाई, करुणा और सहनशीलता की शक्ति और इन सुंदर सिद्धांतों का पालन करने से आपके जीवन को कैसे बदल सकते है, इस बारे में सीखने में मदद मिलेगी। यदि आपने इस लेख का आनंद लिया और चाहते हैं कि अन्य लोगों को इससे लाभ हो, तो कृपया इसे साझा करें। आप नहीं जान सकते कि किसकी जिंदगी आप एक साधारण अच्छे इरादे से बदल सकते हैं।

2010 में कैलिफ़ोर्निया में रेडवुड नेशनल एंड स्टेट पार्क में एक वन में सैली एपर्ट और उनकी मां | Courtesy Sally Appert

संपादक का संदेश:

फालुन दाफा (फालुन गोंग के नाम से भी जाना जाता है) सत्य, करुणा और सहनशीलता के सार्वभौम सिद्धांतों पर आधारित एक आत्म-सुधार ध्यान प्रणाली है, जो स्वास्थ्य और नैतिक चरित्र को सुधारने और आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त करने के तरीके सिखाती है।

यह चीन में 1992 में श्री ली होंगज़ी द्वारा जनता के लिए पेश किया गया था। वर्तमान में 114 देशों में 100 मिलियन से अधिक लोगों द्वारा इसका अभ्यास किया जा रहा है। लेकिन 1999 के बाद से इस शांतिपूर्ण ध्यान प्रणाली को क्रूरता से चीन में उत्पीड़ित किया जा रहा है।

अधिक जानकारी के लिए, कृपया देखें:  falundafa.org and faluninfo.org. सभी पुस्तकें, व्यायाम संगीत, संसाधन और निर्देश पूरी तरह से निःशुल्क, कई भाषाओँ में (हिन्दी में भी) उपलब्ध हैं।

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