सब्र की सीमा तब टूटी जब डॉक्टर ने बताया कि मुझे गंभीर केराटाइटिस (keratitis) है और सर्जरी के लिए शहर में अस्पताल जाना होगा।

यह एक बड़ा खर्च था जिसे भुगतान करने का मेरे पास कोई रास्ता नहीं था। उस पर, मेरी आंखों में लगातार दर्द हो रहा था और मेरी दृष्टि धुंधली हो गयी थी। मैं उस डर से घबरा गयी थी कि मैं शायद अंधी हो सकती हूं, और कोई भी मेरी देखभाल करने वाला नहीं था।

मैं इस तरह निराश हो चुकी थी कि मैं अब और नहीं जीना चाहती थी। मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि मैं पैदा क्यों हुई थी और मेरे साथ इतनी बुरी चीजें क्यों हुईं; मेरे पूरे 25 वर्षीय जीवन में बीमारी और अक्षमता, गरीबी और पारिवारिक दुर्व्यवहार से चिह्नित एक दुःख बचपन और युवावस्था शामिल थे।

उस दिन, 2013 में, जब मेरे डॉक्टर ने मुझे बताया कि मुझे केराटाइटिस (कॉर्निया की सूजन) हो गया था, तो मुझे बेहद निराशाजनक महसूस हुआ और मैं रोष से भर गयी। मुझे पता ही नहीं था कि मैं जल्द ही सुरंग की उस ओर प्रकाश देखूंगी और जीवन में एक नई राह पर निकल पडूँगी जो मुझे स्वास्थ्य और खुशी, जिसकी मैंने बेहद चाह की थी, को पाने में मदद करेगा।

बचपन की कड़वी यादें

मैं एक गरीब और दुर्भाग्यपूर्ण परिवार में पैदा हुई थी। एक दूसरे से शादी करने से पहले मेरे दोनों माता-पिता विधवा-विधुर थे। मेरे पिता ने मेरी मां से शादी की ताकि वह उनके बच्चों का ख्याल रख सके। मेरी मां को मेरे पिता से शादी करने के लिए अपनी पिछले पति के साथ हुई बेटी को छोड़ना पड़ा था, जिन्हें–मेरी बड़ी बहन को–उनका पालन पोषण करने के लिए मेरी चाची को दे दिया गया था।

लेखिका एक गरीब परिवार में पैदा हुई थीं और उनके पिता अक्सर गुस्से में आकर उनके और उनके भाई के साथ दुर्व्यवहार करते थे।

कहा जाता है कि मेरे पिता पहले दयालु और सभ्य थे, लेकिन मेरे जन्म के बाद वे बदल गए थे। शायद यह हमारी बेहद गरीबी के कारण था। वह अक्सर गुस्सा हो जाते और मुझे मारते। जब तीन साल बाद मेरे भाई का जन्म हुआ, तो वे और भी गुस्सा होने लगे। वह अक्सर मुझे और मेरे भाई दोनों को जोर से पकड़ कर जमीन पर फेंक देते थे।

मेरी मां डर गई थीं कि मेरे पिता जो हमें इतनी जोर से फ़ेंकते थे तो हम शायद घायल हो जाएंगे या फिर मारे जाएंगे, इसलिए उन्होने उन्हें  छोड़ने और अपने गृह नगर लौटने का फैसला किया।

वह केवल 1 साल के मेरे भाई को उनके साथ ले जाने का इरादा रखती थी। लेकिन 4 साल की उम्र में भी, मुझे धुंधला सा संदेह हुआ था कि वह हमेशा के लिए जा रही थीं, इसलिए मैंने उनका पीछा करने की ठानी।

हमें अपनी मां के गृहनगर तक पहुंचने के लिए 10 किलोमीटर चलना पड़ा। मेरे पास कोई जूते नहीं थे, इसलिए जब तक कि हम अपने परिवार के घर के नजदीक पहुंचे तो मेरे पैर इतने ज़ख़्मी हो चुके थे और मैं इतनी पीड़ा में थी कि मैं और आगे नहीं चल सकती थी। मेरे रिश्तेदारों को आना पड़ा और मुझे उठा कर ले जाना पड़ा।

नाराजगी बढ़ती रही

लेखिका उपरवाले को दोषी ठहराती थीं और जीवन में अपने दुर्भाग्य के लिए गहरी नाराजगी और उदासी महसूस करती थीं।

जैसे जैसे मेरी उम्र बढ़ती गयी, मेरी नाराजगी भी बढ़ती गयी। जब हम उनके साथ रहते थे तब मुझे और मेरे भाई के साथ दुर्व्यवहार करने के लिए मैं अपने पिता से घृणा करती थी। और इतने सालों में, वह केवल एक ही बार हमें मिलने मेरी मां के गृहनगर में आए थे। गरीबी, क्रोध और दुःख में विसर्जित, मैंने वचन लिया कि मैं उन्हें कभी माफ नहीं करूंगी।

लेकिन मेरा दुर्भाग्य वहां नहीं रुका। मेरा एक हाथ विकृत और अक्षम था, और जब मैंने 9वीं कक्षा पूरी करने के बाद काम करना शुरू किया, तो घर का काम कुछ नौकरियों में से एक था जो मैं कर सकती थी। लेकिन जल्द ही मुझे दिल की समस्या के कारण घर लौटना पड़ा। पीड़ा के कारण मुझे सांस लेना भी मुश्किल लग रहा था।

सौभाग्य से, मुझे घर के काम करने के लिए अपने गृहनगर में एक अच्छे परिवार द्वारा नौकरी पर रखा गया था, और इसलिए मेरी दिल की समस्या और नहीं बिगड़ी। लेकिन, मेरे दिल की गहराई में, मैंने उपरवाले को मेरे प्रति अन्यायी होने के लिए दोषी ठहराया। मेरी बड़ी बहन और छोटा भाई दोनों स्वस्थ और तन्दुरुस्त थे, जबकि मैं बदसूरत और बीमार थी।

“गृहकार्य कुछ कामों में से एक था जो मैं अपने हाथ विकृत होते हुए भी कर सकती थी।”

यह देखकर कि मेरे चारों ओर हर कोई मुझसे अधिक कितना भाग्यशाली और खुश था, इससे मैं दुःखी और उदास हो जाती थी, यहाँ तक की कभी-कभी मैं अपने जीवन का अंत करना चाहती थी।

निरंतर रोग

18 साल की उम्र के बाद, मुझे पीड़ित करने के लिए और अधिक दुःख सामने आए। मेरे दिल की समस्या के अलावा, अन्य बीमारियों और स्थितियों जैसे गठिया, संतुलन विकार, अनिद्रा, और मुहँ के छाले, बिना किसी चेतावनी के एक के बाद एक आए।

चिकित्सा उपचार बहुत महंगा था और इसके लिए पैसे का इंतज़ाम करना हमेशा का एक संघर्ष था। मेरा जीवन यह बन कर रह गया था कि जब भी मुझे दर्द होता था तो मैं चिकित्सक के पास जाती और जब भी मैं बेहतर महसूस करती तो मैं काम पर जाती। लगातार धन की चिंताओं और शारीरिक दर्द ने ठीक होना कठिन बना दिया था, लेकिन मुझे कोई रास्ता नहीं दिख सका।

“मेरा जीवन यह बन कर रह गया था कि जब भी मुझे दर्द होता तो मैं चिकित्सक के पास जाती और जब भी मैं बेहतर महसूस करती तो मैं काम पर जाती”

मैं आसानी से क्रोधित होने लगी, मेरी मां, अन्य परिवार के सदस्यों, या किसी के साथ किसी भी समय लड़ने के लिए तैयार। मैं किसी भी आलोचना या थोडा सा भी अपमान सहने में असमर्थ थी। जो लोग मुझे मेरे बचपन में जानते थे, मुझे इतना बदला हुआ देखकर उन्हें आश्चर्य होता।

फिर 2013 में, मेरी आंखों की समस्या सामने आई। यह कष्टप्रद आँखों से शुरू हुआ। मुझे एक रेस्तरां में अपना काम छोड़ना पड़ा और इलाज के लिए मेरे गृहनगर में लौटना पड़ा। मैंने सोचा कि मुझे केवल थोड़े से समय के लिए आराम करने की आवश्यकता होगी, लेकिन जल्द ही मुझे कंजाक्तिविटिस (conjunctivitis) होने का निदान किया गया, जिसे आमतौर पर आँख आना के रूप में जाना जाता था। तीन महीने के इलाज के बाद, डॉक्टर ने कहा कि मुझे केराइटिस (keratitis) हुआ था और सर्जरी की आवश्यकता थी।

मैं इस बात के बारे में चिंता करती रहती थी कि भुगतान करने के लिए मेरे पास पर्याप्त पैसा नहीं है, ना ही ओपरेशन के बाद कोई मेरी देखभाल करने के लिए है, और अंधे हो जाने की संभावना के बारे में भी मुझे चिंता होती थी। मैं स्वर्ग, पृथ्वी और हर किसी से नाराज थी। मैं और भी आत्मघाती हो गयी थी और बस अपने जीवन को खत्म करना चाहती थी।

अप्रत्याशित सलाह

जैसे कि कहावत है, “जब चीजें चरम बिंदु तक पहुंच जाती हैं, तो वे केवल विपरीत दिशा में ही आगे बढ़ सकती हैं।” यह मेरे जीवन के सबसे हताश क्षण में हुआ था कि जिस सहायता की मुझे ज़रुरत थी वह मुझे मिली: मेरे एक पड़ोसी की अनपेक्षित सलाह ने मुझे मेरे पूरे जीवन की यात्रा को दोबारा बदलने का मौका दिया।

“यह मेरे जीवन के सबसे हताश क्षण में हुआ कि मुझे पर्याप्त सहायता मिली।”

मेरी पड़ोसन शहर में रहती थीं और कुछ ही दिनों के लिए वे हमारे गृहनगर में वापस आई थीं। उस समय, उन्होने मुझे देखा और मुझे ज़ुआन फालुन  नामक पुस्तक पढ़ने के साथ पांच व्यायाम का अभ्यास करने की सलाह दी। उन्होने कहा कि यह मेरी मदद करेगा।

मैंने जाना कि ज़ुआन फालुन एक पारंपरिक मन और शरीर को सुधारने के लिए फालुन दाफा या फालुन गोंग नामक पारंपरिक चीनी अभ्यास की शिक्षाओं की मुख्य पुस्तक थी। यह सत्य, करुणा और सहनशीलता के नैतिक और आध्यात्मिक सिद्धांतों को सिखाता है और इसमें चार धीमी गति से करने वाले अभ्यास और एक बैठकर करने वाला ध्यान अभ्यास शामिल हैं।

जीवन में एक नया पथ

पहले तो मैंने अपने पड़ोसी की बात नहीं सुनी, ना ही विश्वास किया कि फालुन दाफा मेरी मदद कर सकता है। हालांकि, वह बहुत निष्ठावान थीं और शहर लौटने के बाद भी उन्होने मुझे कई बार कॉल किया और मुझे उनकी बहन के घर पर जाकर उनसे पुस्तक उधार लेने के लिए आग्रह किया।

अंत में मैंने उनकी सलाह मानी। पहले तो जब उनकी बहन ने मेरी आंखों की स्थिति देखी तो वे हिचकिचाई, लेकिन मेरा दृढ़ संकल्प देखने के बाद उन्होंने मुझे पुस्तक दे दी।

लेखिका ज़ुआन फालुन पढ़ते हुए, जिस पुस्तक ने उनका जीवन बदल दिया।

मेरे हाथों में ज़ुआन फालुन को पकड़कर, मुझे ऐसा लगा जैसे मैं इसे पहले से ही जानती थी और मेरी दृष्टि बुरी होते हुए भी, तुरंत पढ़ना शुरू कर दिया। मुझे आश्चर्य हुआ कि मैंने पूरी किताब दो दिनों में पूरी पढ़ ली, और न केवल मेरी दृष्टि अब धुंधली नहीं रही, बल्कि मेरी आँखों में दर्द भी कम हो गया था। मैंने व्यायामों का अभ्यास करना शुरू किया, जिसे करना मुझे बहुत ही सरल लगा और मैं आसानी से उन्हें सीख पाई।

ज़ुआन फालुन  पढ़ने और अभ्यास करने के सिर्फ एक हफ्ते बाद, मेरे सभी रोग के लक्षण गायब हो गए। जैसा कि पुस्तक में वर्णित है, मेरे शरीर के शुद्ध होने की प्रक्रिया के दौरान मुझे कई दिनों तक उल्टी और दस्त जैसी प्रतिक्रियाएं हुई। फिर मैं शुद्ध हो गयी और आखिरकार यह अनुभव किया कि स्वस्थ होना क्या होता है। मुझे हल्कापन और मेरा शरीर ऊर्जा से भरा महसूस हुआ। मेरी त्वचा का रंग भी हल्का हो गया, जिसमें एक गहरा कालापन हुआ करता था।

मैं इतनी खुश थी कि मैंने अपनी साइकिल पर सवार होकर अपने रिश्तेदारों को बताने के लिए पूरे शहर में सवारी की। मैं चाहती थी कि वे भी इस जादुई पुस्तक ज़ुआन फालुन और फालुन दाफा के अभ्यास के बारे में जान सकें। यह वास्तव में पहली बार था जब मैंने अपने जीवन में खुशी और आशा का अनुभव किया।

ज़ुआन फालुन पढ़ने और फालुन दाफा अभ्यास करने के एक सप्ताह बाद, लेखिका के सभी रोगों के लक्षण गायब हो गए थे। वह इतनी खुश थीं कि वह अपने रिश्तेदारों को बताने के लिए पूरे शहर में अपनी साइकिल पर सवार होकर घूम आईं।

दुःखों से विदाई

ज़ुआन फालुन  ने मेरे जीवन के बारे में मेरे कई प्रश्नों और मेरे जीने के कारणों का उत्तर दिया। जीवन की बहुमूल्यता और उद्देश्य को समझने के बाद मेरा क्रोध विघटित हो गया जो मुझे मेरे दुर्भाग्य और पीड़ा के समय परेशान करता था।

मैंने उपरवाले को दोषी ठहराना छोड़ दिया और अब दूसरों से उनके स्वास्थ्य और संपत्ति के लिए ईर्ष्या नहीं करती थी। मैंने अपने आक्रामक और अधीर तरीकों को बदल दिया और अब चिल्लाना और दूसरों के साथ बहस करना बंद कर दिया। मैं अपने जीवन से प्यार करने लगी थी और धीरे-धीरे अतीत की बातों को भुला देना शुरू किया, और अपने पिता सहित दूसरों को माफ करना सीखा।

मैंने समस्याओं के समाधान के लिए खुद के भीतर झांकने पर ध्यान केंद्रित किया, और सत्य, करुणा और सहनशीलता के सिद्धांतों का पालन करके एक बेहतर व्यक्ति बनने के लिए अपने नैतिक चरित्र को बेहतर बनाने का प्रयास किया।

लेखिका फालुन दाफा का बैठकर करने वाला ध्यान अभ्यास कर रही हैं।

जैसे-जैसे मैंने हर दिन ज़ुआन फालुन का अध्ययन करना जारी रखा, मैंने खुद को बुरे और अच्छे के बीच का अंतर करने और मन की शांति के साथ एक सरल और उपयोगी जीवन जीने में सक्षम पाया। मैंने यह समझ लिया कि वास्तविक खुशी और अच्छा भाग्य हमारे अच्छे विचारों और आचरण और दूसरों के प्रति हमारे विचार से आते हैं, और हम सबसे अधिक पीड़ित होते हैं यदि हम घृणा और नाराजगी को हमारे दिल में बसा लेते हैं।

लगभग तीन साल बीत चुके हैं। मैं फालुन दाफा का धन्यवाद करती हूं कि अब मैं अच्छे स्वास्थ्य का आनंद ले सकती हूं, अब मैं बीमारी से अंतहीन रूप से पीड़ित नहीं होती हूं जैसा कि मैं हुआ करती थी। मैं काम पर हर दिन जाती हूं और यहां तक ​​कि मैंने मोटरबाइक भी खरीदी है, कुछ ऐसा जिसका मैं पहले केवल सपना ही देख सकती थी। अब मैं बिना थके हुए 200 किलोमीटर की सवारी करने में सक्षम हूं।

मुझे अपने आस-पास के हर किसी के प्रति करुणा की भावना महसूस होती है और मेरा दिल जीवन से पीड़ित कई लोगों के लिए दुःखी होता है। मैं अपनी कहानी को इस इच्छा से साझा करती हूं कि मेरा अनुभव दूसरों को अपने अनुभव से मिलता जुलता लगे। मुझे उम्मीद है कि अधिक लोगों को ज़ुआन फालुन  पढ़ने और फालुन दाफा के बारे में पता करने का मौका मिलेगा ताकि वे मेरे जैसे स्वस्थ और खुश हो सकें।

गुयेन थाई हांग (Nguyen Thi Hong) वियतनाम में रहती हैं।


संपादक का संदेश:

फालुन दाफा (फालुन गोंग के नाम से भी जाना जाता है) सत्य, करुणा और सहनशीलता के सार्वभौम सिद्धांतों पर आधारित एक आत्म-सुधार ध्यान प्रणाली है, जो स्वास्थ्य और नैतिक चरित्र को सुधारने और आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त करने के तरीके सिखाती है।

यह चीन में 1992 में श्री ली होंगज़ी द्वारा जनता के लिए पेश किया गया था। वर्तमान में 114 देशों में 100 मिलियन से अधिक लोगों द्वारा इसका अभ्यास किया जा रहा है। लेकिन 1999 के बाद से इस शांतिपूर्ण ध्यान प्रणाली को क्रूरता से चीन में उत्पीड़ित किया जा रहा है।

अधिक जानकारी के लिए, कृपया देखें:  falundafa.org and faluninfo.org. सभी पुस्तकें, व्यायाम संगीत, संसाधन और निर्देश पूरी तरह से निःशुल्क, कई भाषाओँ में (हिन्दी में भी) उपलब्ध हैं।

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