“केवल भगवान ही उसे बदल सकते हैं।” लोगों ने मेरी पीठ के पीछे यही कहा। मैं एक चोर, एक डाकू, नशे की लत में ग्रस्त, एक बिगड़ा हुआ इंसान था। लेकिन जब उन्होंने मुझमें बदलाव देखा, तो वे अपनी आंखों पर विश्वास नहीं कर सके।

यह कहानी उस बारे में है कि मैंने अपने जीवन को कैसे बदला—हालाँकि तब ऐसा लगता था कि कोई उम्मीद नहीं थी।

कई लोगों के लिए, जेल जाना एक जागृत करने वाला संदेश होता है जो संकेत देता है कि वे जीवन में गलत राह पर थे। मेरे लिए, यह एक बेहतर आपराधी कैसे बनना, यह सीखने के लिए एक प्रशिक्षण मैदान था।

पहली बार जब मुझे जेल की सजा सुनाई गई थी, तब मैं सिर्फ 18 साल का थामैं अपने पड़ोसियों से मोटरबाइक चुराते हुए पकड़ा गया था।

यह जो मैंने किया था उससे मेरे माता-पिता बहुत ही शर्मिंदा थे। भले ही अपराध अपेक्षाकृत मामूली था, फिर भी मेरे पिता ने जोर दिया कि मुझे सलाखों के पीछे कैद कर लिया जाए, इस आशा से कि मैं सही रास्ता चुनना सीखूं। उनका दिल टूट गया था, लेकिन उन्हें लगा कि उनके पास कोई अन्य विकल्प नहीं था।

डाँग थाप अपनी युवावस्था में

युवावस्था से ही विद्रोही

अपने जीवन के पहले दिनों को देखूं तो, लालच और आलस्य के मेरे मुख्य गुण छोटी उम्र से ही शुरू हो गए थे। मेरी माँ अक्सर बीमार रहती थी, इसलिए मुझे अपने दादा दादी के साथ रहने के लिए भेज दिया गया था। मेरा परिवार उस क्षेत्र में काफी समृद्ध और प्रसिद्ध था, और ऐसा लगता था कि मुझे माता-पिता के प्यार और मार्गदर्शन के बजाए पैसे से बड़ा किया गया था। मैं विद्रोही था और अपने आप को हर बात का हकदार समझता था, और ग्रेड 2 से ही मैंने बिलियर्ड्स खेलने के लिए रात में बाहर निकलना शुरू कर दिया था। मैं अपने सारे पैसे खर्च करने के बाद लौटता। मेरी दादी मुझे डांटती थी लेकिन मैं इसकी परवाह नहीं करता था।

जब मैं ग्रेड 5 में था, मेरी दादी ने मुझे अपने माता-पिता के घर भेज दिया क्योंकि वह अब मेरे विद्रोही और विचलित व्यवहार को संभाल नहीं पा रही थी। उसके बाद मैं ज्यादातर अकेला था, लेकिन मैं जो चाहता था मुझे दिया जाता थाप्यार और मुझपर ध्यान देने को छोड़कर, जो मैं वास्तव में चाहता था।

मेरे माता-पिता ने अपना अधिकांश समय काम पर बिताया, इसलिए उन्होंने मुझे पैसे देकर उनकी अनुपस्थिति के लिए मना लिया। उस समय मेरे पास एक मिलियन से अधिक वियतनामी डोंग (VND) थे, जो एक महीने के लिए औसत व्यक्ति के वेतन के बराबर था। कहने की जरूरत नहीं है, मैंने इसे बिना परवाह किये खर्च किया और यह एक पल में खर्च हो गए।

ग्रेड 8 को पहुँचने तक, मैं एक ऐसा जीवन जी रहा था जो अन्य बच्चे ईर्ष्या के साथ देखते थे। मैंने गेम खेलने या दिन-रात चारों ओर यहाँ वहां भटकने में समय बिताया और मैंने स्कूल जाने की परवाह नहीं की। मैंने अपनी माँ से चालाकी से और अधिक पैसे लिए, कभी-कभी VND10 मिलियन तक। जब उन्हें एहसास हुआ कि मैं एक बिगड़े हुए व्यक्ति में बदल रहा था तो उन्होने मुझे जो कुछ भी चाहिए था वो देना बंद कर दिया, इसलिए मैं घर से पैसे चुराने लगा। जब वह पर्याप्त नहीं होता था तो मैंने बड़ी योजनाएं बनाईं।

मैंने अपने पड़ोसियों की मोटरबाइक चोरी करना शुरू कर दिया और उन्हें पैसे के बदले में गिरवी रख दिया। मेरे माता-पिता दोनों प्रतिष्ठित लोग थे, इसलिए मेरे लिए यह सब करना कुछ देर के लिए आसान था। लेकिन जैसे ही मैं और अधिक लापरवाह हो गया, मैंने चोरी की संपत्ति को उच्च कीमतों के लिए बेच दिया और फँस गया। मुझे जेल भेजा गया जब मैं मुश्किल से 18 वर्ष का था।

(Photo by Mitchel Lensink on Unsplash.com)

जेल से अन्दर-बाहर

मुझे 9 महीने के बाद मेरी पहली जेल की अवधि से रिहा कर दिया गया था। जो समय मैंने बिताया उसने मुझे मेरे तरीकों को बदलने के लिए प्रेरित नहीं किया; इसके विपरीत, मैंने इसे एक असाधारण अनुभव माना। मैं बदतर हो गया। मैंने बल और हेरफेर के माध्यम से जो मैं चाहूँ उसे प्राप्त करना सीखा। मैंने काम करवाने के लिए हिंसा को प्राथमिकता दी। मुझे लगा कि मैं अपने शहर का मालिक हूँ, और जब किसी ने अपमानजनक ढंग से मुझसे बात की तो मैं उससे एक क्रूर तरीके से पेश आता थाभले वह मेरा कोई रिश्तेदार ही क्यों न हो।

19 साल की उम्र में, मुझे दूसरी बार जेल की सजा सुनाई गई। वहां रहते हुए मैं साइगॉन के कुछ सबसे कुख्यात गिरोहों के साथ मिला जुला और और भी अधिक अनुभव प्राप्त किए। मेरे लिए, जेल का एक साल मूल्यवान प्रशिक्षण के एक वर्ष की तरह लग रहा था। जब मैं बाहर निकला तो मैं अपने अपराध करने में और अधिक पेशेवर बन गया था, और अभी भी मैं उन गिरोहियों के संपर्क में रहा था, जो मुझे जेल में मिले थे।

मैं एक अमीर बच्चा होने से एक सच्चे गुंडे में परिवर्तित हो गया था। मैं एक यकुजा (जापानी हिंसक समूह का सदस्य) की तरह था और दुकान मालिकों, सड़क विक्रेताओं और बाजारों में “सुरक्षा शुल्क” या “हफ्ता” वसूल करता था। मारियुआना मेरा पसंदीदा ड्रग बन गया था। इससे मुझे जीवन संतुष्टि मिली और मुझे एक भ्रमपूर्ण दुनिया में रहने में सक्षम बनाया जहां मैं जो कुछ भी करता उसे भूल सकता था।

मेरे पिता बहुत परेशान थे। उन्होने मुझे कई बार सीधे रास्ते पर वापस लाने की कोशिश की लेकिन अंत में उन्होंने मुझसे आस छोड़ देने का फैसला किया। यद्यपि मेरी माँ ने मुझे पूरी तरह से प्यार किया था, लेकिन वह कुछ भी नहीं कर सकती थी।

26 साल की उम्र में मैंने आधिकारिक तौर पर जेल जाकर अपनी जवानी को त्याग दियाइस बार 4 साल के लिए। जब मैं बाहर निकला तब तक मैं 30 से अधिक का हो चुका था। कानून ने मुझे रोक दिया था लेकिन अंदर से मैं अभी भी वही जानवर था। मुझे कभी-कभी अपने माता-पिता पर तरस आता था और सोचा करता था कि काश मैं ऐसा नहीं होता। मैं कामना करता था कि मैं बस मर जाऊं ताकि कोई मेरे कारण पीड़ित न हो।

जेल से बाहर निकलने के बाद मैंने अपना जीवन दोबारा शुरू करने का दृढ़ संकल्प किया। मैंने अपनी मां से एक स्टोर खोलने के लिए VND100 मिलियन लिए और वादा किया कि मैं अब अच्छा बन जाऊंगा। परन्तु, व्यवसाय को जितना सफल होने की मैंने आशा की थी उतना नहीं हुआ, और मेरे अधिकांश ग्राहक मेरे मित्र थे। मैं अधीर हो गया था, और कुछ ही समय बाद मैंने व्यवसाय बंद कर दिया। मैं अपने गृह नगर लौट आया और उसी विनाशकारी रास्ते पर वापस चल पड़ा जिससे मैं भागने की कोशिश कर रहा था। मुझे पता था कि मैं अपनी माँ को चोट पहुंचा रहा था, लेकिन मैं और क्या कर सकता था? एक नई शुरुआत करना मेरी पहुंच से बहार और असंभव लग रहा था।

(Photo by Rainer Taepper on Unsplash)

आत्महत्या से बाल बाल बच निकला

यद्यपि मैं एक घृणित इंसान था, गहराई में मुझमें अभी भी कुछ विवेक बाक़ी था और अक्सर दूसरों को वर्षों से पीड़ा पहुँचाने पर अन्दर से टूट चूका था। इससे मुझमें आत्मघाती विचार पैदा हुए। एक दिन, जब सभी आशा छूट गई थी तब, मैं पास के पुल की ओर चल पड़ा। बिना किसी हिचकिचाहट, मैं कूद गया। मैं सिर्फ इस जीवन की शर्मिंदगी, घृणा, और नकारात्मकता को खत्म करना चाहता था।

फिर जब मौत मेरे सामने खड़ी थी, तो जीने की मेरी इच्छा पहले से कहीं अधिक मजबूत हो गई। मैं उस ठिठुरते पानी में पागलों की तरह तैरने लगा और मदद के लिए चिल्लाने लगा। मैं मौत से बाल बाल बच निकला। इस अनुभव के माध्यम से मैंने सीखा कि अभी मुझे और बहुत कुछ करना बाकी था।

मैं घर वापस चला गया क्योंकि मेरे पास कहीं और जाने के लिए नहीं था। मेरे पिता मुझे देखना भी नहीं चाहते थे, लेकिन मेरी माँ का मानना था कि मुझे एक और मौका मिलना चाहिए। उनका प्यार इतना गहरा था कि यह वास्तव में मुझे छु गया। एक बार फिर, मैंने बदलने की कोशिश की। उन्होने मेरे लिए एक पत्नी ढूंढी, जिन्होने मेरी देखभाल की और अपना बाकी का जीवन मेरे साथ बिताना चाहा। लेकिन, मैं बिखर गया था। मैं अपने व्यवसाय पर पैसा खोते रहा और अभी भी मेरी पिछली जीवनशैली का जूनून मुझपर सवार था। मेरी पत्नी ने मेरे कारण कई आँसू बहाए।

मामला और बिगड़ गया जब मेरे माता-पिता ने मेरे कारण अपनी सारी पूँजी खो दी। मेरे पिता इतने धृणापूर्ण हो गए थे कि वह चिढ़चिढ़े हो गए थे और जब भी मुझे देखते, वे काफी आक्रमक हो उठते। अधिकांश समय घर का वातावरण भारी और तनावपूर्ण होता था। मैं इसे सहन नहीं कर सका, इसलिए आखिर में मैंने दो साल तक घर छोड़ कर जाने का फैसला किया। उस अवधि के दौरान मुझे किसी का भी फोन कॉल नहीं आया और मेरे माता-पिता से मुझे कोई खबर नहीं मिली। ऐसा लगा जैसे मेरे जाने से उन्हें राहत मिली हो, और इस बात से मैं बहुत निराश हो गया।

मैंने बदलना कैसे सीखा

हालांकि, जीवन ने अभी तक मुझसे पूरी तरह आशा नहीं छोड़ी थी। मैं बहुत शिक्षित नहीं था, लेकिन मुझे बिन्ह डुओंग (Binh Duong) में एक कारखाने में नौकरी मिल गई और मैंने वैध तरीके से पैसे कमाना शुरू किया।

काम से घर लौटने के रास्ते पर एक दिन मैंने देखा कि एक आदमी लंबे समय तक, बिलकुल शांत होकर एक पार्क में अपने पैर पर पैर रखकर बैठे हुए थे। मैं उनके पास गया और मैंने उनकी सीडी प्लेयर से शांतिपूर्ण, मधुर संगीत सुना। संगीत अपरिचित था, लेकिन ऐसा लग रहा था कि यह मेरी आत्मा को उजागर कर रहा है और मेरे मन को उजागर कर रहा है।

मैं उनके करीब आधे घंटे तक बैठा रहा। जब वह अंततः हिले तो मैंने पूछा कि वे क्या कर रहे थे। उन्होंने समझाया कि वह सच्चाई, करुणा और सहनशीलता के सिद्धांतों के आधार पर एक प्राचीन बौद्ध चिगोंग अभ्यास, फालुन दाफा, या फालुन गोंग का अभ्यास कर रहे थे। उन्होंने कहा कि हर दिन पांच फालुन दाफा अभ्यास के व्यायाम शरीर और दिमाग के लिए फायदेमंद है।

डाँग थाप फालुन गोंग का साधना अभ्यास करते हुए

मैं इस आत्म-साधना की विधि के बारे में जानने के लिए उत्साहित था, जिसका उन्होंने वर्णन किया था, इसलिए मैंने तुरंत कुछ डिस्क उनसे उधार लिए जिनमें फालुन दाफा की शिक्षाएं थीं। उन्होने बस मुझे उन्हें रखने के लिए कहा और बदले में कुछ भी नहीं मांगा।

मैं अपने अपार्टमेंट में वापस गया और पहली डिस्क चलाई। गर्माहट और घनिष्ठता की भावना ने मुझे घेर लिया, और व्याख्यान में फालुन दाफा के शिक्षक द्वारा बोले जाने वाले शब्दों से मुझमें भलाई की भावना जागृत हुई। शिक्षक ने मानवता, करुणा और गरिमा की बात की, और मैं शर्म के मारे फूट फूट कर रोने लगा। मुझे एहसास हुआ कि मैंने अपने परिवार या समाज में योगदान करने के लिए कुछ भी नहीं किया है, फिर भी मुझे अपने माता-पिता के प्रति मुझे यूं अकेला छोड़ देनेपर घृणा महसूस हुई।

अगले दिन काम से घर आने के बाद मैंने दूसरी डिस्क चलाई। मैंने ध्यान अभ्यास किया और फालुन दाफा को परिश्रमपूर्वक अभ्यास करने और शिक्षाओं का पालन करके खुद को सुधारने की मेरी इच्छा को जोर से बोलकर ज़ाहिर किया। हर दिन मैंने व्याख्यान सुनने में समय बिताया और मुझे लगा जैसे मेरा दिमाग शुद्ध हो रहा था। सभी नौ व्याख्यानों के बाद, मैंने पांच अभ्यास करने शुरू कर दिएचार अलग-अलग खड़े रहकर करने वाले अभयास और एक पैर पर पैर रखकर बैठने की स्थिति में करने वाला अभ्यास।

यद्यपि अभ्यास बहुत ही धीमी गति के हैं, वे बहुत ही शक्तिशाली हैं, और पहले कुछ मुद्रा करने के बाद मैं लगभग मूर्छित हो गया। मेरे शरीर में तीन दिनों तक पीड़ा रही और मैं मुश्किल से चल पा रहा था। आश्चर्य की बात है, चौथे दिन मैं सीधे बैठ सका, जो कि कुछ स्वास्थ्य समस्याओं के कारण मैं लंबे समय तक ऐसा करने में असमर्थ था। मैंने अपने आप को  पूरी तरह से सक्रिय महसूस किया। अभ्यास चमत्कारिक थे, उस बिंदु तक जहां यह अनोखे लग रहे थे। जैसे जैसे मैंने फालुन दाफा की चिकित्सा शक्ति को महसूस करना शुरू किया, मैंने हर दिन थोड़ा और अभ्यास करने की कोशिश की।

मैं ध्यान से फालुन दाफा की मुख्य पुस्तक “ज़ुआन फालुन” को पढ़ता हूं, आंतरिक अर्थों को समझने की कोशिश करता हूं और अपनी विनाशकारी प्रवृत्तियों और अन्य नकारात्मक अनुलग्नकों को छोड़ने की कोशिश करता हूं। अभ्यास ने मुझमें बेहतर काम करने की अपनी क्षमता में भी सुधार लाया है, और परिणाम दिन-प्रतिदिन स्पष्ट रूप से दिखाइ देते हैं।

डाँग थाप फालुन दाफा की मुख्य शिक्षा “ज़ुआन फालुन” का अध्ययन करते हुए।

मेरे माता-पिता का सपना सच हुआ

फालुन दाफा के अभ्यास के माध्यम से मैंने अपनी बुरी आदतों को छोड़ दिया और दूसरों की बातें सुनना और सहिष्णु होना सीखा—दूसरे शब्दों में, शिक्षाओं में बताए अनुसार मैंने दूसरे व्यक्ति को खुद से पहले रखना सीखा। मैंने अपने तरीकों को बदल दिया और सच्चाई, करुणा और सहनशीलता की ओर खुद को आगे बढ़ाया। मैंने पीना और धूम्रपान करना छोड़ दिया। मैंने नकारात्मक विचारों और भावनाओं को छोड़ दिया, और मेरे माता-पिता और मेरी पत्नी से दिल से माफ़ी मांगने के लिए घर लौट आया।

समझौता करने के बाद अपनी मां के साथ डाँग थाप

पहले मेरे पिता मुझे देखना भी नहीं चाहते थे क्योंकि उनका मानना था कि कोई भी चीज़ वास्तव में मुझे बदल नहीं सकती। मैंने पहले से ही बहुत अवसर मांगे थे। मेरे लिए, मेरी माँ ने बार-बार मुझे माफ करने के लिए आग्रह किया। आखिरकार, उन्होने मुझे माफ़ कर दिया लेकिन उन्होने मुझपर पूरी तरह से भरोसा नहीं किया। मुझे इसकी परवाह नहीं थी, क्योंकि मुझे पता था कि मैं उन्हें साबित करूंगा कि इस बार मैं सचमुच बदल गया था।

जब मेरे माता-पिता मुझे एक और मौका देने के लिए तैयार थे, तो मैं काम करने के लिए बिन्ह डुओंग लौट आया। मैंने अपनी हर चीज में सच्चाई, करुणा और सहनशीलता को शामिल करने की पूरी कोशिश की, और मेरा व्यवसाय सुचारू रूप से विकसित हुआ। मैंने अपनी पत्नी के साथ भी समझौता किया था, और हर दिन हमारा रिश्ता मजबूत होता गया। उन्होने जल्द ही एक बच्चे को जन्म दिया। मेरी पत्नी अच्छी तरह से समझ गई थी कि फालुन दाफा ने मुझे बचा लिया है और मुझे वापस उनके जीवन में लाया है, इसलिए वे मुझे अक्सर शिक्षाओं का अध्ययन करने की याद दिलाती थी।

अपनी पत्नी और छोटे बेटे के साथ डाँग थाप

कुछ साल बाद, जब मैंने एक अच्छी राशि बनाई, तो मैं एक किसान बनने के लिए अपने गृह नगर लौट आया। मेरे माता-पिता वास्तव में देख सकते थे कि मैंने अपना जीवन कैसे बदल दिया था और वे बहुत ही खुश थे। मेरे पड़ोसियों ने अक्सर मजाक किया, “तुम बदल गए हो, मैं अब तुम्हें पहचान नहीं पा रहा हूं!” उन्होंने पूछा कि इस तरह का परिवर्तन कैसे संभव हो सकता है, और मैंने उन्हें फालुन दाफा के बारे में बताया।

मुझमें हुए परिवर्तन से प्रेरित, मेरे माता-पिता और मेरे पड़ोसियों ने भी अभ्यास सीखना शुरू कर दिया। उन्होंने अभ्यास और अध्ययन समूहों का गठन किया और तब से वे एक साथ अभ्यास करने लगे हैं। वे सभी सहमत हैं कि उन्होंने फालुन दाफा के कारण—शारीरिक रूप से, मानसिक रूप से और आध्यात्मिक रूप से अद्भुत लाभ अनुभव किए हैं। मेरे गृह नगर में, फालुन दाफा अभ्यासिओं की संख्या काफी बढ़ गई है।

मैं वास्तव में हर तरह की परिस्थितिओं से गुज़रा हूँ। मैं आपराधिक जीवन में डूब गया था और सही और गलत, अच्छे और बुरे के बीच अंतर करने में सक्षम नहीं था। मैंने सोचा था कि कोई भगवान मुझे बचा नहीं सकता है और मेरे मरने तक मैं एक शर्मनाक जीवन व्यतीत करूंगा। सौभाग्य से, भाग्य ने मुझे छोड़ा नहीं। यह मुझे एक अजनबी के पास ले गया जिसने मुझे फालुन दाफा के बारे में बताकर मुझे अपना जीवन बदलने में मदद की। मैं सच में नहीं जानता कि अगर मैं इस प्राचीन चीनी अभ्यास को नहीं सीखाता तो मैं कहाँ पहुँचता। इसने वास्तव में मुझे—एक पूर्व-अपराधी का नेतृत्व किया जो कई बार जेल जाने के बाद भी अपने तरीकों को बदल नहीं सका था—एक परिपूर्ण, जिम्मेदार जीवन और एक सुखद अंत तक ले आया।


संपादक का संदेश:

फालुन दाफा (फालुन गोंग के नाम से भी जाना जाता है) सत्य, करुणा और सहनशीलता के सार्वभौम सिद्धांतों पर आधारित एक आत्म-सुधार ध्यान प्रणाली है, जो स्वास्थ्य और नैतिक चरित्र को सुधारने और आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त करने के तरीके सिखाती है।

यह चीन में 1992 में श्री ली होंगज़ी द्वारा जनता के लिए पेश किया गया था। वर्तमान में 114 देशों में 100 मिलियन से अधिक लोगों द्वारा इसका अभ्यास किया जा रहा है। लेकिन 1999 के बाद से इस शांतिपूर्ण ध्यान प्रणाली को क्रूरता से चीन में उत्पीड़ित किया जा रहा है।

अधिक जानकारी के लिए, कृपया देखें:  falundafa.org and faluninfo.org. सभी पुस्तकें, व्यायाम संगीत, संसाधन और निर्देश पूरी तरह से निःशुल्क, कई भाषाओँ में (हिन्दी में भी) उपलब्ध हैं।

Share

वीडियो

Ad will display in 09 seconds