इंसान के अंधकारमय जीवन में कोई रोशनी का उजाला लेकर आए तो लोग उसे मसीहा मानते हैं। दिल्ली पुलिस की एक अधिकारी डीसीपी असलम खान ने इंसानियत की ऐसी ही मिसाल पेश की है। एक ट्रक चालक की मृत्यु के बाद उनके परिवार को अपने कमाई का आधा वेतन देने वाली इस आईपीएस अधिकारी की कहानी हर किसी के लिए प्रेरणास्रोत हैं।

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जम्मू-कश्मीर के रहनेवाले मानसिंह एक ट्रक चालक थे और एक रात जब वे दिल्ली से ट्रक लेकर अपने घर की ओर जा रहे थे तो रास्तें में कुछ लुटेरों ने उनकी हत्या कर दी। उस रात उनके बच्चे बलजीत कौर, जसमीत कौर, अस्मित कौर, पत्नी दर्शन कौर और उनकी माँ घर में चैन से सो रहे थे। किसी को भी नियति के इस खेल की भनक तक नहीं लगी।

मानसिंह की मौत के बाद घर की माली स्थिती बेहद बिगड़ गई। कई बार पूरे परिवार को भूखे ही सोकर रात गुज़ारनी पड़ती थी। लेकिन एक दिन अचानक ही दिल्ली से फोन आया जिसके बाद उनकी कठिनाइयाँ कम होती चली गयीं।

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इस हत्याकांड की जाँच कर रही दिल्ली पुलिस डीसीपी असलम खान को जब इस परिवार की मुश्किलों के बारे में पता चला तो उन्होंने फ़ोन कर उन्हें न सिर्फ आश्वासन दिया बल्कि अपनी वेतन का आधा हिस्सा उन्हें भेजने का फैसला किया, और वादा किया कि वे उनके परिवार के लिए सरकारी सहायता प्रदान करवाने की कोशिश करेंगी। असलम खान मानसिंह के परिवार को बिना जाने और मिले अपना आधा वेतन भेजती हैं, और हर दो दिन में उन्हें फ़ोन कर उनका हालचाल पूछती रहती हैं।

आईपीएस अधिकारी के इस प्रयास ने एक बार फिर से उस परिवार को ख़ुशी की आशा दी है। इससे साबित होता है कि इंसानियत अभी भी जिंदा है। मानसिंह की बेटी बलजीत भी असलम खान की तरह आईपीएस अधिकारी बनना चाहती हैं।

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