मैंने ‘आध्यात्मिक जागृति’ के लिए अपने शरीर को पूर्ण रूप से शारीरिक गतिविधियों में झोंक दिया था!

वैंकूवर (Vancouver), बीसी (B.C.) के पास एक सुधारात्मक सुविधा (correctional facility) में ड्यूटी पर मार्क टिकनर (Mark Tickner)

(Courtesy of Mark Tickner)

मैं पिछले 18 सालों से वैंकूवर के पास एक संघीय जेल में सुधारक अधिकारी के रूप में काम कर रहा हूँ। यह नौकरी अविश्वसनीय रूप से मानसिक और शारीरिक रूप से थका देने वाली है—कभी-कभी अनपेक्षित ही हिंसक हालात बन जाते हैं। ज्यादातर मेरे अंदर चल रहे आंतरिक संकट और व्यसनों के कारण, मैं लंबे समय से इस गतिशीलता को संतुलित करने का संघर्ष कर रहा था। यह एक परंपरागत चीनी ध्यान अभ्यास के तरीके हैं जिनसे मेरी नौकरी, मेरा जीवन और स्वयं के प्रति मेरा दृष्टिकोण पूरी तरह से बदल गया है।

जीवन के अर्थ से जंग

जब मैं बहुत छोटा था, पूर्वस्कूल से प्राथमिक और मिडिल स्कूल तक, मुझे हमेशा लोगों और समाज से कुछ हद तक विरक्तता महसूस होती थी। यह सूक्ष्म भावना मेरे दिमाग के अंदर थी, अलगाव की भावना और वास्तव में किसी से संबंध न होने की भावना। जैसे-जैसे मैं बड़ा हो रहा था, यह भावना और मजबूत होती जा रही थी, जिससे मैं लगातार हताश और भ्रमित हो रहा था कि मैं यहाँ के लिए फिट हूँ भी या नहीं। मुझे अन्य लोगों से मिलने जुलने में कोई परेशानी नहीं थी और मेरे दोस्त भी थे, फिर भी मुझे अंदर से एक खालीपन का एहसास होता था।

एक रात, बिस्तर पर लेटे हुए, मैं अंधेरे को देख रहा था और अपने जीवन के उद्देश्य के बारे में सोच रहा था। अचानक, मैंने अपने माथे पर पड़ती हुई रोशनी देखी जो छत से आ रही थी। मुझे यह बहुत अजीब लगा लेकिन मैं डरा नहीं। “यह रोशनी कहाँ से आ सकती है?” मैंने सोचा। उस समय, हमारा घर एक दूरदराज ग्रामीण इलाके में था, कारों या प्रकाश के किसी भी संभावित प्रतिबिंब से दूर। यह अनुभव हमेशा मेरे साथ रहा और इसने आध्यात्मिक जिंदगी के बारे में मेरी जिज्ञासा को बढ़ा दिया। 1990 में, मैंने अपने सवालों के जवाब ढूँढने के लिए घर को छोड़ दिया। 

व्यसनों से ज़िन्दगी के खालीपन को भरना

किशोरावस्था और यौवनावस्था के शुरुआती दिनों में, जब मैंने समाज की खराब स्थिति को देखा, तब जीवन के अर्थ के बारे में अपने प्रश्नों से मैं और भी निराश हो गया था। यह वह समय था जब मुझमें खो देने की और अवसाद की भावना विकसित हुई। मुझे लगा कि मैं इन भावनाओं को दबाने के लिए दवाओं का इस्तेमाल कर सकता हूँ और अस्थायी रूप से अपनी बढ़ती हुई जिम्मेदारियों से बच सकता हूँ। यह सब लगभग 20 वर्षों तक चला।
जब मैं बड़ा हुआ, मैं इस भावना को दूर करना चाहता था और मैंने निर्णय लिया कि मैं अन्य लोगों की तरह ही अपने व्यक्तिगत लाभ के बारे में सोचूंगा। तब मैंने खुद को समाज की सोच के अनुरूप ढाल लिया कि पैसा, प्रसिद्धि, और शक्ति ही आपको खुशी दे सकती है। मैंने अपने आप पर और अधिक ध्यान केंद्रित किया, प्रसिद्धि और संभोग में खुद को व्यस्त किया और अपनी आत्म-केंद्रित उमंगों और इच्छाओं में और अधिक लिप्त हो गया।

मैंने इस विचार को विकसित किया कि लड़कियों के बीच अपनी लोकप्रियता बढ़ाने से, लोगों की अपने प्रति अच्छी राय बनाने से और दूसरों की तुलना में अधिक अनुभव और कौशल होने के कारण, मैं जीवन में अधिक लाभ उठा पाऊँगा और जीने का उद्देश्य ढूँढ पाऊँगा। अधिक लाभ और उपलब्धियों को प्राप्त करने के ये सभी विचार, कुछ बड़ा बनने की इच्छा से पैदा हुए थे। हालांकि, मैं सचमुच नहीं समझ पाया कि मैं क्या बनना चाहता था और भौतिक लाभ और व्यर्थ के रिश्तों में मुझे मेरा उद्देश्य नहीं मिल सका। मुझे ये सब नकली और खाली महसूस करा रहे थे इसलिए मैं फिर से इन प्रश्नों में डूब गया कि हम इस धरती पर क्यों हैं और हमारे जीवन का उद्देश्य क्या हैं?

इस अवधि के दौरान, मैंने यह भी सुना कि लोगों को शारीरिक खेलों से आध्यात्मिक जागृति की भावना प्राप्त हो सकती है। इन चीजों को पाने की चाहत में, मैंने अपना काफी कीमती समय अपने काम और परिवार से दूर व्यतीत करना शुरू कर दिया। सर्फ ट्रीप्स पर जाने के लिए मैं सुबह जल्दी उठकर 6, 8 या 12 घंटे की ट्रेनिंग के लिए पहाड़ों में दौड़ने जाता था।

वैंकूवर, बीसी के निकट पदयात्रा पर, मार्क

(Courtesy of Mark Tickner)

मैं अपने काम से पहले, के दौरान और बाद का, अपना सारा समय जिम में बिताने लगा। इस दौरान, मैंने दूसरों की, अपने सहकर्मियों और परिवार के सदस्यों की जरूरतों पर ध्यान देना कम कर दिया। इन गतिविधियों ने मेरा ध्यान कुछ हद तक  उस खालीपन से दूर किया   और मैंने भी ऐसा ही सोचा था। मैं शारीरिक तौर पर पूरा ज़ोर लगा रहा था, जबकि मैं अभी भी उन्माद की स्थिति को पाने के लिए ड्रग्स ले रहा था। मैंने आत्म-अध्ययन और समूहों में ईसाई बाइबल का अध्ययन करने की भी कोशिश की, लेकिन कभी भी पूरी तरह से समझ नहीं आया। अभी भी मेरे मन में बहुत सारे सवाल थे।

कई वर्षों तक अपने शरीर पर ज़ोर डालने और नशीले पदार्थों का दुरुपयोग करने के कारण, मैं न्यूरस्तेनिया (neurasthenia) से पीड़ित हो गया था। मेरे चेहरे की तंत्रिका अक्सर काँपती थी और मेरे लिए ठीक से खाना या पीना भी मुश्किल हो गया था। मैंने दवाइयों की मदद लेनी चाही परन्तु डॉक्टरों ने मुझे बताया कि इस बीमारी को आसानी से ठीक नहीं किया जा सकता है और कुछ को तो यह बीमारी जीवन भर रहती है। यह सुनकर मैं और भी उदास और खोया हुआ महसूस करने लगा था।

जीवन का एक महत्वपूर्ण मोड़

2006 में, मैं अपनी पत्नी से मिला, एक चीनी महिला जिसका नाम शाओशाओ (Xiaoxiao) था, उस रेस्तरां में, जहां वह काम किया करती थी। मैं उसके हंसमुख और नेक-दिल व्यक्तित्व से बहुत आकर्षित हुआ था और आजतक मैं जिनसे भी मिला था, वह उन सबसे बहुत अलग थी। एक साल के भीतर, हमने शादी कर ली थी।

मुझे पता चला कि वह एक पारंपरिक चीनी ध्यान अभ्यास करती थी जिसे फालुन गोंग (Falun Gong) कहा जाता है। उसने मुझे अभ्यास के लाभों और यह कैसे मेरी मदद कर सकता है, के बारे में बताया लेकिन जब मैंने “झुआन फालुन” (“Zhuan Falun”) किताब को पढ़ा, किन्तु अपनी अधीरता और कुछ सांस्कृतिक अंतरों के कारण, मैं शुरूआत के कुछ पन्नों को भी समाप्त नहीं कर सका।

वैंकूवर, बीसी में मार्क अपनी पत्नी शाओशाओ और अपने बच्चों के साथ

(Courtesy of Mark Tickner)

कई सालों बाद, 30 किलोमीटर की दौड़ के बाद थका हुआ महसूस करने के बाद, मुझे यह याद आया कि चीगोंग (qigong) ऊर्जा और प्राणशक्ति को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। मैंने “चीन फालुन गोंग” (“China Falun Gong”) पढ़ना शुरू कर दिया, जो चीगोंग अभ्यास और ऊर्जा वृद्धि के बारे में बुनियादी जानकारी देता है। मैंने जल्दी ही उसे पढ़ना शुरू किया और मुझे वह काफी दिलचस्प लगी। मैंने उस पुस्तक को चार दिनों में समाप्त कर दिया। फिर मेरी पत्नी के कहने पर, मैंने “झुआन फालुन” को फिर से पढ़ने की कोशिश की।

मेरे लिए आश्चर्य की बात यह है कि इस बार जब मैंने उस पुस्तक को पढ़ा, तो मैंने कुछ हद तक सिद्धांतों को समझना शुरू कर दिया और मुझे एहसास हुआ कि यह एक उच्च स्तर का अभ्यास था। इसने मुझे इस तथ्य को समझने में मदद की, कि पूरे जीवन मैं अपने अंदर की खोज और अपनी आंतरिक संतुष्टि और मन की स्थिति को सुधारने के लिए काम करने के बजाय, मैं बाहरी चीजों में उसकी तलाश कर रहा था।

यह बहुत ही आज़ाद सोच थी—ख़ुशी और पूर्ति मेरे नियंत्रण में थी और बाहरी कारकों पर निर्भर नहीं थी। मैंने अपनी व्यर्थ की गतिविधियों को छोड़ दिया और अपने आत्म सुधार या “संवर्धन” पर ध्यान केंद्रित करने का निर्णय लिया। एक उथले जीवन से गहरी समझ की ओर यह मेरी अदभुत  छलांग थी—जैसे कि मेरी अंतर आत्मा अचानक से जाग उठी हो ।

एक मौलिक परिवर्तन

फालुन गोंग (Falun Gong) के सच्चाई, करुणा, सहिष्णुता और सौम्य चीगोंग के ध्यान और अभ्यास के सिद्धांतों के अनुसार आतंरिक सुधार की शुरूआत करने के दो-तीन महीने बाद—मेरे चरित्र में सुधार आया, मेरी न्यूरस्टेनिया कम हुई और मुझे शारीरिक रूप से बेहतर महसूस हुआ। छह महीने बाद, मेरी सारी समस्याएं चली गईं। यह काफी चौंकाने वाला था, यहां तक ​​कि मेरे कुछ दोस्तों के लिए भी।

एक बार जब मैंने अपने काम और जीवन में सत्य-करुणा-सहनशीलता के सिद्धांतों को लागू किया, तो मेरा दृष्टिकोण पूरी तरह से बदल गया और मैं खुद के बजाय दूसरों के बारे में सोचने लगा। जब कुछ बहुत कठिनाई होती थी तब मैं सोचता था कि इसे दूसरों के लिए कैसे आसान बनाया जा सकता है और तब से मैंने संघर्ष से दूर भागना छोड़ दिया ।

उदाहरण के लिए, एक दिन काम पर, एक अपराधी बहुत परेशान हो गया और उसने अपनी ज़िन्दगी खत्म करने से पहले कुछ अधिकारियों को मारने की धमकी दी। उस दिन ड्यूटी पर तैनात अधिकारी काफी परेशान लग रहे थे, नहीं जानते थे कि क्या करना है। मैंने अपने दिल में बस ईमानदारी, करुणा और सहिष्णुता रखते हुए उस व्यक्ति से संपर्क किया। मेरी बातें उसके दिल को छू गईं और जल्दी ही वह शांत हो गया। किसी को चोट नहीं पहुंची और संघर्ष का समाधान भी हो गया।

मेरे सहयोगियों ने मुझमें बड़ा बदलाव देखा और मेरी सकारात्मक ऊर्जा और रवैये पर टिप्पणी भी की। मैं सभी के साथ समान रूप से और समान सिद्धांतों के साथ पेश आता —अपराधियों, सहयोगियों, पर्यवेक्षकों, नर्सों—सभी के साथ। जिस तरह से मैं करुणा के साथ उस व्यक्ति के पास गया और लड़ाई को रोका, उन्होंने यह भी देखा कि कैसे हर किसी को इससे फायदा हुआ था।

एक बार, एक नया पुलिस अधिकारी मेरे विभाग में नियुक्त हुआ। विभाग के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों में नए नियुक्तों को अलग करने और परेशान करने की प्रवृत्ति भी थी। उदाहरण के लिए, एक शिफ्ट के दौरान, कुछ अफसरों ने नए अधिकारी को किसी काम के लिए दोषी ठहराया, जबकि वहां उसकी कोई गलती नहीं थी। मैंने आगे बढ़कर कहा: “हमें इस तरह के काम नहीं करने चाहिए। एक समय हम सभी भी नए थे। हमें अधिक सहानुभूति और विचारशील होने की आवश्यकता है।” जल्द ही, समूह ने नए अधिकारी को समर्थन दिया और मेरी बात को स्वीकार किया।

एक अन्य अवसर पर, मेरे पर्यवेक्षक ने मुझे आपातकाल से निपटने के लिए कहा था। एक साथी पुलिस अधिकारी को ईर्ष्या महसूस हुई और मैंने सुना कि उसने मेरी कार के टायर को काट दिया था। मैंने उससे पूछा कि क्या उन्होंने ऐसा किया और उन्होंने न तो इनकार किया न माफ़ी मांगी, लेकिन रक्षात्मक रूप से कहा, “क्या तुम मुझसे लड़ना चाहते हो?” यदि अतीत में ऐसा कुछ हुआ होता, तो मैं कभी भी उसे ऐसे ही जाने नहीं दे पाता और तुरंत उसे लड़ लिया होता। लेकिन मेरे मन में यह विचार आया कि एक अभ्यासी के रूप में, मुझे सहिष्णु होना चाहिए और लोगों के साथ कभी भी हिंसक नहीं होना चाहिए। इसलिए मैं सिर्फ हँसा और उसे जाने दिया।

कई सहयोगियों ने मेरे लिए बात की और संगठित होकर नए टायर के लिए दान का आयोजन भी किया। लेकिन मैंने मना कर दिया और अगली बार उस अधिकारी से ऐसे मिला जैसे हमारे बीच कुछ भी नहीं हुआ है। मेरी सहिष्णुता की वजह से, उसने अपनी गलतियों को देखा और महसूस किया कि वह गलत था और माफी भी मांगी। धीरे-धीरे, कार्यस्थल का वातावरण और बेहतर हो गया।

मेरे माता-पिता ने भी मेरे अंदर के बदलावों को देखा। अतीत में, मैं हमेशा उनके साथ स्वार्थपूर्ण व्यवहार करता था। हालांकि, इससे उन्हें दुःख होता था, मैं अक्सर उनके सामने बदतमीज़ी से बात करता था और हमेशा बदमिजाज़ और चिड़चिड़ा रहता था। मैंने सबसे पहले उनके बारे में सोचना शुरू किया और अपने व्यवहार को ठीक किया। एक बार, जब एक रिश्तेदार का निधन हुआ था, तो मेरे विस्तारित परिवार के सदस्य विरासत के लाभों के बारे में बात कर रहे थे, जबकि मेरा जवाब सिर्फ यह पूछने के लिए था कि क्या मैं कुछ भी मदद कर सकता हूँ। मेरे माता-पिता ने मेरे परिप्रेक्ष्य में सकारात्मक बदलाव देखे और उन्होंने मुझसे उन्हें फालुन गोंग अभ्यास सिखाने के लिए कहा।

अपनी पत्नी और बच्चों के साथ मार्क

(Courtesy of Mark Tickner)

मेरे परिवार और बच्चों के संदर्भ में, मुझे लगता था कि मेरी सबसे बड़ी चुनौती मेरे काम और परिवार के बीच संतुलन बनाए रखने की थी। मेरे पिछले परिप्रेक्ष्य से देखें, तो कठिन नौकरी करने के बाद मुझे एक तनाव मुक्त और आरामदायक घर की उम्मीद थी। हालांकि, परिवार में बढ़ते हुए बच्चों की ज़िम्मेदारी और पारिवारिक जीवन के संघर्षों से मुझे घर में भी अधिक चुनौती महसूस हो रही थी । फालुन गोंग का अभ्यास करने के बाद, मुझे एहसास हुआ कि काम और घर दोनों ही मेरे आतंरिक सुधार के लिए बहुत अच्छे हैं। एक बार जब मैंने घर पर सत्य, करुणा और सहिष्णुता के सिद्धांतों को लागू करना शुरू कर दिया, तो मैं काम और पारिवारिक जीवन को अच्छी तरह से संतुलित करने में भी सक्षम हो गया। मेरे बच्चे भी मेरे पदचिन्हों पर चलते हैं और यह देखने में मेरी मदद करते हैं कि मुझे सुधार करने की आवश्यकता कहाँ है।

मैं अंततः अपने जीवन के प्रश्नों के उत्तर प्राप्त करने में सक्षम हूँ और अब जीवन में पहली बार, मुझे अंदर से शांति और संतोष महसूस होता है।

मार्क तक सवाल या टिप्पणियाँ पहुँचाने के लिए संपर्क करें: [email protected]

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