25 वर्षों तक फैले कैरियर के साथ, यह शिक्षा अधिकारी एक उच्च विद्यालय के शिक्षक से लेकर एक व्याख्याता रह चुके हैं, और अब वह भारत के सरकारी स्कूल में हेडमास्टर के रूप में काम कर रहे हैं। अपने जीवन की पुस्तक के माध्यम से यात्रा करते हुए, उन्होंने विभिन्न अध्यायों को पढ़ा है, परन्तु जिस पाठ ने उन्हें सबसे ज्यादा प्रभावित किया, वह फालुन दाफा का है—एक प्राचीन आध्यात्मिक प्रणाली जो सच्चाई, करुणा और सहनशीलता के मूल्यों पर आधारित है।

प्रदीप कुमार सी. एन. से मिलिए, जो दक्षिण भारतीय राज्य कर्नाटक के कूर्ग जिले से हैं। वे कड़ी मेहनत करने वाले माता-पिता के परिवार में जन्में, जिनके पिता एक दर्जी थे और माता बिना किसी शर्त के हर तरह से समर्थन करती थीं। उन्होंने स्वाभाविक रूप से हर एक बात में अपना सर्वश्रेष्ठ देने के मूल मानव मूल्य को अपनाया। एनटीडी इंडिया (NTD India) के साथ एक साक्षात्कार में, उन्होंने दिल खोलकर अपने जीवन के बारे में विस्तार से बताया।

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प्रदीप ने कहा, “मेरे विनम्र माता-पिता को देखकर, जो इतनी मेहनत करते थे, मैं हमेशा प्रेरित महसूस करता था। मैंने  हमेशा इस विचार को दिल से माना कि मुझे समाज के लिए कुछ अच्छा करना चाहिए और मेरे माता-पिता को गर्वित महसूस कराना चाहिए।”

वर्ष 1992 में अपने मास्टर्स ऑफ साइंस को पूरा करने के बाद, उन्हें शिक्षा के क्षेत्र में काम करने का अवसर मिला। एक शिक्षा अधिकारी के रूप में, प्रदीप को विभिन्न विषयों पर विभिन्न तालुकों से शिक्षकों को प्रशिक्षित करने का मौका मिला, और उनका मुख्य कार्य, कर्तव्यों का पालन करते समय नैतिक मूल्य प्रणाली की भावना पैदा करना था।

“इस बिंदु पर, मैं बहुत उलझन में था,” उन्होंने कहा। “विभाग हमें विद्यार्थियों को नैतिक शिक्षा प्रदान करने के लिए निर्देश देता है, लेकिन मैं वास्तव में यह समझ नहीं पाता था कि कैसे कुछ घंटे के शिक्षण सत्र किसी के व्यवहार में वास्तविक बदलाव ला सकते हैं। मैं हमेशा इस बात पर विचार करता था कि जीवन का सही अर्थ क्या था और हमारे समाज की नैतिकता किस दिशा में जा रही थी।”

Image courtesy of Pradeep Kumar C.N.

लेकिन सितंबर 2005 में उन्हें ऐसा लगा जैसे उनकी उलझन का हल मिल गया था। प्रदीप को दक्षिणी भारत के एक शहर, श्रीनिवासपुर, बायरावेश्वरा स्कूल में विभिन्न तालुकों के 55 शिक्षकों के लिए एक शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम का नेतृत्व करने के लिए कहा गया था। प्रशिक्षण मुख्य रूप से शिक्षा में नैतिक मूल्यों और आध्यात्मिकता को लागू करने पर केंद्रित था।

प्रदीप ने कहा: “उस विद्यालय के प्राचार्य ने मुझे फालुन दाफा नामक एक ध्यान अभ्यास से परिचित कराया और साझा किया कि उनके छात्रों को कैसे इससे लाभ हुआ है। उन्होंने यह भी साझा किया कि कैसे बच्चे अपने पाठ्यक्रम पर और अधिक ध्यान केंद्रित कर पा रहे थे। उनकी बातचीत ने मुझे बहुत प्रभावित किया, और मुझे लगा कि इस ध्यान के बारे में कुछ विशेष बात है। इसलिए, मैंने प्रिंसिपल से आग्रह किया कि वे हमारे शिक्षकों को फालुन दाफा से परिचित कराए जो प्रशिक्षण से गुजर रहे थे।”

“मैंने भी शिक्षकों के साथ पांच अभ्यासों को सीखा, और उनकी सरल मुद्राओं ने वास्तव में मेरे दिल को छुआ। मैं हमेशा अपने दिमाग और विचारों को विकसित करने के लिए कुछ अच्छी चीजों की तलाश में रहता था, और इस अभ्यास से मुझे महसूस हुआ कि आखिरकार मुझे वह उपहार मिल गया था।”

Credit: Minghui.org
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फालुन दाफा की सरल लेकिन गहरी नैतिक शिक्षाओं से प्रेरित होने पर, प्रदीप अपने परिवार के साथ अपनी नई खुशी को साझा करने के लिए इंतजार नहीं कर सके। एक प्रेमपूर्ण पति और पिता के रूप में, उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि उनके परिवार ने फालुन दाफा के सभी पांच अभ्यासों को अच्छी तरह से सीखा। आखिरकार, अभ्यास के बाद उनकी पत्नी, मां और बेटी ने मन की शांति का अनुभव किया, और यह हुआ कि उनके पूरे परिवार ने इस प्राचीन आध्यात्मिक प्रणाली का अभ्यास करना शुरू कर दिया।

न केवल प्रदीप ने महसूस किया कि वह आखिरकार जिस मार्ग की तलाश कर रहे थे वह उन्हें मिल गया था, बल्कि उन्होंने अपने रोज़मर्रा के जीवन में भी बहुत लाभ उठाया। “एक प्रमुख के रूप में, मुझे आमतौर पर बहुत से मानसिक दबाव का सामना करना पड़ता है, लेकिन अभ्यास ने मुझे सचमुच शांत किया है। फालुन दाफा के अभ्यास नियमित रूप से करने से, मैं सक्रिय महसूस करता हूं और पूरे दिन 24 घंटे ऊर्जावान रहता हूं,” उन्होंने कहा।

प्रदीप फालुन दाफा का दूसरा व्यायाम करते हुए. (Credit: Veeresh/NTD India)

प्रदीप ने कहा कि इस ध्यान अभ्यास के लाभ केवल शारीरिक स्तर पर ही नहीं रुक जाते हैं।

उन्होंने कहा: “जैसे ही मैंने फालुन दाफा की मुख्य पुस्तक “ज़ुआन फालुन” किताब पढ़ी, मुझे आश्चर्य हुआ क्योंकि यह बहुत ही सरल तरीके से अपने जीवन के बहुत सारे सवालों का उत्तर देती है। मुझे मेरे भय का सामना करने के लिए एक आंतरिक शक्ति भी मिल गई। फालुन दाफा के मुख्य सिद्धांत, जैसे कि सत्य, करुणा और सहनशीलता ने मेरे दिल को छुआ। अब, मुझे लगता है कि मुझे अपने सभी कर्तव्यों को पूरा करने के लिए असीम आंतरिक शक्ति मिली है—यह वही शुद्ध नैतिक साहस है जो मैं अपने परिवार और अपने सभी छात्रों और कर्मचारियों के लिए खोज रहा था।”

हालांकि, प्रदीप ने बताया कि चीन में इस शांतिपूर्ण आध्यात्मिक प्रणाली को दबाया जा रहा है। उन्होंने कहा: “चीनी कम्युनिस्ट सरकार मौलिक नास्तिक है और इसमें नैतिक दायित्व नहीं है। जुलाई 20,1999 को, कम्युनिस्ट पार्टी ने फालुन दाफा के खिलाफ अवैध राष्ट्रव्यापी उत्पीड़न की शुरुआत की। तब से अनगिनत निर्दोष अभ्यासिओं को गिरफ्तार कर लिया गया और उन्हें मार दिया गया।”

“जब मैंने पहली बार इस ज़ुल्म के बारे में सुना तो मैं पूरी तरह से चौंक गया था। मुझे विश्वास नहीं हो रहा था कि एक अच्छा अभ्यास, जो हर किसी को सच्चाई, करुणा और सहनशीलता के मूल्यों को सिखाता है, उसे चीनी कम्युनिस्ट शासन के हाथों गंभीर उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है। यह बिलकुल मेरी सोच से बाहर था कि ऐसे निर्दोष लोगों को इतनी यातनाओं का सामना करना पड़ा था। मुझे भी महसूस हुआ कि मुझे फालुन दाफा की सुंदरता के बारे में और लोगों को बताने और उन्हें इस अद्भुत ध्यान को जानने का मौका देने की आवश्यकता है। इस प्रकार, मैंने पड़ोसी शहरों के आसपास विभिन्न स्कूलों का दौरा करने और अभ्यास की अच्छाई को फैलाने का फैसला किया,” उन्होंने कहा।

प्रदीप फालुन दाफा का पांचवा व्यायाम करते हुए (Credit: Veeresh/NTD India)

प्रत्येक नया दिन, जो जीवन की पुस्तक में एक और अध्याय के रूप में शुरू होता है, प्रदीप पूरे दिन-प्रतिदिन की परिस्थितियों को, अपने भीतर थामे हुए अत्यंत करुणा के साथ हल करने की कोशिश करते हैं।

“अब तक मेरी आध्यात्मिक यात्रा से मुझे सबसे अच्छा उपहार यह मिला है कि मेरे विचारों का शुद्धिकरण हुआ है और हर समस्या को—मुझे एक ईमानदार और महान व्यक्ति की तरह कैसे निपटना चाहिए। यह मेरी जिंदगी का सबसे बड़ा उपहार है जिसे मैं हमेशा संजोकर रखूंगा और अपने सभी छात्रों के साथ साझा करना जारी रखूंगा,” इस विनम्र शिक्षा अधिकारी ने कहा, जिनकी मुस्कराहट से एक जादूई शांति विकीर्ण हो रही थी।


फालुन दाफा (फालुन गोंग के नाम से भी जाना जाता है) सत्य, करुणा और सहनशीलता के सार्वभौम सिद्धांतों पर आधारित एक आत्म-सुधार ध्यान प्रणाली है, जो स्वास्थ्य और नैतिक चरित्र को सुधारने और आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त करने के तरीके सिखाती है।

यह चीन में 1992 में श्री ली होंगज़ी द्वारा जनता के लिए सार्वजनिक किया गया था। वर्तमान में 114 देशों में 100 मिलियन से अधिक लोगों द्वारा इसका अभ्यास किया जा रहा है। लेकिन 1999 के बाद से इस शांतिपूर्ण ध्यान प्रणाली को क्रूरता से चीन में उत्पीड़ित किया जा रहा है।

अधिक जानकारी के लिए, कृपया देखें:  falundafa.org and faluninfo.org. सभी पुस्तकें, व्यायाम संगीत, संसाधन और निर्देश पूरी तरह से निःशुल्क, कई भाषाओँ में (हिन्दी में भी) उपलब्ध हैं।

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