बचपन से, मैं एक गंभीर बीमारी से जूझ रहा था। दवा मदद नहीं कर रही थी और मैं अक्सर निराश रहता था। यह मेरी कहानी है कि कैसे मुझे कुछ बहुत ही खास मिला जिसने मेरी सभी बाधाओं पर विजय पाने और एक आशाओं से भरा और सेहतमंद खुशहाल जीवन जीने में मदद की।

मेरे स्कूल के दिन

जब मैं 10वीं कक्षा में था, एक उत्सुक छात्र जिसके सामने दुनिया भर की सभावनाएं थी, मेरा एक निदान किया गया जिसने मेरे और मेरे परिवार को कई वर्षों तक की पीड़ा की सज़ा सुना दी। मुझे तीव्र हेपेटाइटिस बी होने का निदान किया गया। मेरा पेट सूज गया था और मेरी आंखें और शरीर बहुत पीले पड़ गए थे।

मेरी बीमारी इस हद तक बढ़ गई कि मैं अक्सर पूरे एक सप्ताह तक खाना नहीं खा सकता था। मैं दर्द और भूख से रोता, जबकि मेरी माँ अपने खुद के आंसू रोकते हुए मुझे समझाती। मैंने अपनी माँ के दुःख को महसूस किया और मुझे उनपर बोझ बनना बिलकुल अच्छा नहीं लगा, लेकिन वे ही एक अकेली व्यक्ति थीं जो मुझे मेरे ऐसे दर्द में सांत्वना देने में सक्षम थीं।

“मैंने कभी नहीं सोचा था कि मेरा एक खुश परिवार होगा और इस तरह का प्यारा बेटा होगा।”

मेरी बीमारी की संक्रामक प्रकृति से मेरे साथी छात्र घबराते थे, और, भले ही उन्होंने मुझसे अच्छा व्यवहार किया, फिर भी मैंने हमेशा एक सामाजिक चिंता का सामना किया जो प्रभावी ढंग से संवाद करने की मेरी क्षमता में बाधा डालता था।

सात साल के इलाज के बाद भी, मेरी बीमारी में सुधार नहीं हुआ। मैं अभी भी अपने दर्द और सूजन के अधीन था जो मेरे दैनिक जीवन की विशेषता बन गया था।

रोग के साथ संघर्ष

अगला बड़ा झटका तब लगा जब मैं अपनी जांच करवाने के लिए गया और यकृत की सिरोसिस (cirrhosis) का निदान किया गया। मेरे घुटनें कमजोर पड़ गए और मेरा दिल ज़ोरों से धड़कने लगा। निश्चित रूप से मुझे मौत की सजा सुनाई गई थी।

“मुझे महंगी एंटीवायरल दवाओं पर रखा गया था जो अनिवार्य रूप से एक जहर था, जो भले ही सिरोसिस को बढ़ने से रोक रहा था पर मेरे शरीर को नष्ट कर रहा था।”

डॉक्टर ने कहा कि कैंसर इसका संभावित परिणाम हो सकता था और मैं केवल उसकी प्रगति को धीमा करने का प्रयास कर सकता था।

मुझे महंगे एंटीवायरल दवाओं पर रखा गया था जो अनिवार्य रूप से एक जहर था, जो मेरे शरीर को नष्ट कर रहा था, भले ही यह सिरोसिस के बढ़ने की गति को धीमा कर रहा था।

मैंने अपने माता-पिता को अपने रोग के निदान के बारे में नहीं बताया, क्योंकि मैं अब उनपर और बोझ नहीं बनना चाहता था। घर पहुंचकर मैंने अपने शयनकक्ष के दरवाजे को बंद कर दिया और अकेले रोया, मेरे भाग्य के लिए उपरवाले को दोषी ठहराते हुए।

मेरा एक साल से अधिक समय तक बाह्य रोगी के रूप में इलाज हुआ लेकिन मुझे पता था कि सिरोसिस और बुरी तरह बढ़ रहा था। मेरे लिए रोशनी की एक किरण यह थी कि मेरी प्रेमिका मेरी निराशाजनक स्थिति के बावजूद मुझसे शादी करने के लिए तैयार हो गई। मेरी माँ को अंततः मेरे निदान के बारे में पता चला और वह हर रात रोती रहती थीं। हम एक परिवार के रूप में केवल एक चमत्कार की ही उम्मीद कर सकते थे।

ईमानदारी और श्रद्धा ने आशा की ओर नेतृत्व किया

मेरी माँ ने मेरे लिए इलाज पाने की आशा से हर दिन प्रार्थना की। एक दिन उनके दोस्त ने उन्हें चीन के एक पारंपरिक फालुन दाफा नामक  अभ्यास के बारे में बताया। उन्होने समझाया कि कई फालुन दाफा अनुयायियों ने चमत्कारी उपचार का अनुभव किया था और यह एक कोशिश करने के लायक हो सकता है।

“मैंने अपनी माँ को अपने शरीर में होते सभी अजीब एहसासों के बारे में बताया और उन्होने खुशी से कहा, ‘ये अच्छे संकेत हैं। आपको ज़ुआन फालुन पढ़ना शुरू कर देना चाहिए।'”

मेरी माँ ने उन्हें फालुन दाफा की मुख्य शिक्षाओं की पुस्तक ज़ुआन फालुन, और एक वीडियो जिनमें चिगोंग अभ्यास के पांच सेट का प्रदर्शन किया गया है जो अभ्यास का हिस्सा हैं, खरीदने कहा। मेरी माँ ने अभ्यास शुरू कर दिया और मेरे पिता भी जल्द ही शामिल हो गए। बात फैल गयी, और एक महीने के भीतर 20 लोग हमारे घर में एक साथ अभ्यास करने आने लगे।

मेरे माता-पिता और अन्य सभी फालुन दाफा अभ्यासिओं ने अपने स्वास्थ्य में सकारात्मक परिवर्तन का अनुभव किया। मेरी माँ ने मुझे कॉल किया और उत्साहित होकर कहा, “फालुन दाफा बहुत अच्छा है! मुझे मौसम के किसी भी बदलाव के साथ खांसी होती थी, और आपके पिता को गुर्दे में पत्थरों, अस्थमा, और दिल की समस्याएं थीं, और अब वे सब चली गयी हैं। आपको फालुन दाफा का अभ्यास करना चाहिए और पुस्तक को पढ़ना चाहिए—इससे आपकी बीमारी ठीक होने की आशा की जा सकती है।”

मुझे यह सुनकर खुशी हुई कि मेरे माता-पिता का स्वस्थ्य बहुत अच्छा हो रहा था। मैं उस समय घर से दूर काम करता था और मैंने वादा किया कि जब मैं नए साल के लिए घर आऊँगा तो मैं यह अभ्यास सीखूंगा।

एक चमत्कार प्रकट होता है

जैसे ही मैं अपने गृहनगर लौटा, मेरी माँ ने मुझे फालुन दाफा के पाँच अभ्यास सिखाए। तीन सत्रों के बाद मैं आराम करने के लिए एक कुर्सी पर बैठ गया और मुझे ऐसा लगा जैसे मेरा शरीर जल रहा था। मैंने अस्वस्थ और असहज महसूस किया और मुझे चक्कर आ गए। ऐसा लगा जैसे मेरे शरीर को अंदर से साफ किया जा रहा था। मैं सोना चाहता था लेकिन मैं सो नहीं पा रहा था।

नींद की कमी के बावजूद मुझे अगली सुबह थकान नहीं लग रही थी। मैंने अपनी माँ को मेरे शरीर में होते हुए सभी अजीब अनुभवों के बारे में बताया  और उन्होंने खुश होते हुए कहा, “ये अच्छे संकेत हैं। आपको ज़ुआन फालुन  पढ़ना शुरू करना चाहिए।”

लेखक फालुन दाफा का ध्यान अभ्यास करते हुए।

मैंने उनकी सलाह मानी, और ऐसा लगा जैसे पुस्तक का प्रत्येक शब्द मेरी आंखों के सामने चमक रहा था। मैं अपने गहरे और गहन प्रश्नों के जवाबों को समझने में सक्षम था जिनको मैंने युवावस्था से सोचा था, जैसे कि “क्या देवता और बुद्ध का अस्तित्त्व होता है? क्या हमारी आत्मा होती है? हम क्यों पीड़ित होते हैं? मृत्यु के बाद हम कहाँ जाते हैं?”

विज्ञान जो बताने में असफल रहा वैसे मेरे प्रश्नों के उत्तर अब स्पष्ट कर दिए गए थे। मुझे एहसास हुआ कि जीवन की गहराई को समझने की एक व्यक्ति की क्षमता सीधे किसी के चरित्र की साधना से संबंधित है। क्योंकि फालुन दाफा अभ्यासी सत्य, करुणा और सहनशीलता के सिद्धांतों के अनुसार स्वयं लगातार साधना करते हैं, इसलिए वे आज के समाज के घटते नैतिक मानकों के बावजूद अपने गुण को संरक्षित रख सकते हैं और अपने नैतिक चरित्र में सुधार करने में सक्षम हैं।

अब मैं समझता हूं कि फालुन दाफा के साथ साधना वास्तव में सर्वोच्च स्वास्थ्य प्राप्त करवाने में सक्षम हो सकती है। दर्द और दुःख के इतने वर्षों के बाद मेरे लक्षण गायब हो गए। मैं अचानक एक पूर्ण भोजन, बिना मेरे पेट के सूजे, खाने में सक्षम था। यह वास्तव में मेरे लिए अदभुत था।

स्वास्थ्य और सद्भाव की प्राप्ति

फालुन दाफा अभ्यासी होना हमेशा आसान नहीं होता है और स्वयं को अनुशासित रखने और लगातार सुधार करने की आवश्यकता होती है। मैंने अपने युवावस्था में एक बहुत ही क्रांतिकारी दृष्टिकोण विकसित किया था और जब मुझे घर का काम करना पड़ता तो मैं नाराज हो जाता था। मैं यह सोचता था कि एक पुरुष के रूप में बिलों का भुगतान करना मेरा काम है, घर के और काम करना नहीं।

ज़ुआन फालुन को बार-बार पढ़कर और शिक्षाओं को वास्तव में समझते हुए, मैं धीरे-धीरे सत्य, करुणा और सहनशीलता के सिद्धांतों का पालन करने में सक्षम रहा और मैं अपने आप को अपनी पत्नी की जगह रखकर सोचने में सक्षम रहा। मुझे समझ में आया कि वह भी मेरी तरह थक जाती थीं और मुझे उनके बारे में पहले सोचना चाहिए।

अब मैं अपनी पत्नी की मदद ख़ुशी से करता हूं और अब मुझे कोई नाराज़गी नहीं है। जब मेरी पत्नी गर्भवती हुई तो मैंने उन्हें उनका काम जल्द ही छोड़ देने के लिए प्रोत्साहित किया। मैं खरीदारी भी करता और भोजन भी बनाता। इस तरह, हमारा विवाहित जीवन खुश और सामंजस्यपूर्ण है।

एक दूसरे मौके के लिए आभारी

पांच महीनों तक फालुन दाफा का अभ्यास करने के बाद मैं अपने नियमित जांच के लिए गया और परिणाम चमत्कारी था। मेरी बीमारी टाइप 3 से टाइप 1 हो गई थी। मुझे जीवन जीने का एक नया मौका मिला था।

अब फालुन दाफा का अभ्यास करते हुए मुझे तीन साल हो चुके हैं। इस दौरान मैं एक तेज़ी से नष्ट करनेवाले रोग से पीड़ित बहुत ही बीमार व्यक्ति होने से अब एक उज्ज्वल भविष्य के साथ एक स्वस्थ युवा व्यक्ति होते चला आया हूं। मुझे अब कोई दवा लेने की आवश्यकता नहीं है। अभ्यास के पांच सेटों और शिक्षाओं का पालन करके, मेरा मन और शरीर स्वस्थ हो गया है और मेरा जीवन सामंजस्यपूर्ण हो गया है।

जब मैं बिना किसी आशा के मौत की कगार पर खड़ा था, तो फालुन दाफा ने मुझे एक नया जीवन दिया। मैं हमेशा आभारी रहूँगा।


संपादक का संदेश:

फालुन दाफा (फालुन गोंग के नाम से भी जाना जाता है) सत्य, करुणा और सहनशीलता के सार्वभौम सिद्धांतों पर आधारित एक आत्म-सुधार की ध्यान प्रणाली है, जो स्वास्थ्य और नैतिक चरित्र को सुधारने और आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त करने के तरीके सिखाती है।

यह चीन में 1992 में श्री ली होंगज़ी द्वारा जनता के लिए सार्वजनिक किया गया था। वर्तमान में 114 देशों में 100 मिलियन से अधिक लोगों द्वारा इसका अभ्यास किया जा रहा है। लेकिन 1999 के बाद से इस शांतिपूर्ण ध्यान प्रणाली को क्रूरता से चीन में उत्पीड़ित किया जा रहा है।

अधिक जानकारी के लिए, कृपया देखें:  falundafa.org and faluninfo.org. सभी पुस्तकें, अभ्यास संगीत, अन्य सामग्री और निर्देश पूरी तरह से निःशुल्क, कई भाषाओँ में (हिन्दी में भी) उपलब्ध हैं।

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