हमारे जीवन में एक ऐसा समय आता है जब हम “जीवन का सही अर्थ” और हमारे अस्तित्व के उद्देश्य का अनावरण करने की इच्छा रखते हैं—जबकि हम में से कुछ भाग्यशाली होते है जो सही उत्तर प्राप्त कर लेते हैं, दूसरों को “आंतरिक संघर्ष” का सामना करना पड़ता है।

दक्षिणी भारत में केरल से भवानी ओड़त की कहानी एक ऐसा उदाहरण है, जहां उनके जीवन में बेहतर बदलाव आया, जब उन्होंने Falun Dafa को अपनाया, जो सत्य-करुणा-सहनशीलता के सिद्धांतों पर आधारित एक प्राचीन आत्म सुधार की प्रणाली है।

Credit:Bhavani Odatt

भवानी ने अपने पुत्र नवीन से 2000 में फालुन दाफा के बारे में सीखा जब वह आबू धाबी में थी। एक दिन जब वे नेट पर सर्फिंग कर रहे थे तब नवीन का ध्यान फालुन दाफा की वेबसाइट पर गया। उन्होने इसे बहुत अच्छा पाया और पुस्तकों को पढ़ना शुरू कर दिया और व्यायाम भी सीख लिया। जब नवीन ने अपनी मां से कहा कि यह अभ्यास शरीर को मजबूत करने और मन को शुद्ध करने में मदद करता है, तब वह बहुत व्यस्त थी और उन्हें उनपर विश्वास नहीं हुआ था।

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2010 में, भवानी भारत लौट आइ और उन्हें कई पारिवारिक और वित्तीय कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। वह अपने पति से अलग हो गई थी और टूट चुकी थी।

भवानी ने कहा: “इस ध्यान को शुरू करने से पहले, मैं एक भावुक व्यक्ति थी और बहुत जल्द दुःखी हो जाती थी। हम आबू धाबी में 21 साल रहे और हमारा परिवार बहुत अच्छी तरह से स्थिर और बसा हुआ था, लेकिन कुछ गलतफहमी हुई और मैं और मेरे पति अलग हो गए। हम फिर भारत लौट आए।

“मैं अपने छोटे बेटे के लिए बहुत चिंतित थी जिसे मुझे छोड़ कर आना पड़ा, जो उस समय केवल 10 वर्ष का था। मैं हर रोज अपने बेटे के बारे में सोच कर रोती रहती थी।”

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इस मन को व्याकुल करने वाले भावनात्मक संघर्ष का सामना करने के बाद, भवानी ने वास्तव में 2012 में फालुन दाफा की आध्यात्मिक यात्रा को अपनाने का  गंभीरता से निर्णय लिया। लेकिन आश्चर्य की बात है कि उन्हें साथ साथ कई शारीरिक और मानसिक लाभों का अनुभव भी होना शुरू हो गया।

“जैस जैसे मैंने अपने रोजमर्रा के जीवन में अधिक सहिष्णुता का अभ्यास किया, मुझे एहसास हुआ कि दुःखी होने से यह स्थिति बदली नहीं जा सकती, क्योंकि हर किसी की अपनी नियति होती है,” उन्होने कहा। “यहां तक कि यदि मैं पूरी ज़िंदगी चिंता करती रहूं तो भी इसका कोई फायदा नहीं होगा। मैं जो कर सकती हूं वह है माफ कर पाना और आंतरिक शांति प्राप्त करना।”

“यह महसूस करते ही मैंने फालुन दाफा के तीन स्वर्णिम सिद्धांतों के साथ जीना शुरू किया—सच्चाई, करुणा और सहनशीलता,” उन्होने कहा।

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“मुझे यकीन है कि जल्द ही सब कुछ ठीक हो जाएगा, भले ही अब यह मुश्किल लगता है। लेकिन जब हम एक अच्छे रास्ते पर चल पड़ते हैं तो सब कुछ अंत में अच्छा होना ही होता है। “

वह अब एक शांत मन के साथ कठिन परिस्थितियों को संभालने में सक्षम है और पहले से कई अधिक आत्मविश्वास और साहसी महसूस करती है। अधिक विशेष रूप से, वह रक्तचाप की समस्या से पीड़ित थी और कई सालों से दवाइयाँ ले रही थी, लेकिन जबसे उन्होंने फालुन दाफा का अभ्यास करना शुरू किया तबसे उन सभी दवाइयों को खाना छोड़ दिया। उनकी पहले ही तीन सर्जरी हो चुकी थी लेकिन अब उन्होंने अपनी सभी बीमारियों से छुटकारा पा लिया है और वह अच्छे स्वास्थ्य का आनंद ले रही है।

अब,  59 की उम्र में, वह दावा करती है कि पूरे दिन काम करने के बाद भी उन्हें थकान महसूस नहीं होती और वह ऊर्जावान महसूस करती है भले ही वह एक पल के लिए भी न सोये।

वह कहती है कि फालुन दाफा एक उत्कृष्ट साधना अभ्यास है—एक ऐसा अभ्यास जो आपको एक स्वस्थ शरीर और शांत मन प्राप्त करने में सक्षम बनाता है। फालुन दाफा की मुख्य पुस्तक ज़ुआन फालुन, जिसमें गहरी शिक्षा है जिससे ब्रह्मांड के सच्चे अर्थ, वास्तविक जीवन के अर्थ, कैसे दूसरों के साथ सद्भाव से रहना, विभिन्न दिन-प्रतिदिन घटनाओं के कारण और प्रभाव के संबंध, इत्यादि के बारे में उन्हें पता चला है। वह दावा करती है कि लगातार अभ्यास के माध्यम से एक व्यक्ति के दिमाग, विचार, चरित्र और क्रियाएं पवित्र बन जाते हैं।

भवानी अब ज़ुआन फालुन किताब का अनुवाद मलयालम, केरल की आधिकारिक भाषा, में करने पर काम कर रहीं  हैं।

“यह अभ्यास मुझे सचमुच एक आशीर्वाद की तरह मिला है। अब मैं समाज को इस अद्भुत अभ्यास को पेश करने का अधिक से अधिक प्रयास कर रही हूं। मैं चाहती हूं कि सभी लोग यह जान सकें कि यह प्राचीन ध्यान प्रणाली कितनी अद्भुत और शांतिपूर्ण है और वे अधिक सच्चे, दयालु और सहनशील बनने की कोशिश करें,” उन्होने कहा।

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मेरे जैसे आप भी चिंता मुक्त हो सकते हैं!

Posted by NTD Television India on Friday, November 24, 2017


Falun Dafa (also known as Falun Gong) is a self-improvement meditation system based on the universal principles of Truthfulness, Compassion, and Tolerance. It was introduced to the public by Mr. Li Hongzhi in 1992 in China. It is currently practiced by over 100 million people in 114 countries. But this peaceful meditation system is being brutally persecuted in China since 1999. For more info, please visit: www.FalunDafa.org and www.FalunInfo.org.

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