लोरेटा ड्यूचैंप्स अब एक खुशहाल गृहणी और दो बच्चों की मां है, लेकिन उनके इस आश्वस्त रूप को देखकर यह मानना मुश्किल है कि वह डर, अकेलेपन और निराशा से घिरे माहौल में बड़ी हुई थीं। उनकी किशोरावस्था के वर्ष की विशेष रूप से ऐसी यादें थीं जो एक धमकाया गया शिकार हमेशा के लिए भूलना चाहता है। फिर उन्होंने एक ऐसी राह अपनाई जिससे उनके घाव भरे और उन्होंने अपना आत्म-सम्मान वापस प्राप्त किया।

“उह, लोरेटा बहुत बदसूरत है।” कमरे में एक सन्नाटा छा गया और पूरी कक्षा की नजर मुझपर आकर ठहर गई। मुझे लगा की पीड़ा के कारण मैं जमीन में धंस रही हूं और मेरा चेहरा शर्मिंदगी और अपमान के मारे लाल हो गया है।

यह एक दिन विज्ञान की कक्षा में  हुआ था जब मैं 13 या 14 साल की थी। सभी छात्र एक टेबल के चारों ओर खड़े थे जब एक लड़की, जिसने नियमित रूप से मेरा मजाक उड़ाया था, ने यह टिप्पणी की।

मैं अब 30 साल की हूं, लेकिन अभी भी वह घटना मुझे स्पष्ट रूप से याद है। वे शब्द छोटे लग सकते हैं और शायद एक ही क्षण में कहे गए थे, लेकिन यह मेरे दिमाग में बार बार घुमते रहे: “मैं बहुत बदसूरत हूँ। मैं बेकार हूँ।” उस समय तक मेरा आत्म-सम्मान कम से और कम होते हुए शून्य हो गया था।

ऐसा इसलिए था क्योंकि मेरे बचपन और किशोरावस्था में कई अलग-अलग बच्चों और किशोरों ने मुझे गंभीर रूप से धमकाया था। मुझे बदसूरत कहा जाता था और शारीरिक रूप से मुझपर हमला किया जाता था, यहाँ तक की मेरी जान लेने की धमकी भी दी गई थी।

यद्यपि मैंने इस अतीत से अपने आप को दूर कर लिया है, मैं लंबे समय तक तीव्र भय और अवसाद से पीड़ित रही, और मुझे विश्वास हो गया था कि ऐसा कुछ भी नहीं था जिसे मैं कर सकती थी और ऐसा कोई नहीं था जिससे मैं बात कर सकती थी। समय के साथ, इन धमकियों ने मेरा आत्मविश्वास और आत्म-सम्मान नष्ट कर दिया था।

लोरेटा, बचपन में, अपनी बिल्ली के साथ एक तस्वीर के लिए पोज़ कर रही हैं

 

अल्पकालिक काली घटा

जब मैं 19 वर्ष की थी तब मैं भाग्यशाली थी की अपने इलाज के लिए एक रास्ता खुल गया और जीवन में मेरा विश्वास दुबारा लौट आया। अब मैं एक खुशहाल गृहणी और दो अदभुत बच्चों की मां हूं, 4 साल का एक लड़का और 2 साल की एक लड़की। 2012 से हम यू.के. में रहते हैं और पहले मैं बेल्जियम में एक व्यावसायिक चिकित्सक के रूप में प्रशिक्षित हुई थी।

हाल ही में मैं धमकाने के परिणामस्वरूप युवा लोगों की आत्महत्या करने वाली कई कहानियां पढ़ रही हूं। उनमें एक 10 वर्षीय लड़की और एक 13 वर्षीय लड़की शामिल है जिसे लगातार धमकाया जाता था और उन्हें “बदसूरत” कहा जाता था।

मैं उनको पहुंचाई गई हानि के बारे में बहुत दुःखी महसूस करती हूँ। मैं उनके मानसिक दर्द, और दिन ब दिन गहरे भय, चिंता और असहनीय पीड़ा को समझ सकती हूं जो उन्होंने महसूस की होगी। जब आप सुरंग के अंत को नहीं देख पाते और पूरी तरह से निराशाजनक और अकेला महसूस करते हैं तो यह बहुत मुश्किल होता है।

लेकिन इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि कोई कितना धीरज रखता है। यह एक अस्थायी अंधेरे बादल की तरह है जो गुजर जाता है, या एक ऐसा मोड़ जो उज्जवल भविष्य की ओर ले जाता है। जैसा कि कुछ लोग कहते हैं, बारिश के बाद धूप निकल आएगी।

मैं तहे दिल से जानती हूँ कि जीवन कीमती और उद्देश्यपूर्ण है, और मैं इस उम्मीद से अपनी कहानी लिख रही हूं कि यह किसी और को मेरे जैसी स्थिति में मदद कर सके।

बारिश के बाद हमेशा धूप होगी। चाहे कोई कितना भी पीड़ित हो, यह एक अल्पकालिक बादल की तरह हो सकता है जो गुज़र जाएगा और एक उज्ज्वल दिन की ओर ले जाएगा।

बचपन में डर और अकेलापन

प्राथमिक और हाई स्कूल, दोनों के दौरान, मेरा पिछला जीवन डर और अकेलेपन से भरा था।

6 से 12 साल की उम्र में, स्कूल में एक लड़के द्वारा धमकाए जाने के बाद, लगभग हर दिन मैं रोते हुए घर आती थी। मैं जो कुछ भी कहती या करती, वह मेरा मजाक उड़ाता और मुझे कई नामों से पुकारता। मैं उससे डरती थी और नहीं चाहती थी कि मेरे माता-पिता स्कूल में यह बात बताने के लिए आए, लेकिन इसने मुझे धीरे-धीरे एक बहुत ही कम आत्मविश्वास वाली बच्ची में बदल दिया।

एक दिन की इस बात ने मेरे आत्म-सम्मान को और भी कुचल दिया जब मैंने स्कूल बस पर बस सहायक को बताने की कोशिश की कि इस लड़के ने मुझे धमकाया है, और उसने मदद करने के बजाए बात हंसी में उड़ा दी। और जब लड़के ने इस बात को नहीं माना कि उसने मुझे धमकाया है, तो उन्होंने उसका पक्ष लिया और मुझे कुछ दुःखद शब्द कहें। बस के चालक और अन्य बच्चों ने भी यह बातें सुनी, लेकिन किसी ने कुछ भी नहीं कहा या किया।

“मैंने स्कूल बस पर बस सहायक को बताने की कोशिश की कि इस लड़के ने मुझे धमकाया है, और उसने मदद करने के बजाय बात हंसी में उड़ा दी।”

आत्म-सम्मान शून्य तक गिर गया

मुझे 12 साल की उम्र में हाईस्कूल शुरू करने के लिए उस स्कूल को छोड़कर खुशी हुई, लेकिन स्थिति बेहतर होने की बजाय बदतर हो गई।

यह एक दिन स्कूल बस की प्रतीक्षा करते समय शुरू हुआ, जब कुछ लड़कियां, जिनको मैंने अपना दोस्त समझा था, मुझ पर हँसने लगीं लेकिन मुझे यह नहीं बताया कि बात क्या थी। मैंने दुःखी और अपमानित महसूस किया।

लेकिन यह सिर्फ शुरुआत थी। बाद में उन्होंने गिरोहों का निर्माण किया और जानबूझकर मुझे छोड़ दिया। अकेलेपन और असुरक्षा की गहरी भावनाएं मेरे अन्दर बढती गई।

जीवविज्ञान वर्ग में एक घटना के बाद, एक बदसूरत और बेकार व्यक्ति होने के मेरे निरंतर विचार, आंतरिक मान्यताओं में विकसित हुए। जब भी मुझे कक्षा में बात करनी पड़ती तो मैं लाल हो जाती थी। अपने आप को बचाने के लिए, मैं हमेशा सामने की पंक्ति में बैठती थी और अपने चेहरे के किनारों को बालों से छुपा लेती थी। इस तरह, जब भी मुझे बात करने के लिए कहा जाता था, तो कोई भी मेरा चेहरा नहीं देख पाता था।

स्कूल की एक क्लास फोटो में लोरेटा (दूसरी पंक्ति में बाएं ओर से पहली)।

क्रूरता और रूखापन

स्कूल के बाहर, एक और लड़की थी जो जब भी मिलती मुझे परेशान करने और आतंकित करने पर तुली हुई थी, एक ऐसी क्रूरता के साथ, जिसे मैं समझ नहीं पाई।

पहली बार तब हुआ जब मैं 13 वर्ष की थी और एक पार्टी में गई थी। उसने मेरे बालों को इतनी जोर से खींचा कि मैं लगभग गिर गई। लड़कियों का एक समूह मुझ पर हँसने लगा और मुझे चिढ़ाने लगा। उसके बाद, जब उस लड़की ने मुझे धक्का देकर ज़मीन पर गिरा दिया, तो किसी ने मेरी मदद नहीं की। मैं पार्टी से रोते हुए निकल आई, उससे दुबारा मिलने के डर से।

लोरेटा ड्यूचैंप्स की हाई स्कूल फोटो।

कुछ समय बाद, मैं एक पार्क में बेंच पर बैठी थी जब उसी लड़की से मेरा सामना हुआ। उसने कुछ ऐसा कहा “तुम अपने आप को क्या समझती हो? तुम अपने आप को बहुत ऊँचा समझती हो।” दुबारा, मैं बुरी तरह डर गई और वहां से भाग निकली।

स्थानीय युवा क्लब में एक दिन उस लड़की ने मुझे फिर से धमकी देना शुरू कर दिया, अपने गले पर अपना हाथ फेरते हुए, जैसे कि वह मुझे मारने का संकेत कर रही हो। मुझे अभी भी वह डर याद है। मैं घर चली गई और बहुत देर तक रोते रही।

जीवन के उद्देश्य पर विचार करना

ये मेरे स्कूल वर्षों के दौरान अनुभव किये गए धमकाने के केवल कुछ उदाहरण हैं। उस समय, मेरा मानना था कि ऐसा कोई भी नहीं है जिससे मैं मदद मांग सकती हूँ, इसलिए मैं उन घटनाओं को छिपाने में माहिर बन गई और मेरे परिवार सहित किसी को भी कुछ नहीं बताया। मैं अंदर से ज़ख़्मी होने के बावजूद एक सामान्य लड़की होने का नाटक करती रही।

मुझे याद है कि 16 साल की उम्र में बिस्तर पर लेटे हुए मैं हर रात रो रो कर सो जाती थी। यह सोचते हुए कि मुझे इस तरह के एक दुःखी अस्तित्व के साथ नहीं जीना है और सोचती रहती थी कि ऐसे जीवन का क्या फायदा था यदि मुझे इतनी पीड़ा भुगातिनी पड़े और फिर अंत में मैं मर जाऊं।

“मुझे याद है कि 16 साल की उम्र में बिस्तर पर लेटे हुए मैं रोते हुए सो जाती थी यह सोचकर कि मैं जीना नहीं चाहती …”

साथ ही, मेरे दिमाग में अपने जीवन के अस्तित्व को लेकर असंख्य प्रश्न उठते थे: जीवन का उद्देश्य क्या है? क्या मैं यहां पीड़ित होने के लिए आई हूँ, और कुछ नहीं? या क्या कोई ऐसा उद्देश्य है जो मुझे पूरा करना है और जो मेरा इंतजार कर रहा है?

अंततः ये प्रश्न उन घटनाओं के कारण बने जिन्होने मेरे जीवन को हमेशा के लिए बेहतर बनाया, क्योंकि उन्होंने मेरे आध्यात्मिक उत्साह को उजागर किया, एक ऐसा जानकार पक्ष जो मेरा हिस्सा था, लेकिन जब तक मैं इसपर पुनः अपना हक नहीं जमाती तब तक पूरी तरह से दबा हुआ रहता।

आध्यात्मिक खोज

यह मेरे माता-पिता के जीवन के अर्थ की खोज के माध्यम से था कि आध्यात्मिकता में मेरी रूचि विकसित हुई। मेरे माता-पिता ने मुझे ध्यान, योग और बौद्ध धर्म और ताओवाद जैसी प्राचीन शिक्षाओं से परिचित कराया, जिसने मुझे आराम और एक तरह का शरण और आश्वासन प्रदान किया जो मैंने पहले कभी अनुभव नहीं किया था।

लोरेटा अपने माता-पिता और छोटे भाई के साथ।

ऐसे प्रश्नों के उत्तर की तलाश करते हुए कि, “हम इस दुनिया में क्यों हैं,” मेरी जिज्ञासा बढ़ी और मैंने अपनी आध्यात्मिक खोज में खुद को डुबा दिया। आखिरकार, इससे मुझे पता चला कि मुझे सचमुच अपना जीवन वापस क्यों मिल गया है।

2006 में वह एक दिन ऐसा आया, जब मैं 19 वर्ष की थी। मैंने अपने माता-पिता और एक बुजुर्ग महिला के साथ एक आध्यात्मिक कार्यक्रम में भाग लिया, जहां हमें फालुन दाफा नामक अभ्यास के बारे में एक पत्रिका दी गई। यह एक पारंपरिक चीनी अभ्यास है जो आपको बुद्धिमत्ता और आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त करने के तरीके के रूप में सच्चाई, करुणा और सहनशीलता के सिद्धांतों का पालन करके अपने दिमाग और शरीर को विकसित करना, या सुधारना सिखाता है।

इस अभ्यास में चार खड़े रहकर करने वाले अभ्यास, एक बैठकर करने वाला ध्यान अभ्यास, और “ज़ुआन फालुन” नामक पुस्तक में संधर्भित नैतिक शिक्षा सिखाता है। मुझे पता चला कि 10 करोड़ से अधिक लोग दुनिया भर में फालुन दाफा का अभ्यास करते हैं, और सभी शिक्षाएं हमेशा निशुल्क प्राप्त की जा सकती हैं।

लोरेटा फालुन दाफा का बैठकर करनेवाला ध्यान अभ्यास करती हैं।

आत्मविश्वास लौट आया

“ज़ुआन फालुन” ने मेरे जीवन और उसके अर्थ के बारे में सभी सवालों के जवाब दिए। इससे मुझे चीजों को हल्के ढंग से लेने और हमेशा किसी भी परिस्थिति को दयालुता से प्रक्रिया करने में मदद मिली, भले ही कोई और अन्यायी, निर्दयी या क्रूर हो। मैंने सीखा कि ईमानदारी, दयालुता, धैर्य और आत्म-संयम उन कई गुणों में से हैं जो लोगों के मूल सच्चे रूप का हिस्सा हैं।

मुझे खुशी की एक गहरी भावना महसूस हुई जो मैंने पहले कभी महसूस नहीं की थी। जैसे-जैसे मैंने अपने आप को सशक्त महसूस करना शुरू किया, क्षमा और आशावाद ने मेरे अतीत में धमकाने के कई वर्षों के कारण जो क्रोध, नाराजगी और बदला लेने के विचार थे उनको बदल दिया।

लोरेटा और उनकी बेटी

मैंने अपने आत्मविश्वास को फिर से हासिल करना शुरू किया, ताकि विश्वविद्यालय में रहते हुए जब किसीने मुझे धमकाने की कोशिश की, तो मैं गरिमा के साथ स्थिति को संभालने में सक्षम थी। यह घटना मेरे व्यावसायिक थेरेपी इंटर्नशिप कार्यक्रम के दौरान हुई, जब मैं मानसिक विकलांगता वाले लोगों के लिए एक केंद्र में एक सलाहकार की देखरेख में काम कर रही थी।

लोरेटा, लंदन,यू.के. में अपने पति के साथ,

एक दिन, उस सलाहकार ने मुझसे उपहासपूर्ण स्वर में बात की: “मैंने कभी पहले किसी को भी फेल नहीं किया है। मैं जानना चाहता हूं कि किसी को विफल करना कैसा लगता है।” जब मैंने विनम्रतापूर्वक लेकिन आत्म-आश्वासन के साथ जवाब दिया, वह आश्चर्यचकित रह गई और शायद मेरी दृढ़ता से नाराज भी हो गई, लेकिन अंत में मैंने प्रशिक्षण पारित किया।

पूरी तरह से परिवर्तन

अंदर से बाहर तक व्यक्तिगत रूप से और आध्यात्मिक परिवर्तन के कारण, मैंने अपनी आवाज़ को दोबारा हासिल कर लिया था और आत्मनिर्भरता और अपनी क्षमताओं की पूर्ण पहचान के साथ अब मैं जवाब देने में सक्षम थी, जिसके लिए मैं फालुन दाफा से पाई शिक्षा का धन्यवाद करती हूं।

फालुन दाफा के चिगोंग अभ्यासों में से एक को प्रदर्शित करने वाली एक घटना में लोरेटा ड्यूचैंप्स।

मैंने उन लोगों को पूरी तरह से क्षमा कर दिया है जिन्होंने मुझे कभी धमकाया था और मुझे उनके प्रति अब कोई घृणा नहीं है। मैं फालुन दाफा के सत्यता, करुणा और सहनशीलता के सिद्धांतों की मेरी साधना में लगातार आगे बढ़ रही हूं, और हीनता और भय की भावनाओं को पीछे छोड़ रही हूं।

जबकि हमारा जीवन हमेशा हमें परीक्षणों और कष्टों को पेश करता रहेगा, मेरा मानना है कि हममें से प्रत्येक के अंदर ताकत और उद्देश्य है जो हमारे जीवन में दैवीय उदारता का हिस्सा बना रहेगा।

मुझे उम्मीद है कि मेरी कहानी उन लोगों की मदद कर सकेगी जो अपने जीवन में धमकाने या अन्य चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, ताकि वे भी इस उच्च शक्ति में विश्वास पा सकें और एक उज्ज्वल दिशा और भविष्य के साथ आगे बढ़ सकें।

लोरेटा ड्यूचैंप्स और उनके पति अपने शादी के दिन फालुन दाफा का ध्यान अभ्यास करते हैं।

संपादक का संदेश:

फालुन दाफा (फालुन गोंग के नाम से भी जाना जाता है) सत्य, करुणा और सहनशीलता के सार्वभौम सिद्धांतों पर आधारित एक आत्म-सुधार की ध्यान प्रणाली है, जो स्वास्थ्य और नैतिक चरित्र को सुधारने और आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त करने के तरीके सिखाती है।

यह चीन में 1992 में श्री ली होंगज़ी द्वारा जनता के लिए सार्वजनिक किया गया था। वर्तमान में 114 देशों में 100 मिलियन से अधिक लोगों द्वारा इसका अभ्यास किया जा रहा है। लेकिन 1999 के बाद से इस शांतिपूर्ण ध्यान प्रणाली को क्रूरता से चीन में उत्पीड़ित किया जा रहा है।

अधिक जानकारी के लिए, कृपया देखें:  falundafa.org and faluninfo.org. सभी पुस्तकें, अभ्यास संगीत, अन्य सामग्री और निर्देश पूरी तरह से निःशुल्क, कई भाषाओँ में (हिन्दी में भी) उपलब्ध हैं।

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