दंगल फिल्म का यह डॉयलोग तो आपको याद ही होगा, “म्हारी छोरियाँ, छोरों से कम हैं के।” लड़कियाँ आजकल किसी मामले में लड़कों से पीछे नहीं हैं। भारत की महिलाएं अब सिर्फ क्रिकेट ही नहीं खेलतीं बल्कि अब वे अंपायरिंग में भी हाथ आज़मा रही हैं। नवी मुंबई की 29 वर्षीया वृंदा राठी, इन दिनों मुंबई के लोकल मैचों में अंपायरिंग करती नज़र आ रही हैं। ये पेशे से फिटनेस कोच हैं। 

 

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मुंबई में क्रिकेट खेल रहे किशोर खिलाड़ियों को फील्ड पर अभी महिला अंपायर्स की आदत नहीं है। इसलिए खिलाड़ी अकसर वृंदा को “मेडम” की जगह “सर” पुकार देते हैं। काले रंग की पेंट और सफेद रंग की पूरी बाजू वाली शर्ट और सिर पर हैट पहने वृंदा का अंपायरिंग लुक इंटरनैशनल क्रिकेट में मशहूर अंपायर बिली बोडन (Billy Bowden) से ज्यादा नहीं तो कुमार धर्मसेना से कम भी नहीं लगता। वृंदा राठी भी इस बात पर मुस्कुरा कर खेल को जारी रखती हैं।

 

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राठी ने बीते महीने बीसीसीआई की अंपायरिंग के लिए होने वाली लेवल 2 परीक्षा पास की है। इससे पहले राठी मुंबई के लिए कई लोकल मैचों में बतौर स्कोरर भी अपनी सेवाएं दे चुकी हैं। राठी के अलावा चेन्नई की एन. जननी ने भी यह परीक्षा पास की है। जननी अब भारत की अंतर्राष्ट्रीय महिला अंपायर हैं।

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