“कर इरादों को मज़बूत इतना कि तुझे छूना नहीं उन बुलंदियों को उन पर पांव रखना है, हो जाए आंधियों को भी अंदाज़ा ये कि उन्हें एक नए पथिक से लड़ना है।” कविता की ये चंद पक्तियां महाराष्ट्र की “प्रंजिल पाटिल” की ज़िंदगी को बखूबी दर्शाती है, जिन्होंने दिव्यांग होते हुए भी ऐसा कुछ कर दिया है, जिसकी आम इंसान वर्षों तैयारियां करता रह जाता है।

मात्र छः वर्ष की आयु में अपनी देखने की शक्ति खो चुकी पाटिल ने जिंदगी की किसी भी चुनौतियों से मुंह नहीं मोड़ा और अपनी मेहनत की बदौलत UPSC 2017 में 124वां रैंक हासिल किया है।

हिन्दुस्तान टाइम्स के अनुसार, पाटिल ने मई 28, 2018 को केरल के एरनाकुलम के असिस्टेंट कलेक्टर के तौर पर कार्यभार संभाला। इसके साथ ही पाटिल देश की पहली दिव्यांग महिला कलेक्टर बन गई।

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Credit: Facebook (Thagaval Kalanchiyam)

ऐसा नहीं है कि पाटिल ने UPSC की परीक्षा पहली बार पास की है। दी न्यू इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक,वर्ष 2016 में भी उन्होंने इसकी परीक्षा पास की थी और तब AIR 773वें स्थान पर आई थी। उन्हें रेलवे के अकाउंट विभाग में नौकरी की पेशकश भी मिली, लेकिन दिव्यांग होने की वजह से पाटिल इस नौकरी को नहीं कर सकीं।

खबरों के अनुसार पाटिल ने अपनी पहली ट्रेनंग मसूरी के लाल बहादुर शास्त्री नेशनल अकादमी ऑफ एडमिन्स्ट्रेशन में पूरी की। कोची में  ट्रेनिंग के बाद अपनी ट्रेनिंग पूरी करने के लिए वे मसूरी वापस आ जाएंगी।

बात यदि पाटिल की शिक्षा की करें तो उन्होंने जवाहर लाल नेहरु विश्वविद्यालय, नई दिल्ली से अंतरराष्ट्रीय संबंध में परा स्नातक किया है। इसके अलावा उन्होंने एमफिल भी किया है।

पाटिल, जापानी दार्शनिक दैसकु इकेदा (Daisaku Ikeda ) और स्टीफेन हॉकिंग (Stephen Hawking) को अपनी प्रेरणा श्रोत मानती हैं।

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