“मेरे शरीर पर पड़ी एक-एक लाठी ब्रिटिश सरकार के ताबूत में एक-एक कील का काम करेगी”…ये बात लाला लाजपत राय ने अक्टूबर 30, 1928 को लाहौर में साइमन कमीशन के विरोध प्रदर्शन के दौरान हुए लाठीचार्ज में बुरी तरह से घायल होने के बाद कही थी। और ऐसा हुआ भी, इस दिन से ही अग्रेज़ी शासन काल का सूर्य धीरे-धीरे अस्त होने लगा और अंततः 15 अगस्त 1947 को हिन्दुस्तान के आसमान से हमेशा हमेशा के लिए अग्रेज़ी बादल छट गए। भारत को स्वाधीनता दिलाने में उनका त्याग, बलिदान तथा देशभक्ति अद्वितीय और अनुपम थी। उनके बहुविधि क्रियाकलाप में साहित्य-लेखन एक महत्वपूर्ण आयाम है। 

1. ननिहाल में हुआ था जन्म!

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“पंजाब केसरी” के नाम से प्रसिद्ध “लाला लाजपत राय” का जन्म जनवरी 28, 1865 को अपने ननिहाल के गांव ढुंढिके (जिला फरीदकोट, पंजाब) में हुआ था। उनके पिता “लाला राधाकृष्ण” लुधियाना जिले के जगरांव कस्बे के निवासी अग्रवाल वैश्य थे, जो कि एक अध्यापक थे।

2. सरकारी स्कूल में पूरी की प्रारंभिक शिक्षा!

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1870 के दशक के अंत में उनके पिता का स्थानंतरण रेवाड़ी में हो गया। रेवाड़ी सरकारी हायर सेकेंड्री स्कूल में राय ने अपनी शुरुआती शिक्षा पूरी की, जहां उनके पिता उर्दू शिक्षक के तौर पर नियुक्त किए गए थे।

3. बचपन में प्रज्वलित हुई उदारवादी विचारधारा!

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शुरुआती दिनों में ही राय के पिता और अत्यधिक धार्मिक उनकी मां द्वारा उनके बाल मन में हिन्दुत्व और उदारवादी विचारधार प्रज्वलित कर दी गई थी, जिसे उन्होंने सफलतापूर्वक अपने जीवन में स्थापित भी किया।

4. दयानंद से बहुत प्रभावित हुए!

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1880 में उन्होंने लाहौर के सरकारी कॉलेज में वकालत की पढ़ाई के लिए दाखिला लिया। लाहौर में अध्ययन के दौरान ही राय की कई देशभक्तों से भी मुलाक़ात हुई, इस दौरान वे स्वामी दयानंद सरस्वती से बहुत प्रभावित हुए।

5. गरम दल का गठन किया!

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लाजपत राय भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के तीन प्रमुख नेताओं बाल गंगाधर तिलक, बिपिन चंद्र पाल में से एक थे। इन तीनों तिकड़ी को संक्षिप्त में “लाल-बाल-पाल” के नाम से जाना जाता है। उन्होंने नरम दल के विरोध में गरम दल का गठन किया था।

6. छः महीनों तक जेल में रहे!

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लाला लाजपत राय को मई 3, 1907 को रावलपिंडी में अशांति पैदा करने के लिए गिरफ्तार कर लिया गया और मांडले जेल में छः महीने रखने के बाद 11 नवम्बर 1907 को रिहा कर दिया गया।

7. साइमन कमीशन का हुआ विरोध!

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वर्ष 1928 में ब्रिटिश सरकार ने संवैधानिक सुधारों पर चर्चा के लिए साइमन कमीशन को भारत भेजने का फैसला किया। कमीशन में कोई भी भारतीय सदस्य न होने की वजह से सभी लोगों में निराशा और क्रोध व्याप्त था। 1929 में जब कमीशन भारत आया तो पूरे भारत में इसका विरोध किया हुआ।

8. लाठीचार्ज में हुए घायल!

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लाला राजपत ने खुद इस जुलूस का नेतृत्व किया। इस दौरान ब्रिटिश सरकार ने बेरहमी से जुलूस पर लाठी चार्ज किया, जिसमें लाला लाजपत राय के सिर पर गंभीर चोटें आई। उस समय उन्होंने कहा था कि, मेरे शरीर पर पड़ने वाली एक-एक लाठी ब्रिटिश सरकार के ताबूत में एक-एक कील का काम करेगी।

9. नवंबर 17, 1982 को परलोक सिधार गए!

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सिर में गंभीर चोट लगने की वजह से लाला लाजपत राय 18 दिनों तक गंभीर रुप से बीमार रहने के बाद नवंबर 17, 1928 को परलोक सिधार गए।

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