“नम आंखों को छोड़कर वो अनगिनत यादों में बस गया, मिसाइलमैन कहलाने वाला अलविदा दोस्तों कह गया।” पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के लिए लिखी गई ये कविता उनके प्रति लोगों का प्यार दर्शाती है। कलाम साहब ने विज्ञान और प्रकृति  के क्षेत्र में देश को बहुत कुछ दिया है। यहां इस लेख में कलाम साहब से जुड़ी कुछ ऐसी ही हृदय स्पर्शी घटनाओं के बारे में बताया गया है।

बात वर्ष 2015 की है, जब कलाम साहब महाराष्ट्र के लोनी क्षेत्र में “प्रवारानगर रूरल एजुकेशन सोसाइटी” की 50 वीं वर्षगांठ के अवसर पर आमंत्रित किए गए थे। यहां उनके स्वागत में स्कूली बच्चों का कार्यक्रम रखा गया था। लेकिन समय की किल्लत के कारण उस कार्यक्रम को रद्द करने का निर्णय लिया गया।

1. रो रहे थे बच्चे!

गांव कनेक्शन ने कलाम साहब के शिष्य सृजन पाल सिंह की किताब “वॉट कैन आई गीव” (What can I give) के हवाले से बताया कि सृजन पाल ने कलाम साहब को बताया कि समय बचाने के लिए बच्चों के कार्यक्रम को रद्द कर दिया गया है। लंच के वक्त कलाम साहब ने सभी बच्चों को बुलवाया। जो कि कार्यक्रम रद्द हो जाने के कारण उदास हो गए थे। उनमें से कुछ तो रो भी रहे थे।

2. बच्चों के लिए छोड़ दिया लंच!

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कलाम साहब ने बच्चों से मिलने के लिए पांच मिनट का समय मांगा था लेकिन उनसे बातें करते-करते समय काफी हो गया। इस दौरान उन्होंने अपना लंच भी छोड़ दिया। जब कलाम साहब जाने को हुए तो डॉ. अशोक पाटिल ने कहा, “परफॉर्मेंस न दे पाने के बावजूद ये बच्चे सबसे खुशकिस्मत निकले जिन्हें आप के साथ प्रत्यक्ष रूप से समय बिताने का अवसर मिला।” ये सुनकर सभी बच्चे आंसू पोंछकर खिलखिलाकर हंसने लगे।

3. व्यक्तिगत व्यवहार मजबूत था!

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कलाम साहब की एक और खास बात यह थी कि उनका लोगों के प्रति व्यक्तिगत व्यवहार बहुत ही मजबूत था और वे इसे मजबूत बनाए रखने में भी कोई कोर कसर नहींं छोड़ते थे। इसका अंदाजा आप इस बात से ही लगा सकते हैं कि कलाम साहब किसी को धन्यवाद कहने के लिए अपने हाथ से बनाया धन्यवाद कार्ड दिया करते थे। एक बार एक आम इंसान जिसका नाम “नमन नारायण” था, उसने कलाम साहब का एक स्केच बनाया। नमन को धन्यवाद कहने के लिए कलाम साहब ने अपने हस्ताक्षर के साथ हाथ से लिखी एक चिट्ठी उसे भेजी। शायद नमन के लिए उस चिट्ठी से बड़ा तोहफा और कुछ भी नहीं हो सकता था।

4. एक विनम्र शख्स थे कलाम!

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कलाम साहब बहुत ही विनम्र किस्म के इंसान थे। एक घटना उनकी विनम्रता को बखूबी दर्शाती है। दरअसल एक बार कलाम साहब के अधिनस्थ काम करने वाले एक कर्मचारी ने उनसे अपने बच्चे को प्रदर्शनी दिखाने के लिए छुट्टी मांगी। कलाम साहब ने ना सिर्फ उसे छुट्टी दी बल्कि खुद भी उसके बच्चों के साथ  प्रदर्शनी देखने गये।

सच में कलाम साहब एक महान शख्सित थे। उनका काम ही मील का पत्थर साबित नहीं हुआ है, लेकिन उनकी नम्रता और उदारता ने लोगों के दिमाग में भी अमिट छाप छोड़ी है। 

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