पिछले महीने भारतीय मूल के क्रिथिक रमेश ने भारत आने का फैसला किया जो वर्तमान में डेनवर में रहते हैं । यह वही जगह है जहाँ वह हमेशा से आना चाहते थे। भारत आकर वह तमिलनाडु में अपने दादाजी के गांव अटूर चले आये और अटूर के पास एक गांव हैं देवियाकुरुचि जहाँ के सरकारी स्कूल में क्रिथिक के दादाजी पढ़ा करते थे। 

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जब वह सरकारी स्कूल में पहुंचे तब वहाँ की हालत देखकर उन्हें बड़ा आश्चर्य हुआ। उन्होंने देखा कि इस सरकारी स्कूल में पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध ही नहीं हैं। स्कूली छात्रों से उन्हें पता चला भारत के कई सरकारी स्कूलों की स्थिति ऐसी ही है। जिसके बाद क्रिथिक ने इन स्कूलों के लिए कुछ करने की ठानी। 

क्रिथिक ने अपने पिताजी एम. एम. रमेश और दादाजी वी. मुथुरमन के साथ मिलकर पूरे देश के सरकारी स्कूलों की हालत सुधारने हेतु ग्रामीण भारत फाउंडेशन नामक एक गैर लाभकारी संगठन की शुरुआत की और उसे सशक्त बनाने का फैसला किया। 

लेकिन प्रेरित होकर इस फाउंडेशन की शुरुआत के बाद क्रिथिक को महसूस हुआ कि अपने कार्य को गति देने के लिए उनके पास पर्याप्त धन राशि नहीं है। जिसके बाद उनके परिवारवालों ने सुझाव दिया कि वह इसके लिए प्रायोजकों की तलाश कर सकते हैं। लेकिन उनके पास इससे अच्छा विकल्प था। 

लगभग छह महीने पहले चेरी क्रीक हाईस्कूल के छात्र क्रिथिक ने पिट्सबर्ग में एक अंतर्राष्ट्रीय विज्ञान मेले में प्रथम क्रमांक हासिल किया था। जिसमें पुरस्कार के रूप में उन्हें 3000 डॉलर की धनराशि दी गयी थी। और इसी राशि को उन्होंने देश के सरकारी स्कूलों में आवश्यक सुविधाओं हेतु दान करने का निर्णय लिया। 

इसके बाद क्रिथिक ने स्कूल प्रबंधन से संपर्क किया और स्कूल की जरूरतों के बारे में पूछताछ की। उन्हें बताया गया कि स्कूल में अकसर बिजली की समस्या रहती है। इसलिए प्रिंसिपल ने सुझाव दिया कि सौर पैनल की स्थापना स्कूल के लिए काफी मददगार साबित होगी और बिजली की समस्याभी साथ-साथ ख़त्म हो जाएगी। 

क्रिथिक इस विचार से ख़ुशी से सहमत हुए और उनके परिवारवालों ने सौर पैनल वालो से संपर्क कर दो हफ्ते पहले सफलता पूर्वक स्कूल में सौर पैनल की स्थापना करवाई। जिसके बाद स्कूल अब आसानी से बिजली दरों के खर्च लगभग 7,500 की बचत कर सकता है। 

दिलचस्प बात यह हैं कि सौर पैनल लगभग 2 किलोवॉट बिजली का उत्पादन कर सकते हैं। जो स्कूल की जरूरत से ज्यादा हैं। इसके लिए क्रिथिक ने सुझाव दिया कि स्कूल राज्य बिजली बोर्ड को अतिरिक्त बिजली बेच सकते हैं। क्रिथिक के पिता रमेश के अनुसार वह भारत के सरकारी स्कूलों में टिकाऊ और नवीकरणीय ऊर्जा प्रणाली स्थापित करने की मंशा रखते हैं। 

यह प्रणाली पूरे भारत में लम्बे समय तक अपनी सेवा प्रदान करेगी और आत्मनिर्भर समाधान के माध्यम से बेहतर शैक्षणिक सफलता के लिए मार्ग प्रशस्त करेगी। साथ क्रिथिक कहते हैं कि वह और ज्यादा विज्ञान मेले में भाग लेंगे और ज्यादा पैसा कमाएंगे और भारत के सरकारी स्कूलों के विकास के लिए उन पैसों का दान देंगे। 

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