बड़ौदा के रहने वाले 24 वर्षीय शतरंज खिलाड़ी दर्पण इरानी भले ही दिव्यांग हों लेकिन फ्रांस के क्रियोंन ओपन (Creon Open) में भारत के लिए शतरंज में उन्होंने स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। विश्वनाथन आनंद को अपना आदर्श मानने वाले दर्पण भविष्य में शतरंज के बड़े ख़िताब जीतकर ग्रैंडमास्टर बनना चाहते हैं।

आइये जानते हैं भारत के दिव्यांग शतरंज खिलाड़ी दर्पण इरानी की कहानी जिन्होंने भारत का नाम रोशन किया।

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दर्पण ने 3 साल की उम्र में ही अपनी आँखों की रोशनी को खो दिया। स्टीवन जॉनसन सिंड्रोम (Stevens-Johnson syndrome) नामक आँखों की बीमारी से पीड़ित दर्पण अपनी आँखों की  50 सर्जरी करा चुके हैं। लेकिन फिर भी उन्हें आंखों की रौशनी वापस नहीं मिली।

बेटर इंडिया( The Better India.) को दिए एक साक्षात्कार में दर्पण कहते हैं, ” मैंने इस खेल को इसलिए चुना, क्योंकि शतरंज ही एक ऐसा खेल है जहां एक नेत्रहीन खिलाड़ी एक देख सकने वाले खिलाड़ी के साथ खेल सकता है। ऐसा बराबरी का मुक़ाबला किसी और खेल में संभव ही नहीं है।” हालाँकि नेत्रहीन शतरंज पिछले 20 वर्षो से अस्तित्व में है लेकिन मैं देख सकने वाले खिलाड़ी से प्रतिस्पर्धा करना चाहता था।”

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दर्पण कहते हैं, “मेरे सारे दोस्त खो-खो, कबड्डी जैसे खेल खेलते थे, मैं जानता था कि इन खेलों में मैं उनका मुक़ाबला नहीं कर सकता और यही वो समय था जब मैं शतरंज की ओर आकर्षित हुआ। मैं जब 8 साल का था तब मेरे माता-पिता को अहसास हुआ कि मैं शतरंज खेल सकता हूँ।”

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नेत्रहीन शतरंज कैसे खेलते हैं के जवाब में दर्पण कहते हैं, ”ब्लाइंड चेस और साइटड चेस में कोई फर्क नहीं होता। नेत्रहीन खिलाड़ी जिस चेस बोर्ड पर खेलते हैं या तो वो लकड़ी का होता है या फिर एक्रेलिक का। उस बोर्ड में छेद होते हैं। जो गोटियां होती हैं जैसे हाथी या फिर घोड़ा उनके नीचे एक किल्ली होती है जो बोर्ड में अटक जाती है। तो एक नेत्रहीन खिलाड़ी जब इन्हें छूता है तो वो गिरती नहीं है। जहाँ तक बात रंग की है तो जो काले रंग की गोटी होती है वो ऊपर से नोकीली होती है। सफ़ेद गोटी ऊपर से सपाट होती है। बस यही फर्क होता है।”

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दर्पण ने 14 वर्ष की उम्र में नेत्रहीन खिलाड़ी के विरुद्ध अपना पहला शतरंज टूर्नामेंट जीता था। दर्पण को 2013 में भारत का सबसे बड़ा शतरंज का नेत्रहीन खिलाड़ी का खिताब मिला। शतरंज के अलावा दर्पण हारमोनियम और तबला भी बजाते हैं और साथ ही वे चार्टेड अकाउंट का भी अध्ययन कर रहे हैं।

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