एसिड हमले का शिकार लक्ष्मी अग्रवाल पिछले काफी दिनों से सुर्खियों में हैं। लम्बी अदालती लड़ाई लड़ने वाली इस लड़की की संघर्ष और साहस की कहानी काफी रोचक है। जिसे मेघना गुलज़ार लक्ष्मी के जीवन की वास्तविकता को दीपिका पादुकोण के माध्यम से बड़े परदे पर उतारना चाहती हैं। 

 
 
 
 
 
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लक्ष्मी के जीवन संघर्ष की वास्तविकता को बॉलीवुड की निर्माता निर्देशक मेघना गुलज़ार बड़े परदे पर उतारना चाहती हैं। जिसमें लक्ष्मी का किरदार अभिनेत्री दीपिका पादुकोण निभा रही हैं। दीपिका ने एक बयान में कहा कि, ” तेजाब हमला एक बेहद क्रूर हिंसा है। जब मैंने यह कहानी सुनी तो इसने मेरे दिल को छू लिया। यह एक महिला की मजबूती, ताकत, उम्मीद और जीत की कहानी भी बयां करती है। इसने मुझ पर इतना गहरा प्रभाव डाला कि व्यक्तिगत और रचनात्मक तौर पर मैं इसे लेकर कुछ करना चाहती थी।”

इन दिनों  लक्ष्मी आर्थिक तंगी से जूझ रही हैं। हाल ही में एक इंटरव्यू में लक्ष्मी ने कहा है कि उनके पास घर का किराया देने के लिए भी पैसे नहीं हैं। उनका कहना है कि लोगों को लगता है कि उन्होंने बहुत सारे अवॉर्ड जीते हैं और बहुत सारे शोज में हिस्सा लिया है तो उनके पास बहुत पैसे होंगे। लेकिन स्थिति इसके विपरीत है। आजकल उनकी माली हालत बिल्कुल भी ठीक नहीं है। वे एक अनुभवी ब्यूटीशियन हैं, लेकिन उनके चेहरे के कारण उन्हें कहीं नौकरी नहीं मिलती।

पिछले हफ्ते लक्ष्मी ने अपनी आर्थिक कठिनाइयों के बारे में सोशल मीडिया पर बात की थी। जिसके बाद अक्षय कुमार ने उन्हें 5 लाख रुपये की वित्तीय सहायता देने का वादा किया और कई लोगो ने उन्हें नौकरी की पेशकश भी की। 

हालाँकि मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मीं लक्ष्मी अग्रवाल का जीवन शहर में रह रही अन्य किशोरियों की तरह ही साधारण था। लेकिन वर्ष 2005 में दिल्ली के खान मार्केट में घटी एक दुर्घटना ने 15 साल की लक्ष्मी का जीवन पूरी तरह उलट-पलट कर रख दिया। लक्ष्मी दिल्ली के एक किताबशाला में सहायक के रूप में काम करती थीं। एक 32 साल के आवारा सिरफिरे ने शादी के प्रस्ताव को नकारे जाने के कारण अपने दोस्तों के साथ मिलकर, दिन दिहाड़े भरे बाजार में लक्ष्मी के चेहरे पर एसिड फेंका था।

 
 
 
 
 
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वो जो हैं… With @meghnagulzar #smileforever #love #besttime #bestevning

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लक्ष्मी ने इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए कहा, “हमले के बाद मुझे राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती किया गया, मैं लगभग तीन महीने तक अपना इलाज कराती रही। मेरे वार्ड में एक भी आइना नहीं था। रोज नर्से जब मुझे एक कटोरे में पानी देती थीं तो मैं उस पानी के कटोरे में अपने चहरे के प्रतिबिंब को ढूंढने की कोशिश करती थी लेकिन मैं अपने पट्टी से बंधे चेहरे को ही देख पाती थी। घटना के कुछ महीने के बाद जब मैंने अपना चेहरा पहली बार देखा तो मैं पूरी तरह हताश हो गयी थी क्योंकि वह मेरा चेहरा नहीं था और मेरी आँखें भी बहुत बदसूरत दिख रहीं थीं। 

घटना के बाद लक्ष्मी को कई दर्दनाक सर्जरी से गुजरना पड़ा। लेकिन इससे भी ज्यादा गंभीर उनकी मनोवैज्ञानिक स्थिति को दूर करना था। हालाँकि ठीक होने के एक साल अपने पिता से प्रोत्साहन पाकर लक्ष्मी ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की जिसमें एसिड हमले में पीड़ित लोगों को मुआवजा देने के अलावा भारतीय दंड संहिता, भारतीय साक्ष्य अधिनियम और आपराधिक प्रक्रिया संहिता में मौजूदा प्रावधानों में नए कानून या संशोधन के पारित होने की मांग की गयी थी। लक्ष्मी ने इस तरह के भनायक हमलों की संख्या का हवाला देते हुए पूरे देश में एसिड बिक्री पर पूर्ण तरह से प्रतिबन्ध लगाने की मांग की। 

 
 
 
 
 
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काफी संघर्ष के बाद जुलाई 2013 यानी आठ सालों बाद, लक्ष्मी अदालत में अपनी इस लड़ाई को जीतीं। अदालत ने एसिड बिक्री के लिए नए नियमों  को लागू कर दिया। जिसमें नाबालिगों की बिक्री पर प्रतिबन्ध लगाने और इसे खरीदने से पहले एक फोटो और पहचान पत्र प्रस्तुत करना शामिल था। इसके आलावा विक्रेता को एसिड विक्री का संपूर्ण लेखा-जोखा रखना अनिवार्य कर दिया था। अदालत ने राज्य सरकार से भी एसिड पीड़ितों की  क्षतिपूर्ति के लिए 3 लाख रुपये देने का आदेश जारी किया। 

साल 2014 लक्ष्मी के लिए सुखदुख भरा रहा। इस साल मार्च में लक्ष्मी ने अमेरिका की पहली महिला मिशेल ओबामा की उपस्थिति में विदेश विभाग की अंतर्राष्ट्रीय महिला का साहस पुरस्कार जीता था। लेकिन पुरस्कार के बाद लक्ष्मी ने अपने भाई को किसी बीमारी की वजह से और  पिता को हृद्यघात की वजह से खो दिया। 

 
 
 
 
 
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Ficci 😊 #stopsaleacid

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यह वही साल था जब लक्ष्मी की मुलाकात “स्टॉप एसिड अटैक” के संस्थापक और पत्रकार अलोक दीक्षित से हुई और दोनों एक दूसरे से प्यार करने लगे। दोनों ने शादी करने की बजाय सिर्फ साथ रहकर जीवन गुजारने का फैसला लिया क्योंकि अलोक नहीं चाहते थे कि लोग उनकी शादी में आयें और लक्ष्मी के बारे में बाते करें। 

इसके बाद इन दोनों ने अपने दोस्तों के साथ मिलकर “छाँव फाउंडेशन” की स्थापना की और उन दोनों के यहाँ  25 मार्च 2015 को एक प्यारी-सी बच्ची का जन्म हुआ। लेकिन दुर्भाग्यवश लक्ष्मी के जीवन में एक और नया मोड़ आया। बेटी के जन्म के बाद अलोक और लक्ष्मी में आपसी मतभेद शुरू हो गए। जिसकी वजह से दोनों अलग हो गए। बल्कि बेटी के कस्टडी की जिम्मेदारी लक्ष्मी को ही मिली थी फिर भी अलोक ने पैसे की कमी का हवाला देते हुए लक्ष्मी से पल्ला झाड़ लिया। 

एक साक्षात्कार के दौरान दीक्षित ने कहा, “मेरे पास पैसे नहीं हैं,आप मेरे बैंक खाते की जांच कर सकते हैं। उसमें पांच हजार भी नहीं हैं, मुझ जैसे कार्यकर्ता का जीवन ऐसा ही रहता है। मेरे पास नियमित नौकरी नहीं है और मैंने एनज़ीओ को मिलनेवाले सभी पैसों को एसिड पीड़ितों की देखभाल में खर्च कर दिए हैं।”

लक्ष्मी के अनुसार कोर्ट से जो 3 लाख मिले थे वह उनकी सर्जरी और गर्भावस्था में खर्च हो गए। मिशेल ओबामा से उन्हें पुरस्कार तो मिला लेकिन पेट भरने के लिए पुरस्कार पर्याप्त नहीं है। भारत में लोग पुरस्कार देने के इच्छुक हैं लेकिन काम और पैसा देने के नहीं। 

लेकिन सौभाग्य से उनके जीवन में हाल ही मे एक सुखद मोड़ आया। लक्ष्मी की वर्तमान दुर्दशा की खबर जैसे सोशल मीडिआ पर सार्वजानिक हुई। उन्हें सभी तरह से सहायता मिलने लगी। लक्ष्मी को “हेयर एंड मेकअप अकादमी” से नौकरी की पेशकश प्राप्त हुई है और यह संस्था उनकी बेटी की शिक्षा का खर्च भी उठाने को तैयार है। 

 
 
 
 
 
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Good morning ♥️ [email protected]_amar

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इस महिला की यह अविश्वसनीय कहानी जिसने जीवन के इस छोटे दौर में ही कई संघर्ष देखे और उसे हिम्मत से पार भी किया को अब हम जल्द ही बड़े परदे पर दीपिका पादुकोण के जरिए देख पाएंगे और इससे भावनात्मक रूप से जुड़ पाएंगे। 

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