हर इंसान की ज़िंदगी में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं। कोई समस्याओं का सामना नहीं कर पाता है, तो कोई बड़ी से बड़ी मुसीबतों के भंवर को भी आसानी से पार कर जाता है। बांग्लादेश की सीमा से सटे एक गांव के रहने वाले इस दिव्यांग की कहानी भी कुछ ऐसी ही है, जिन्होंने जिंदगी की खुशियां छीनने आई समस्याओं को लोगों के चेहरे पर मुस्कान बिखेरने का साधन बना लिया।

अपनी बाइक पर रक्तदान के प्रति जागरुकता फैलाने वाले बोर्ड लगाए चलने वाले इस शख्स की कहानी ह्यूमन्स ऑफ बॉम्बे नामक फेसबुक पेज पर साझा की गई है, जिनकी कहानी भी रक्त और बाइक राइड के साथ-साथ चलती है। दरअसल, आज से करीब 2 वर्ष पूर्व इनके बेटे के बल्ड कैंसर के बारे में पता चला, जिसके इलाज के लिए उन्हें चेन्नई के एक अस्पताल जाना पड़ा।

ह्यूमन्स ऑफ बॉम्बे के मुताबिक एक दिन उनके बेटे को खून की अति आवश्यकता पड़ी और अस्पताल में भी खून की कमी थी। अस्पताल ने उन्हें दूसरे अस्पताल से खून की व्यवस्था करने को कहा। उन्होंने बताया कि मात्र चार km के लिए ऑटो वाले ने उनसे ₹300 किराया वसूल किया।

आहत कर देने वाली इस घटना के बाद उन्होंने अपने दोस्तों से पैसे लेकर बाइक खरीदी और तब से वे लोगों को रक्तदान के प्रति जागरुक करते हैं। इसके लिए उन्होंने अपनी बाइक के आगे एक बोर्ड भी लगा रखा है। खबरों के मुताबिक उन्होंने अबतक करीब 200 बल्ड बैग जरुरतमंदो तक पहुंचाए हैं।

दिव्यांग के मुताबिक, वे पेन बेचकर डोनेशन एकत्रित करने की कोशिश करते हैं। जिसके माध्यम से उनके परिवार का खर्च चलता है। उनका कहना है कि “मेरे जैसी समस्याओं से परेशान लोगों की मदद करके मुझे खुशी मिलती है। मेरी जिंदगी तमाम समस्याओं और अड़चनों से भरी हुई हैं। लेकिन मुझे अपने परिवार से ताक़त मिलती है।”

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