आज भी हमारे देश में माहवारी के प्रति महिलाओं में जागरूकता लाने की जरूरत है। क्योंकि एक सर्वे के अनुसार माहवारी के दौरान देश के ग्रामीण भागो में केवल 42 प्रतिशत महिलायें पैड्स का उपयोग करती हैं। वहीं 68 प्रतिशत महिलायें कपड़ा इस्तेमाल करती हैं। जिस वजह से ये महिलायें कई बीमारियों का शिकार हो रही हैं। ऐसे हालात में महाराष्ट्र के पुणे में “समाजबंध” नामक संग़ठन, माहवारी से जुड़ी समस्याओं का हल करने के लिए महिलाओं को स्वछता के प्रति जागरूक कर रहे हैं।

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“समाजबंध” संग़ठन के संस्थापक सचिन आशा सुभाष हैं। महाराष्ट्र के सोलापुर जिले में जन्में सचिन के इस नाम के साथ उनकी माँ और पिता का भी नाम जुड़ा है। सचिन ने अपनी वकालत की पढ़ाई पुणे से ही पूर्ण की और कॉलेज के दिनों से सचिन सामाजिक कार्यों से जुड़े रहे हैं। 

वह गरीबों की मदद करने के लिए पुराने कपड़े एकत्रित करते और गरीबों में वितरित कर देते थे। उन्होंने अपने कॉलेज में अपने दोस्तों का संग़ठन भी बनाया था और यह सब मिलकर लोगों की मदद करते थे। 

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इसी दौरान सचिन को महिलाओं के प्रति माहवारी और सेनेटरी पैड्स की गलफहमियों के बारे में पता चला। साथ ही सचिन की माँ को भी माहवारी के दौरान सही देखभाल न करने की वजह से अपना गर्भाशय निकलवाने के लिए सर्जरी करवानी पड़ी थी। 

जिसके बाद 26 वर्षीय सचिन ने 2016 में पुणे में “समाजबंध” नामक एक संग़ठन स्थापित किया, जो महिलाओं को माहवारी के प्रति सुरक्षा और स्वच्छता के लिए जागरूक करता है। यह संगठन पुराने कपड़ो से सेनेटरी पैड्स बनाकर आसपास के गावो में आदिवासी महिलाओं को वितरित करता है। 

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सचिन नहीं चाहते कि माहवारी से जुड़ी बीमारियां और भी महिलाओं को हों इसके लिए वह अपने संग़ठन के माध्यम से आसपास के इलाकों और गाँवों में जाकर माहवारी से उत्पन्न भ्रम के बारे में खुलकर बात करते हैं। जिसके बाद 50 से अधिक गाँवों की करीब 2000 महिलायें इस मुहीम से जुड़ चुकी हैं। 

सचिन और उनका संग़ठन न केवल महिलाओं को सेनेटरी पैड बांटती हैं बल्कि महिलाओं को पुराने कपड़ों से यह पैड्स बनाने का प्रशिक्षण भी देती है। साथ यह पैड्स पूरी तरह से पर्यावरण के अनुकूल हैं और इसे धोकर दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है। 

 

 

 

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