आज भारतीय नारी हर क्षेत्र में आगे बढ़ने के प्रयास में कार्यरत है, किन्तु रूढ़िवादी मानवीय सोच ही उनकी प्रगति में बाधक है। इसी रूढ़िवादी सोच को तोड़ते हुए भारतीय बॉडीबिल्डर मजीजिया भानु ने हिजाब पहनकर कोच्चि के मिस्टर केरल प्रतियोगिता के महिला वर्ग में हिस्सा लिया और स्वर्ण पदक जीता।

Credit: Facebook

केरल की महिला बॉडीबिल्डिंग स्पर्धा में जब 23 वर्षीया मजीजिया भानु हिजाब पहनकर मंच पर उतरीं तो लोग हैरत भरी निगाहों से उन्हें देखने लगे, क्योंकि इससे पहले उन्होंने किसी भी महिला को हिजाब पहनकर बॉडीबिल्डिंग करते नही देखा था। भानु का मानना है कि हिजाब, किसी भी महिला को अपना लक्ष्य प्राप्त करने के लिए कतई बाधक नहीं है, बल्कि जब एक महिला अपना शरीर बेनकाब करने के लिए स्वतंत्र है तो उसे ढॅकने को भी स्वतंत्र होनी चाहिए।

भानु ने कहा, “मुझे हिजाब पहनने पर गर्व महसूस होता है, जो मेरी पहचान का हिस्सा है। यह मुझे किसी भी तरह से रोकता नहीं है, बल्कि मुझे गरिमा और ताकत देता है।”

Image may contain: 1 person, smiling, closeup
credit :Facebook

भानु को हमेशा से खेल में रुचि रही है। उनके गांव में शायद ही कोई सुविधा उपलब्ध थी, लेकिन, इससे वे रुकी नहीं। डेंटल कॉलेज के क्लास के बाद वे  हर रोज दंगल के लिए 60 किलोमीटर दूर कोझिकोड की यात्रा ट्रेन से किया करती थीं। शुरुआती दिनों में भानु को पुरुष अभ्यास के दौरान घूरते थे, लेकिन जब उन्हें अहसास हुआ कि वे उनकी तरह अभ्यास को लेकर गंभीर हैं तो सबने घूरना बंद कर दिया।

भानु एक बॉडीबिल्डर होने के साथ-साथ एक डेंटल कॉलेज की छात्रा भी हैं। भानु को एक साधारण डेंटल कॉलेज की छात्रा होने से लेकर एक मशहूर शख्सियत बनने में सिर्फ दो साल लगे। वे न सिर्फ अपने गांव में, बल्कि केरल भर में मशहूर हैं। केरल स्टेट पॉवरलिफ्टिंग एसोसिएशन द्वारा उन्हें राज्य की सबसे ताकतवर महिला के रूप में तीन बार चुना गया है।

Credit: Facebook

भानु ने एक साक्षात्कार के दौरान कहा, “मैं रात नौ बजे के आसपास वापस लौटती थी। शुरू में, यह सब मुश्किल था। लेकिन, धीरे-धीरे मुझमें अकेले सफर करने को लेकर आत्मविश्वास होने लगा और आखिरकार यह मेरी दिनचर्या का हिस्सा बन गया। मैं एक बहुत रूढ़िवादी गांव से हूं, फिर भी मेरे माता-पिता ने मुझे बॉडीबिल्डिंग के मेरे जुनून को पूरा करने की अनुमति दी।”

आज भानु अपनी गांव की लड़कियों के लिए प्रेरणा हैं। उनकी सफलता के बाद ही उस गांव में नए जिम की शुरुआत हुई और बहुत-सी युवा लड़कियां  भविष्य में आगे बढ़ने हेतु उनसे सलाह मांगने आती हैं।अब गांव की अन्य लड़कियां भी भानु की तरह ही बनना चाहती हैं। भानु अगले महीने तुर्की में होने वाले वल्र्ड आर्म रेसलिंग चैंपियनशिप-2018 में भाग लेने के लिए जबरदस्त तैयारी कर रही हैं जिसके चलते आजकल वे बेहद व्यस्त हैं।

Image may contain: 1 person, standing
credit :Facebook

भानु ने कहा, “मैं नहीं जानती थी कि मैं ऐसा कर सकूंगी, क्योंकि यात्रा के लिए फंड की जरूरत थी। मैंने कुछ दरवाजों पर दस्तक दी और आखिरकार प्रबंध करने में कामयाब रही। कुछ शुभचिंतकों ने मेरी यात्रा को प्रायोजित किया है।”

भविष्य की योजनाओं के बारे में भानु ने कहा कि उनका पहला लक्ष्य अपनी पढ़ाई पूरी करना है क्योंकि भानु के माता-पिता उन्हें डॉक्टर बनाना चाहते हैं। इसके बाद एक अकादमी स्थापित करके वे खुद के सपने को पूरा करना चाहती हैं। यह अकादमी मार्शल आर्ट्स, पावरलिफ्टिंग, आर्म-रेसलिंग और बॉडीबिल्डिंग सहित मल्टी-डिसप्लिनरी होगी । इसमें लड़कियों को बढ़ावा दिया जाएगा।

हम आशा करते हैं कि भानु अपने इस जुनून को पूरा करने और महिलाओं को सशक्त बनाने की अपनी इच्छा को पूरा करने में सक्षम होंगी और महिलाओ के लिए एक आदर्श बनेंगी।

Share

वीडियो

Ad will display in 09 seconds