कुछ लोगों को इतिहास पढ़ना पसंद होता है तो वहीं कुछ लोग इतिहास बनाना चाहते हैं, ताकि दूसरे उनकी कहानी पढ़कर प्रेरणा लें। इतिहास वे ही बनाते हैं जो अपनी कमियों को पछाड़ते हुए उस पर विजय प्राप्त करते हैं। इतिहास का हर अक्षर अपने खून और पसीने की स्याही से लिखते हैं। कुछ ऐसी ही कहानी है 24 वर्षीय जावेद चौधरी की जिन्होंने पुणे में आयोजित 21 कि.मी. की मैराथन को सिर्फ एक पैर से पूरा किया। चौंक गए न? 

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24 साल के जावेद मुलता बुलढाणा जिले के लोनार गांव से हैं। उनके पिता किसान और माँ गृहिणी हैं। कुछ साल पहले जावेद भी सामान्य युवा की तरह अपना जीवन व्यतीत करते थे। लेकिन 2015 में कृषि क्षेत्र पदवी का अध्ययन करते समय उनके साथ एक बहुत बड़ी दुर्घटना हुई, जिसकी वजह से जावेद को अपना एक पैर गवाना पड़ा।

पहले तो जावेद बेहद निराश हुए लेकिन फिर उन्होंने हिम्मत बटोरी और अपने जीवन की शुरुआत नई तरीके से की। उन्होंने सबसे पहले संगीत और गिटार बजाना सीखा और जैसा कहते हैं संगीत में जादू है, चीजें बदलनी शुरू हो गयीं। 

संगीत के कारण उनके अंदर चमत्कारिक रूप से तबदीली आई और वे अपने पुराने जूनूनी जीवन में वापस पहुंच गए। हादसे से पहले जावेद डांस करने में माहिर थे। साथ ही वे दूसरों को नृत्य भी सिखाते थे। हादसे के बाद भी उन्होंने दूसरों को संगीत सिखाना नहीं छोड़ा। हाँ, वापसी करने में थोड़ा वक्त जरूर लगा। जावेद ने अब तक करीब 2500 छात्रों को नृत्य सिखाया है। 

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नृत्य के अलावा उन्होंने तैराकी और चेयर बास्केटबॉल खेलना शुरू कर दिया। दुर्घटना से पहले उन्होंने कभी भी इस खेल के बारे में सोचा नहीं था। लेकिन पिछले महीने उन्होंने पैरापेलेजिक एथलीटों के लिए आयोजित इंटर-स्टेट व्हीलचेयर टूर्नामेंट का प्रतिनिधित्व किया और इस खेल में जावेद को मैन ऑफ द टूर्नामेंट  से सम्मानित किया गया।

इन सबके बीच जावेद ने अपनी पढ़ाई भी पूरी की और वे अपने परिवार में स्नातक की पदवी प्राप्त करनेवाला पहले व्यक्ति बन गए। फिलहाल जावेद सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं।

आज वे सोचते हैं कि उनकी दुर्घटना जीवन का दुर्भाग्यपूर्ण चरण नहीं बल्कि महत्वपूर्ण चरण रही। जावेद मानते हैं कि अगर आप अनंत काल तक लोगों के दिलों में जिंदा रहना चाहते हैं तो आपको कड़ी मेहनत करनी ही होगी।। 

वे अपने जीवन के पिछले तीन वर्षों को “सकारात्मक बदलाव के दौर” के रूप में देखते हैं।जावेद का मानना है कि मानव जीवन है अनमोल, इस लिए जो भी जीवन है उसके अधिकतम अनुभव लेने चाहिएं। 

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