नारी शक्ति का परचम हर क्षेत्र में लहरा रहा है। दुनिया में अक्‍सर हर क्षेत्र में समानता के अधिकार का मुद्दा उठाया जाता है। लेकिन महज किसी मुद्दे का झंडा उठा लेने से कुछ नहीं होता। इसके लिए जरूरत है बेजोड़ जज़्बे की। ऐसे ही जज़्बे की मिसाल हैं शिल्पी गर्गमुख  जिन्होंने देश की पहली प्रादेशिक सेना ऑफिसर लेफ्टिनेंट बनने का गौरव प्राप्त किया है। 

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बिहार के कटिहार में नवोदय विद्यालय से 2006 में दसवीं की टॉपर रह चुकी शिल्पी ने डीपीएस बोकारो से बारहवीं की परीक्षा उत्तीर्ण की। उसके बाद उन्होंने धनबाद के बिरसा प्रौद्योगिकी इंस्टीट्यूट से केमिकल इंजीनियरिंग में डिग्री हासिल की और हैदरबाद में टीसीएस (TCS) में नौकरी की। लेकिन वे  अपनी जॉब से संतुष्ट नहीं थीं।

शिल्पी ने और मेहनत की और ओएनजीसी अंकलेश्वर में केमिकल इंजीनियर के पद के लिए चुनी गयीं, जहां से उन्हें यह पता चला कि ओएनजीसी के माध्यम से वे क्षेत्रीय सेना में जा सकती हैं। शिल्पी के दोनों भाई सेना सशत्र बल में कार्यरत हैं और सेना में जाने की प्रेरणा शिल्पी को उन्हीं से मिली। उन्होंने बताया वे हमेशा से ही जैतून हरे रंग की वर्दी से आकर्षित थीं। 

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इसलिए क्षेत्रीय सेना में जाने के लिए उन्होंने आवश्यक जांच और परीक्षाएं उत्तीर्ण कीं और कड़े परिश्रम के बाद इस उपलब्धि को पूर्ण किया और देश की पहली प्रादेशिक सेना ऑफिसर लेफ्टिनेंट बनीं। 

केंद्र सरकार ने दिल्ली उच्च न्यायालय से महिलाओं को प्रादेशिक सेना में शामिल करने की बात की थी और केंद्र सरकार ने उनको इस क्षेत्र में जोड़ने के साथ-साथ उनके लिए और भी सुविधायें दिए जाने पर सहमति जतायी। सरकार का यह निर्णय महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

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प्रादेशिक सेना भारतीय रक्षा सेना का एक हिस्सा तथा देश की सेवा का एक भाग है। इसके तहत स्वयंसेवकों को हर साल कुछ दिनों का सैनिक प्रशिक्षण दे कर उन्हें रक्षा के क्षेत्र में प्रशिक्षित किया जाता है ताकि भविष्य में कभी जरुरत पड़ने पर देश की रक्षा के लिये उनकी सेवाओं का उपयोग किया जा सके। 

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