“अगर मैं युद्ध में मरता हूं तब भी तिरंगे में लिपटा आऊंगा और अगर जीतकर आता हूं, तब भी तिरंगे में लिपटा आऊंगा, लेकिन आऊंगा ज़रुर”…ये शब्द भारत के उस जाबाज़ की है, जिनसे पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान की सेना भी खौफ खाती थी। जिनका नाम है विक्रम बत्रा, इनकी बहादुरी के किस्से आज भी देश प्रेमियों के दिल में जोश भर देते हैं।

1. शेरशाह के नाम से जाने जाते थे!

Read this book n i m sure u ll role down into tears……he is the hero …and his journey was amazing #vikrambatra #indianarmy

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मात्र 24 वर्ष की आयु में देश के लिए प्राण न्यौछावर करने वाले बत्रा, भारतीय सेना में शेरशाह के नाम से भी जाने जाते हैं। कारगिल की शौर्य गाथा में कैप्टन विक्रम बत्रा का एक अहम नाम है।

2. दुश्मनों के छक्के छुड़ा देते थे!

🇮🇳आज से 19 साल पहले भारतीय सेना के एक जवान ने अपने साथी ऑफिसर को बचाते हुए अपनी जान दे दी थी, इनका नाम था कैप्टन विक्रम बत्रा. विक्रम बत्रा(पालमपुर) ने कारगिल युद्ध में अभूतपूर्व वीरता का परिचय देते हुए वीरगति प्राप्त की और उसके बाद उन्हें भारत के वीरता सम्मान परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया. कैप्टन विक्रम बत्रा की बहादुरी के किस्से केवल भारत में ही नहीं सुनाए जाते, पाकिस्तान में भी विक्रम बहुत पॉपुलर हैं. पाकिस्तानी आर्मी भी उन्हें शेरशाह कहा करती थी. विक्रम बत्रा की 13 JAK रायफल्स में 6 दिसम्बर 1997 को लेफ्टिनेंट के पोस्ट पर जॉइनिंग हुई थी. दो साल के अंदर ही वो कैप्टन बन गए. उसी वक्त कारगिल वॉर शुरू हो गई. 7 जुलाई, 1999 को 4875 प्वांइट पर वह शहीद हो गए, पर जब तक जिंदा रहे, तब तक अपने साथी सैनिकों की जान बचाते रहे. #Kargil #India #Army #War #Pakistan #vikrambatra #IndianArmy #JAKRif #Jammu #kashmir

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कैप्टन विक्रम बत्रा की अगुवाई में सेना दुश्मनों के छक्के छुड़ा देती थी। जागरण के अनुसार जून 19, 1999 में उनकी अगुआई में सेना ने प्वाइंट 5140 पर भारत का झंडा लहराया था। बत्रा ने अकेले ही तीन घुसपैठियों को मार गिराया था।

3. भटकों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ते थे!


युद्ध में अपने अदम्य साहस का परिचय देने वाले कैप्टन बत्रा, भटके हुए युवाओं को भी समाज की मुख्य धारा से जोड़ते थे। खबरों के मुताबिक जम्मू-कश्मीर में पोस्टिंग के दौरान उन्होंने एक-दो आतंकियों को भी आतंक की राह से हटाकर समाज की मुख्य धारा से जोड़ा था।

4. रणभूमि में सदा मुस्कुराते थे!

True.. #sidharthmalhotra #sidians #vikrambatra #indianarmy #india

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रणभूमि में भी सदा मुस्कुराते हुए जाने वाले बत्रा जुलाई 7, 1999 को एक साथी जवान को बचाते हुए शहीद हो गए। कैप्टन के अदम्य साहस, पराक्रम को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें अगस्त 15,1999 को परमवीर चक्र से नवाज़ा, जिसे उनके पिता जीएल बत्रा ने प्राप्त किया।

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