कमांडर एन्नी दिव्या हमेशा से ही आसमान की ऊंचाइयों को छूना चाहती थीं और अपनी मेहनत और लगन की बदौलत दिव्या ने अपने सपनों की उड़ान भी भरी। दिव्या ने न सिर्फ नीले गगन को छुआ बल्कि हवाई जहाज उड़ाने के अपने ख्वाब को भी पूरा किया।

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मात्र 31 वर्ष की आयु में दिव्या बोइंग 777 उड़ाने वाली विश्व की सबसे युवा महिला पायलट बन गई हैं। एयर इंडिया में पायलट के तौर पर कार्यरत दिव्या बचपन से ही हवाई जहाज उड़ाने का सपना देखा करती थीं। हिन्दुस्तान टाइम्स से बात करते हुए उन्होंने कहा, “मैं पंजाब के पठानकोट में पैदा हुई। मेरे पिता, जो आर्मी में थे, उनकी पोस्टिंग वहां थी। बाद में उन्होंने रिटायरमेंट ले लिया और आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा में बस गए। विजयवाड़ा में ही मेरी प्रारंभिक शिक्षा भी पूरी हुई। बचपन से ही मेरा सपना पायलट बनने का था। मेरी इस बात का अन्य बच्चे मज़ाक भी उड़ाते थे।”

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हिन्दुस्तान टाइम्स को दिए गए एक इंटरव्यू में उन्होंने सपनों की इस उड़ान की राह में आने वाली अड़चनों के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा, “मैं एक मध्यम वर्ग परिवार से हूं। मेेरे परिवार को आर्थिक समस्याओं से भी जूझना पड़ा। चुंकि मैं विजयवाड़ा में बड़ी हुई, मैं अंग्रेजी लिख और पढ़ सकती थी लेकिन अग्रेज़ी बोलना मेरे लिए सबसे बड़ी चुनौती थी, जिसका मुझे सामना करना था।”

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उन्होंने बताया, “जब मैं 17 वर्ष की थी तब मेैं उत्तर प्रदेश में स्थित “इंदिरा गांधी राष्ट्रीय उड़ान अकादमी”, फ्लाइंग स्कूल में दाखिला लिया। मेरी पढ़ाई के लिए हमने लोन लिया।”

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दिव्या ने 19 वर्ष की आयु में अपना प्रशिक्षण पूरा किया और एयर इंडिया में नौकरी करने लगीं। दो साल बाद उन्हें बोइंग 777 उड़ाने का मौका दिया गया, जिसके बाद दिव्या ने पीछे मुड़कर कभी नहीं देखा।

आज बोइंग 777 उड़ाने वाली दुनिया की सबसे युवा महिला पायलट बनने के बाद दिव्या ने खुद को साबित कर दिया। दिव्या का मानना है, “कठिन परिश्रम का कोई तोड़ नहीं है।”

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