आंखों के रुप में ईश्वर ने हम सभी को एक अनमोल उपहार दिया है। वो उपहार जिसकी मदद से हम सतरंगी इंद्रधनुष को देख सकते हैं, वो उपहार जिसकी मदद से हम खेतों की हरियाली, पर्वत की ऊंचाई, नदियों का पानी, गगन में उड़ते पक्षी और धरा की नैसर्गिक खूबसूरती देख सकते हैं।

हालांकि, दुनिया में कुछ ऐसे भी लोग हैं, जो नेत्रहीन हैं। जो इसकी खूबसूरती को ध्वनि और स्पर्श के एहसास के माध्यम से देखते हैं। दृष्टिबाधित ऐसे लोगों की जिंदगी में खुशियों के रंग भरने और उनके जीवन को प्रकाशित करने का काम कर रही है गुजरात की संस्था “अंध कन्या प्रकाश गृह (AKPG)।”

Credit: AKPG

एनटीडी इंडिया को पत्र के माध्यम से जानकारी देते हुए संस्था की व्यवस्थापक समिता बेन शाह ने बताया कि “यह संस्था नेत्रहीन छात्राओं के रहने खाने-पीने और उनकी पढ़ाई की पूरी व्यवस्था करती है। इन छात्राओं को आज के युग के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने लायक बनाने के लिए संस्था में उन्हें प्राथमिक शिक्षा के अलावा कंप्यूटर, अंग्रेजी बोलना, आदि जैसी शिक्षा भी देती है।”

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शाह ने बताया, “इन छात्राओं की प्राथमिक शिक्षा ‘अंध कन्या प्रकाश गृह’ में ही पूरी होती है। इसके बाद वे सामान्य बच्चों के साथ उच्च शिक्षा ग्रहण करती हैं।” उन्होंने कहा, “जिन छात्राओं की पढ़ने में रुची नहीं होती है, उन्हें गहने, राखी, चिक्की, फाइल आदि बनाने के कौशल भी सिखाए जाते हैं ताकि वे स्वावलंबी बन सकें।”

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शाह ने बताया, “विनोदा बाई देसाई ने जून 14, 1954 को मात्र चार छात्रों के साथ इस ‘अंध कन्य प्रकाश गृह’  की नींव रखी थी। और तब से लेकर आज तक यह संस्था दृष्टिबाधित छात्राओं के सर्वाधिक विकास के लिए हर संभव प्रयास करती है। आज इस संस्था में कुल 175 छात्राएं शिक्षा और प्रशिक्षण ले रही हैं।”

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इस संस्था की सबसे खास बात यह है कि यहां न सिर्फ उन्हें शिक्षित और प्रशिक्षित किया जाता है बल्कि सुयोग्य वर ढ़ूंढ़कर विवाह योग्य छात्राओं का विवाह भी किया जाता है। यहां से शिक्षण और प्रशिक्षण प्राप्त कुछ छात्राएं विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत हैं, तो कुछ स्कूल खोलकर अपने जैसे लोगों की जिंदगी को रोशन करने में लगी हैं।

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