किसी भी व्यक्ति के लिए यह बहुत ही गौरव का क्षण हो सकता है जब उनके नाम से कोई सड़क या इमारत बने। लेकिन असम के जादव मोलई पयांग एक ऐसे व्यक्ति हैं जिनके नाम से पूरा का पूरा जंगल है। बाढ़ में तबाह हो चुकी बंजर भूमि को इस शख्स ने अपनी 36 सालों की मेहनत के बाद पूरी तरह से जंगल में बदल दिया। आज 1360 एकड़ में फैला यह जंगल न्यूयॉर्क सेंट्रल पार्क से भी बड़ा है। 

 

View this post on Instagram

 

On a sandbar near Majuli Island, Jadav Payeng has been planting trees and seeds since the 1970’s, inspired as a result of observing great numbers of snakes dying because they couldn’t find shelter from the sun. He has personally planted an astonishing 570 hectares of forest (larger than New York’s Central Park) – now home to many animals including rhinos, tigers, and elephants. Payeng has been named “Forest Man of India” in 2012. This image is part of the Brahmaputra story from the “Transboundary Rivers” project: www.transboundary-rivers.com — Hello! This is Franck Vogel (@franckvogel) taking over Lens Culture’s Instagram feed for the week. 
I’m a photojournalist specializing in environmental & social issues for the international press (GEO, Paris Match, Stern…), a speaker and a documentary film director (France Television). I’m currently focusing on global Water Conflicts with the Transboundary Rivers’ Project and I will present on Lens Culture the 3 first stories on the Nile, the Brahmaputra and the Colorado. A book will be released in Sept 2016 by Edition de la Martiniere in France and next year in the US and Germany. More information: www.franckvogel.com #brahmaputra #india #assam #jadavpayeng #molai #forest #green #sandbar #majuli #island #plantingtree #tree #butterfly #river #water #transboundaryrivers #project #photojournalism #franckvogel #book #documentaryphotography #picoftheday #photooftheday #reportage #lensculture

A post shared by Franck Vogel (@franckvogel) on

दरअसल जादव मोलई पयांग असम के जोरहाट जिला कोकिलमुख गांव के रहनेवाले हैं। जब वे मात्र 16 साल के थे तब उनके गांव में भयानक बाढ़ आयी जिस वजह से उनके आसपास के इलाके में रहनेवाले बहुत सारे साँप मारे गए। यह सब देखकर मोलई को काफी दुःख हुआ। उसके बाद उन्होंने ठान लिया कि वे कुछ ऐसे पौधे लगाएंगे जो आगे जाकर अच्छे जंगल में परिवर्तित हों ताकि वन्य जीवों को सरंक्षण मिल सके ।

जादव ने जंगल बनाने की इच्छा गाँववालों के सामने जाहिर की लेकिन गाँववालों ने उनका साथ देने से मना कर दिया। उसके बाद वे वन विभाग के पास गए लेकिन उनसे भी मदद नहीं मिली। बिना सरकारी सहायता से यह सब करना असंभव लगने लगा था। लेकिन फिर भी जादव ने हार नहीं मानी और अपने लक्ष्य को साकार करने में जुट गए।

सबसे पहले उन्होंने 20 बांस के पेड़ लगाकर इस जंगल की शुरुआत की उसके बाद वे लगातार पेड़-पौधे लगाते गये। 36 साल की कड़ी मेहनत के बाद आखिरकार उन्होंने 1360 एकड़ का जंगल बना ही डाला। अब उनके जंगल में बंगाल के बाघ, भारतीय गैंडे और 100 से अधिक हिरन और खरगोश हैं। वानर और गिद्धों की एक बड़ी संख्या सहित कई किस्मों के पक्षियों का घर भी बन गया है – यह मोलई जंगल।

प्रकृति के इस अनुकरणीय योगदान के लिए उन्हें देश की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी जेएनयू ने सम्मान देते हुए फारेस्ट मैन ऑफ़ इंडिया(Forest Man of India) के नाम से नवाजा है। इसके अलावा जादव को भारत के पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम और प्रणब मुख़र्जी द्वारा भी सम्मानित किया जा चुका है।

 

View this post on Instagram

 

#jadavpayeng

A post shared by forest_man_of_india_fanpage (@forest_man_of_india_fanpage) on

Share

वीडियो

Ad will display in 09 seconds