हिम्‍मत हो तो कुछ भी करना नामुमकिन नहीं होता है। बस जरूरत होती है पहला कदम उठाने की, इसके बाद सबकुछ अपने आप होता चला जाता है। ऐसे ही जज्‍बे से लबरेज हैं 23 साल की किथियर मिस्‍क्‍विटा और 21 साल की आरोही पंडित की कहानी। दोनों ने 100 दिनों के अंदर दुनिया की सैर के लिए पंजाब के पटियाला एयर बेस से अगस्त 7 को उड़ान भरी। इन दोनों लड़कियों की इच्‍छा आसमान की ऊंचाई से धरती को समझने की थी। 

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दोनों लड़कियों ने लाइट स्‍पोर्ट्स एयरक्राफ्ट के जरिए इस सफर को पूरा किया । इतने लंबे सफर में वे कई जगह रुकीं और आराम किया। शुक्रवार को दोनों महिला पायलट अपने अभियान को ख़त्म करतीं हुईं मुंबई में उतरीं। इस उपलब्धि को हासिल करने वाली दोनों पहली भारतीय महिलाएं हैं। 

हालाँकि ख़राब मौसम के कारण इस अभियान को ग्रीनलैंड में अस्थायी रूप से निरस्त किया गया। लेकिन फिर भी ये युवा महिला पायलट 27 हॉपो (घंटों) में 17 से अधिक देश होते हुए 12900 किलोमीटर की यात्रा करने में कामयाब रहीं। आरोही पंडित लाइट स्‍पोर्ट्स एयरक्राफ्ट में अटलांटिक महासागर पर अकेली उड़ान भरनेवाली पहली महिला पायलट बन गयी हैं। इन लड़कियों ने अपने विमान को माही नाम दिया है।

इस मिशन के पीछे इनका मकसद गैर वाणिज्यिक उड़ान द्वारा WE नामक संस्था के लिए धन जुटाना और भारत के उड़ान कार्यक्रम द्वारा जुड़े क्षेत्रो में गरीब और वंचित लड़कियों को प्रशिक्षित करने के लिए छात्रवृत्ति प्रदान करना है। इसे भारत सरकार की महिला एवं बाल कल्याण मंत्रालय के बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ का भी समर्थन प्राप्त है। 

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इस अभियान का लक्ष्य तीन महाद्वीपों के 23 देशों का दौरा 100 दिनों में पूरा कर स्वदेश वापस लौटना था। पटियाला से इस अभियान की शुरूआत करने वाली इन महिला पायलटों को बॉम्बे फ्लाइंग क्लब में प्रशिक्षित किया गया था।इन्हें सर्बिया में अतिरिक्त उड़ान भरने का भी प्रशिक्षण प्राप्त हुआ। 

एक इंटरव्यू के दौरान किथियर ने कहा, “हमने कभी सोचा नहीं था कि एक छोटे से विमान से हम दुनिया की सैर करेंगे। यह एक बड़ी चुनौती थी और हम केवल दो लड़कियां विमान उपकरण से भरे दो बैग्स के साथ उड़ान भर रहीं थीं।”

पश्चिम एशिया और यूरोप में उड़ान भरते हुए वे स्कॉटलैंड पहुंच गयीं । जहां अटलांटिक महासागर को पार करने के लिए दो पायलट में से किसी एक को ही जाना था तो आरोही का चुनाव किया गया। अगर फ्यूल टैंक को पूरा भरे जाता तो वजन बढ़ जाने का खतरा था और पानी के ऊपर ही अधिक उड़ान भरने के कारण विमान को सुरक्षा उपकरण, किट, भोजन जैसी सुविधाओं से भी परिपूर्ण होना था। 

इसके बाद किथियर कनाडा के लिए निकल पड़ीं जहां वे आरोही का इंतज़ार कर रही थीं। अटलांटिक महासागर पर उड़ान का अनुभव साझा करते हुए आरोही ने कहा, “ज़मीन पर विमान उड़ाते समय अगर इंजिन विफल हो जाता है तो आप जमीन  पर उतर सकते हैं लेकिन अगर आप समुंदर के ऊपर उड़ रहे हैं तो ऐसा नहीं कर सकते, साढ़े पांच घंटो की उड़ान के दौरान मैंने लैंडिंग और टेकऑफ के समय सिर्फ 40 मिनट के लिए जमीन देखी।”

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जब वे दक्षिण की तरफ उड़ान भर रही थीं तब आरोही को महसूस हुआ कि वे खतरनाक क्षेत्र में प्रवेश कर चुकी हैं। और मौसम ने उन्हें आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी, क्योंकि आगे बढ़ने से जान का खतरा था। इसलिए अभियान के निदेशक राहुल मोंगा ने इसे अस्थायी रूप से इसे रद्द करने का फैसला किया। 

लेकिन सोशल एक्सेस के संस्थापक लिन डी सूजा ने कहा कि अभियान खत्म नहीं हुआ है और यह मार्च 2019 में फिर से शुरू होगा। इस  समय माही एयरक्राफ्ट ग्रीनलैंड में तैनात हैं। उसे छोड़ते हुए दोनों महिला पायलट काफी भावुक हो गईं थी। 

भारतीय महिला पायलट एसोसिएशन द्वारा सम्मानित इन महिलाओं का बहुत स्वागत हुआ और हम आशा करते हैं कि बहुत जल्द वे अपने अभियान को फिर से शुरू करेंगी। 

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