जीवन में वादा और साथ निभाना बहुत ज़रुरी होता है, पर कितने लोग ऐसा कर पाते हैं? ये कहानी एक ऐसे प्रेमी जोड़े की है, जिनके अटूट प्यार की संभावनाएं हमें प्रेम और जीवन के सही मतलब से रुबरू कराती है। 

इस कहानी की शुरुआत होती है एक एयरपोर्ट से जहां प्रेमी अपनी प्रेमिका को शादी का प्रस्ताव देता है, प्रेमिका ने उसे सहर्ष स्वीकार कर लिया।

दोनों अलग-अलग शहर में रहते हुए भी एक-दूसरे से प्रत्येक दिन बात करते हैं और अपने जीवन की हर छोटी बड़ी बातों को एक-दूसरे से साझा करते हैं। ऐसा कोई भी दिन दोनों नहीं बीता जिस दिन एक-दूजे को याद न करते हों।

ऐसे ही दिन बीतता गया…लेकिन एक दिन प्रेमिका के साथ हुई एक दुर्घटना ने दोनों की ज़िंदगी बदल दी। दुर्घटना में अपनी आवाज़ खोनो के बाद प्रेमिका ने प्रेमी से मिलना-जुलना छोड़ दिया। दोस्तों के समझाने के बावजूद भी उसने प्रेमी से दूरी बनाना सही समझा।

उसका जीवन बुहत ही नीरस हो गया था। जिसके बाद उसने एक साइन लैंग्वेज़ की कक्षा में दाखिला लिया और अपने जीवन को नए तरीके से जीने का प्रयत्न करने लगी।

कुछ महीनों पश्चात उसके सबसे अच्छे मित्र ने उसे उसके प्रेमी के शादी का कार्ड दिया। उसने दुःखी मन से जब कार्ड खोला तो वो अचंभित रह गई, अंदर उसका नाम लिखा था। तभी वहां  पर उसका प्रेमी आया और उसने अपनी बचकानी साइन लैंग्वेज में उसके सामने शादी का प्रस्ताव दोबारा रखा।

वो बोला, “मैं इतने दिनों से साइन लैंग्वेज सीखने की कोशिश कर रहा था, मैं समझ सकता हूं कि तुम जीवन की बहुत ही मुश्किल परिस्थितियों से गुजरी हो। मैं अपना आने वाला जीवन तुम्हारे साथ गुजारना चाहता हूं और मैं तुम्हारे अल्फाज़ बनना चाहता हूं। मैं तुमसे बहुत तप्यार करता हूं।

ये सब सुनकर और उसके हाथ में इंगेजमेंट रिंग देखकर लड़की के आंखों से झरझर आंसू बहने लगे…लेकिन वो खुशी के आंसू थें।

हमें कायरों की भांति मुसीबतों से मुंह नहीं मोड़ना चाहिए, सामने आकर उनका सामना करना चाहिए। कभी भी किसी का दिल नहीं तोड़ना चाहिए, न जाने कब हम स्वयं उस परिस्थिति में आ जाए।

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