यह सब 2007 में शुरू हुआ था, जब भारत में रहनेवाले पी. सुब्रमण्यम, जो अब 64 वर्ष के है, अपने बेटे से मिलने न्यूजीलैंड गए थे। अपने परिवार, दोस्तों और व्यवसायिक ग्राहकों द्वारा प्यार से उन्हें सुब्रा के नाम से संबोधित किया जाता है। इस बुजुर्ग सज्जन को हमेशा से सुबह जल्दी उठने की आदत है—जल्दी उठकर जॉगिंग पर जाना यह हमेशा से उनके जीवन का तरीका रहा है।

उस दिन न्यूजीलैंड में जॉगिंग करते हुए, सुब्रा ने  क्राइस्टचर्च (Christchurch) जो न्यूज़ीलैंड के दक्षिण द्वीप में सबसे बड़ा शहर है, के एक सुंदर पार्क में ध्यान में बैठे एक समूह को देखा।

एनटीडीटीवी (NTDTV) से बात करते हुए सुब्रा ने कहा कि, शांतिपूर्ण संगीत और कोमल, धीमी गति के अभ्यास ने उन्हें आकर्षित किया, लेकिन “एक विदेशी देश में होने के कारण मैं झिझक महसूस कर रहा था। इसलिए, छठे दिन, मैं इस अभ्यास स्थल पर समूह में शामिल हो पाया। फिर एक दयालु दिखनेवाली महिला, जो एक चीनी फालुन दाफा अभ्यासी थी, ने मुझे ज़ुआन फालुन  किताब दी। यहीं से मेरा पूरा जीवन बदल गया। “

पुस्तक में जिस प्रकार नैतिक सिद्धांतों को समझाया है उससे उनकी दृष्टि और चीजों को देखने का दृष्टिकोण बदल गया। “मैं किसी भी कठिनाई को संभालने में सक्षम हूँ। आज के दिन और इस उम्र में मुझे कोई स्वास्थ्य समस्या नहीं है—मैं अब 65 वर्ष का हूँ,” सुब्रा ने कहा। “इस अभ्यास ने मुझे अपने निजी और व्यावसायिक जीवन में कई तरह से मदद की है।”

©Tianti Books

झुआन फालुन, फालुन दाफा ध्यान साधना (जिसे फालुन गोंग भी कहा जाता है) की मुख्य पुस्तक है, जिसका वर्तमान में 44 देशों में स्वतंत्र रूप से अभ्यास किया जाता है। इस के संस्थापक श्री ली होंगजी (Mr. Li Hongzhi) ने 1995 में इस पुस्तक को प्रकाशित किया, और कुछ ही सालों में यह पुस्तक सबसे ज्यादा बिकने वाली पुस्तक बन गई और इसका 40 भाषाओं में अनुवाद किया गया। पांच सरल ध्यान अभ्यासों के साथ, सत्य, करुणा और सहनशीलता के नैतिक सिद्धांत इस अभ्यास की नींव को अद्वितीय बनाते हैं—100 मिलियन से अधिक लोग पूरे विश्व में इसका करते हैं।

सुब्रा ने कहा कि वह अपने जीवन में एक अनोखी तरह की शांति और स्थिरता महसूस करने लगे है जिसे उन्होंने पहले कभी अनुभव नहीं किया था। वह अपने दैनिक जीवन की परिस्तिथियों को बेहतर ढंग से निपटने में सक्षम हो गए हैं और तनाव और परेशानी से मुक्त जीवन का आनंद उठाने लगे है। स्वयं स्वास्थ्य लाभ का अनुभव करने के बाद सुब्रा को दूसरों के साथ भी यह ध्यान अभ्यास बांटने का विचार आया। उन्होंने अपने शहर में दूर-दूर स्थित कई लोगों के साथ इसकी शुरुआत की।

अपने अनुभवों में से एक को साझा करते हुए उन्होंने एनटीडी टीवी (NTDTV) से कहा कि एक दिन उन्होंने इस अभ्यास के स्वास्थ्य लाभ को साझा करने के लिए तेलंगाना पुलिस अकादमी के निदेशक से मिलने की योजना बनाई।

“मैं अपने शहर के पुलिस अधिकारियों के साथ इस सुंदर आध्यात्मिक ध्यान प्रणाली को साझा करना चाहता था। उनके ऐसे चुनौतीपूर्ण जीवन शैली में मैं उन्हें तनाव मुक्त जीवन पाने और उनके स्वास्थ्य को भी सुधारने का एक तरीका उपहार में देना चाहता था।”

तेलंगाना राज्य पुलिस अकादमी के निदेशक श्री जितेंदर, इस अभ्यास के बारे में जानकर खुश थे, और उन्होंने सुब्रा और उनके दोस्तों को नए भर्ती हुए पुलिस स्टाफ के साथ प्रशिक्षण सत्र आयोजित करने की अनुमति दी। मई 2017 के पहले सप्ताह के दौरान, तेलंगाना पुलिस अकादमी में करीब 700 महिला कैडेटों ने सुब्रा के साथ बिना किसी शुल्क के फालुन दाफा ध्यान कक्षा में भाग लिया।

कई कैडेटों ने कहा कि वे ध्यान में शांती और स्थिरता की भावना का अनुभव कर रहे थे। जबकि कई पुलिस प्रशिक्षुओं ने कहा कि वे खड़े रहकर करने वाले ध्यान अभ्यास में ऊर्जा महसूस कर रहे थे और अतिरिक्त अनुवर्ती सत्रों के लिए उत्सुक हैं।

“सभीने इस अभ्यास की और हमारे प्रयासों की सराहना की,” उन्होंने कहा।

500 पुलिस अधिकारी प्रशिक्षु फालुन दाफा व्यायाम और ध्यान सीखते हैं। कई लोगों ने चक्र-धारण मुद्रा में अनुभव की हुई ऊर्जा के बारे में बात की
सुबह की फालुन दाफा प्रशिक्षण सत्र में भाग लेने के लिए 700 महिला पुलिस उम्मीदवार उत्साही थे

सुब्रा ने कहा कि मई का सत्र इस पुलिस अकादमी के साथ पहला सत्र नहीं था। उन्होंने कहा, पहले 2011 में, उन्होंने अन्य अभ्यासियों के साथ, पुलिस अकादमी में और आंध्रप्रदेश में यातायात पुलिस को फालुन दाफा की पहचान करायी थी। उन्हें पुलिस अकादमी से प्रशंसा प्रमाणपत्र भी मिला था।

500 पुलिस अधिकारी प्रशिक्षु फालुन दाफा ध्यान अभ्यास सीखते हैं

फालुन दाफा को दुनियाभर में विभिन्न सरकारों द्वारा सम्मान और मान्यता के 2000 से अधिक पुरस्कार प्राप्त हुए हैं। लेकिन दुर्भाग्यवश, इस अभ्यास को चीन में प्रतिबंधित किया गया है जहाँ पर इसकी शुरूआत हुई। इस शांतिपूर्ण ध्यान अभ्यास का उत्पीड़न 1999 में चीन में शुरू हुआ और अभी भी जारी है। पूर्व चीनी प्रधानमंत्री जियांग जेमिन के आदेश पर, हजारों फालुन गोंग अभ्यासियों पर अत्याचार किया गया और उन्हें मौत के घाटा उतारा गया था, और सैकड़ों हजारों को एक समय पर हिरासत में लिया गया था, Minghui.org के अनुसार, एक वेबसाइट जो उत्पीड़न के बारे में पूरी तरह से जानकारी देता है।

सुब्रा, जिनका जीवन एक बेहतर ढंग से बदल गया है, ने कहा कि वह इस प्राचीन ध्यान साधना को फैलाने की अपनी कोशिशों को जारी रखेंगे और अपने साथी भारतीयों को उस अवैध उत्पीड़न, जो निर्दोष अभ्यासियों पर चीन में चल रहा है के बारे में बताने से नहीं रुकेंगे।

“मैं चीनी सरकार को एक विपरीत पक्ष दिखाना चाहता हूं कि जब वह मासूम फालुन दाफा अभ्यासियों को पीटने और मारने के लिए अपनी पुलिस और सेना को आदेश दे रहा है, तब भारत में पुलिस अधिकारी इस अभ्यास को सीख रहे हैं और इसे अपने जीवन शैली का एक हिस्सा बनाने के लिए तैयार हैं,” उन्होंने कहा।

Photo Credit: Minghui.org; P.Subrahmanyam.


Falun Dafa (also known as Falun Gong) is a self-improvement meditation system based on the universal principles of Truthfulness, Compassion, and Tolerance. It was introduced to the public by Mr. Li Hongzhi in 1992 in China. It is currently practiced by over a 100 million people in 114 countries. But this peaceful meditation system is being brutally persecuted in China since 1999. For more info, please visit: www.FalunDafa.org and www.FalunInfo.org.

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