कहते हैं, खुश रहने के लिए किसी बहुत बड़े महल की आवश्यकता नहीं होती। भूखे को एक वक्त की रोटी मिल जाए तो वह उसी में खुश हो जाता है। तेज़ बारिश में भीग रहे पथिक को सिर छुपाने की जगह मिल जाए, तो वह उस में खुश हो जाता है। प्लास्टिक की महंगी कार ना सही, गरीब बच्चे को मिट्टी की चक्की मिल जाए, तो वह उसी में खुश हो जाता है। वो कहते हैं ना, “बचपन अमीरी-गरीबी का भेद नहीं जानता, वो तो बस खुश रहना जानता है।” 

आज दिसंबर 19 है और इस दिन को अंतराष्ट्रीय गरीब सहायता दिवस के रुप में मनाया जाता है। ताकि, हमारी एक छोटी सी मदद से उनके चेहरे पर भी मुस्कान आ सके। लेकिन क्या वास्तव में किसी के चेहरे पर मुस्कान के लिए किसी की मदद की आवश्यकता है? तंग गलियों में खेलते और खिलखिलाते इन गरीब बच्चों की तस्वीरें देखकर शायद आपको इस सवाल का उत्तर मिल जाएगा और आप भी यही कहेंगे कि, “खुशियां तो बस संतुष्टि में है”…

1. खुशियों का पथ!

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2. अपनी तो यही गाड़ी है!

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3. चलो खुशियों को लपकते हैं!

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4. तंग गलियां और छलांग लगाता बचपन!

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5. चलो खुशियों को पकड़ते हैं!

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6. अपनी एक अलग ही दुनिया!

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7. खुशियां तो इस नाव पर सवार है!

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8. माटी में जो बात है वो और कहां!

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9. एक दौड़ खुशियों की वादी में!

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10. चेहरे पर चमकती खुशियां!

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11. जैसे भी हैं खुश हैं!

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