सुभाष यशवंतराव कामड़ी का जन्म महाराष्ट्र के हिंगणघाट जिले के एक छोटे से गाँव किन्हाला में हुआ था और वे इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, एमबीए और एलएलबी, लगातार तीन डिग्रियां हासिल करने वाले अपने गाँव के पहले व्यक्ति थे। साल 2003 में वे नौकरी के सिलसिले में चंद्रपुर शहर आये। वे वहां एक लेक्चरर के तौर पर कार्यरत हुए।

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वहीं पर उनकी मुलाकात शिल्पा से हुई थी, जिनसे उन्होंने बाद में शादी की। शिल्पा भी उसी कॉलेज में पढ़ाती थीं। हालांकि, शिल्पा को कई स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां थीं, लेकिन सुभाष ने उन्हीं से शादी करने का फैसला किया। सुभाष ने बताया, “शिल्पा की किडनियां जन्म से ही सिकुड़ी हुई थीं और उसको पैंक्रियास (अग्न्याशय) में भी दिक्क्त थी। उसने अपना पूरा जीवन अकेले बीताने का फैसला किया था, लेकिन मैं अपनी ज़िन्दगी उसके साथ बिताना चाहता था, भले ही वह ज़िन्दगी छोटी ही क्यों न हो।”

इन दोनों ने साल 2004 में शादी की और साल 2008 में इनकी गोद में इनका पहला बेटा क्षितिज था। साल 2010 में उनके दूसरे बेटे ध्रुव शिशिर का जन्म हुआ।

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हर सुबह सुभाष और शिल्पा पास के स्टेडियम में सैर के लिए जाया करते थे। जल्द ही उनके बेटे क्षितिज ने भी उनके साथ जाना शुरू किया। एक दिन उन्होंने क्षितिज को स्टेडियम में खेले जाने वाले अलग-अलग खेलों से परिचित करवाने का फैसला किया। शुरू में वे क्षितिज के लिए स्केट्स की एक जोड़ी लेकर आये और क्षितिज ने स्केटिंग क्लास जाना शुरू किया। लेकिन धीरे-धीरे उन्हें अहसास हुआ कि 4 साल के क्षितिज को जिम्नास्टिक ज्यादा पसंद है। इसलिए उन्होंने उसके लिए एक कोच ढूंढा और उसकी ट्रेनिंग शुरू करवाई।

इसी बीच, ध्रुव भी दो साल का हो गया था, लेकिन फिर भी वह बोल और चल नहीं पाता था। शिल्पा और सुभाष को इसकी चिंता रहने लगी।

सुभाष ने बताया, “लोग अक्सर कहते कि ध्रुव पर शिल्पा की बीमारियों का असर हुआ है। हम दोनों बहुत परेशान थे और फिर एक दिन हमने देखा कि ध्रुव, क्षितिज के स्केट्स पर चलने की कोशिश कर रहा है।” इससे खुश होकर शिल्पा और सुभाष ने ध्रुव को कोचिंग दिलवाने का फैसला किया। चूंकि इसकी न्यूनतम आयु सीमा 3.5 वर्ष थी, इसलिए उन्हें एक विशेष अर्जी देनी पड़ी, जिसे स्वीकार कर लिया गया।

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एक महीने के भीतर, ध्रुव बिगिनर्स स्केट्स छोड़ हाइपर स्केट्स पर स्केटिंग करने लगा और फिर रोलर स्केट्स की प्रैक्टिस भी करने लगा। वह स्थानीय मैचों में भाग लेने लगा और 2014 में स्टेट फेडरेशन अंडर 4 चैंपियनशिप में ध्रुव ने स्वर्ण पदक जीता।

शिल्पा और सुभाष ध्रुव को हर शनिवार और रविवार 3 घंटे का सफ़र तय करके, सप्ताहांत क्लास के लिए नागपुर ले जाने लगे, ताकि उसे लिम्बो स्केटिंग में प्रशिक्षित करवाया जा सके।

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अक्टूबर 1, 2015 को, ध्रुव ने लिम्बो स्केटिंग में अपना पहला रिकॉर्ड बनाया और शिल्पा ने इस उपलब्धि को मार्क करने के लिए गिनीज़ बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड से सम्पर्क किया। हालांकि ध्रुव इसके लिए निर्धारित आयु (5 साल) से छोटा था।

नवंबर 27, 2015 को, ध्रुव 5 वर्ष का हो गया, और गिनीज़ बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड ने शिल्पा को मेल भेजा कि आप इसे कर सकती हैं। चूंकि चंद्रपुर में ऐसा कोई स्टेडियम नहीं था, जो रिकॉर्ड के लिए आवश्यक दूरी और मानकों को पूरा करता था, ध्रुव ने सड़क पर इस रिकॉर्ड के लिए प्रयास करने का फैसला किया।

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ध्रुव सफलता की सीढ़ियों पर तेजी से चढ़ रहा था। उसने अब तक राष्ट्र, अन्तर्राज्य, विदर्भ और जिला स्तर की प्रतियोगिताओं में 23 स्वर्ण, 6 रजत और 3 कांस्य पदक जीते। जनवरी 2017 में ध्रुव ने सात घंटे तक नॉन-स्टॉप स्केटिंग करके एक और रिकॉर्ड बनाया।

इधर शिल्पा का स्वास्थ्य लगातार बिगड़ रहा था। हर मुमकिन कोशिश करने के बावजूद शिल्पा की हालत बिगड़ती चली गयी। और अगस्त 8, 2017 को शिल्पा का निधन हो गया। 7 साल के ध्रुव को कई दिनों तक लगता रहा कि उसकी माँ अस्पताल में है।

सुभाष कहते हैं, “मैंने धीरे-धीरे उसे उसकी मां की मौत के बारे में बताना शुरू कर दिया है। क्षितिज इसके बारे में जानता है, लेकिन ध्रुव इसे समझने के लिए बहुत छोटा है। अब मेरा एकमात्र लक्ष्य शिल्पा के सपनों को पूरा करना है।”

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