गानें जैसे आपकी आँखों में कुछ महके हुए से राज हैं, तेरे बिना जिया जाए न, गीत गाता हूँ मैं गुनगुनाता हूँ मैं, फिर वही रात है या फिर डायलॉग जैसे ज़मीन हमेशा उसकी होती है जो उसका सीना चीरकर उसमें अपने पसीने का बीज बोता है, औरत को अपनी जान से ज्यादा अपनी आबरू अज़ीज होती है और अपनी पवित्रता की रक्षा के लिए वो जान दे भी सकती है और ले भी सकती है या फिर जीने वाला किसी की जान बनकर भी जीता है और किसी को जान बनाकर भी जीता है। फिल्मों के शौकीनों को पता होगा कि ये सारे डायलॉग किसके हैं। जी हाँ, ये वही विनोद मेहरा हैं।

उम्र क़ैद, घर, द बर्निंग ट्रेन, बिंदिया चमकेगी और जानी दुश्मन जैसी फिल्मों में काम करने वाले विनोद मेहरा बॉलीवुड के जाने-माने कलाकार थे। तो चलिए, आज इनके जन्मदिन पर गुजरते हैं बॉलीवुड की उन रंगीन गलियों से जहाँ इन्होंने कई दशक गुजारे।

1. फरवरी 13, 1945 को विनोद मेहरा का जन्म पंजाब के अमृतसर में हुआ था। इन्होंने अपने फिल्मी करियर की शुरूआत बाल कलाकार के रूप में की थी।

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2. वर्ष 1971 से जब इन्होंने बालिग अवस्था में बॉलीवुड में कदम रखा,  तब से 1990 तक इन्होंने 100 से ज्यादा फिल्मों में काम किया।

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3. सन् 1971 में अंग्रेजी नाटक “ए गर्ल कॉल्ड रीटा” पर आधारित फिल्म “एक थी रीटा” से इन्होंने अपने फिल्मी करियर की शुरूआत की।

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4. वर्ष 1972 में आई शिक्त सामंत की फिल्म “अनुराग” में ये पहली बार मौसमी चटर्जी के साथ नजर आए। इसमें मौसमी ने एक नेत्रहीन लड़की का किरदार निभाया है और इन्होंने एक आदर्श नायक का जो पिता की इच्छा के विरूद्ध शादी करना चाहते थे।

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5. “अनुराग” के अलावा इन्होंने अन्य तीन फिल्मों में मौसमी चटर्जी के साथ काम किया। उस समय मल्टी स्टारर का जमाना था तो इन्होंने ज्यादातर फिल्में कई हीरो के साथ की है।

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6. कहते हैं मुंबई में अगर अभिनेता बनने जा रहे हैं तो नसीब भी साथ ले जाना होगा, इनके साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। एक फिल्म डायरेक्टर ने एकबार इन्हें देखा और इनमें कलाकारी के ऐसे गुण देखे की अपने फिल्म में सीधे मुख्य अभिनेता का किरदार दे दिया।

7. इनकी प्रमुख फिल्मों में लाल पत्थर, अनुराग, सबसे बड़ा रूपैया, नागिन, अनुरोध, साजन बिना सुहागन, घर, कर्तव्य, बिन फेरे हम तेरे, टक्कर, ज्योति बने ज्वाला, साजन की सहेली और बेमिसाल जैसी बेहतरीन फिल्में हैं।

8. वर्ष 1988 में इन्होंने किरण से शादी की। इनके दो बच्चे हैं, सोनिया और रोहन। इनकी बेटी सोफिया ने अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद खुद की फिल्म बनाई। इनकी फिल्म थी “विक्टोरिया नं. 203″।

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9. अक्बूबर 30, 1990 को इस कलाकार ने दुनिया और फिल्म इंडस्ट्री को सदा के लिए अलविदा कह दिया। उस वक्त उनकी उम्र महज 45 वर्ष थी, दिल का दौरा पड़ने के कारण इनकी मौत हुई।

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