“होठों से छू लो तुम, मेरा गीत अमर कर दो, बन जाओ मीत मेरे, मेरी प्रीत अमर कर दो।”, “तुमको देखा तो ये ख्याल आया, जिंदगी धूप, तुम घना छाया।” दशकों बीत जाने के बाद भी ये गज़ले किसी ताजे पुष्पित फूल की तरह अपनी खूशबू बिखेरती है। इन गज़लों में ऐसी मिठास है कि इंसान अपना तन-मन भूलकर इसमें रम जाता है। निश्चित ही जब पहली बार आप मुहब्बत से रूबरू हुए होंगे तो ये गज़लें उस वक्त आपकी साथी रही होंगी।

ऐसा माना जाता था कि गजलों की समझ उन्हीं को हो सकती है जो थोड़े बहुत उर्दू से रूबरू हों, लेकिन जगजीत सिंह ने इस बात को सिरे से खारिज किया और गजल और उर्दू न जानने वाले लोगों के बीच पुल का काम किया। गजल एक ऐसा मधुर संगीत होता है जिसको सुनने के बाद मन और मस्तिष्क दोनों मगन होकर झूमने लगती है। गजल 5 से 25 शेरों की एक श्रृंखला होती है। जगजीत सिंह की गजलों ने उर्दू के कम जानकारों का परिचय उर्दू के महान साहित्याकार मीर, ग़ालिब, मजाज़, फ़िराक आदि से करवाया।  तो चलिए, आज गजल के इस सिरमौर के जन्मदिन पर जानते हैं इनके बारे में।

1. जगजीत जी का जन्म फरवरी 8, 1941 को राजस्थान के गाँव गंगानगर में हुआ था। पिताजी का नाम सरदार अमर सिंह धमानी था और माता का नाम बच्चन कौर था।

2. जालंधर से कला की डिग्री प्राप्त करने के बाद जगजीत साहब ने “ऑल इंडिया रेडियो” के लिए संगीत देना और गाना शुरू कर दिया। उन्होंने हरियाणा के कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय से इतिहास में पोस्ट डिग्री प्राप्त की।

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3. अपनी संगीत की शुरूआती शिक्षा इन्होंने गुरूद्वारे से प्राप्त की और मशहूर संगीतकार पंडित छगनलाल और उस्ताद जमाल खान इनके गुरू रहे हैं। अपने संघर्ष के दिनों में वे मुंबई की शादियों में गाना गाया करते थे।

4. पिता की ख्वाहिश थी की बेटा बड़ा होकर आईएएस (IAS) ऑफिसर बने, लेकिन जगजीत साहब पर तो कोई और रंग चढ़ा था। जगजीत सिंह ने कई भाषाओं में गजल गाएँ हैं।

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Credit: Jagjit & Chitra Singh – WordPress.com

5. अपने पांच दशक के लम्बे करियर में इन्होंने करीब 80 एलबम में गायन किया है। वर्ष 1987 में जारी एलबम “बियॉन्ड टाइम” (Beyond time) पहली भारतीय एलबम थी जिसकी डिजीटल रिकॉर्डिंग हुई थी।

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6. भारत सरकार ने वर्ष 2014 में इनके सम्मान में एक डाक टिकट भी जारी किया था।

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7. संगीत के आलावा जगजीत सिंह ने सामाजिक कार्यों में भी अपनी भागेदारी दी है। “सेव द चिल्ड्रन” (Save the children), आल्मा (ALMA) जैसे सामाजिक कार्यों में अपनी भागेदारी दी है तथा सेंट मैरी हॉस्पीटल में एक लाइब्रेरी का निर्माण भी करवाया है।

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8. उनकी हिट फिल्मी गज़लों में फिल्म “प्रेमगीत” का होठों से छू लो तुम, मेरा गीत अमर कर दो, “दुश्मन” का चिट्ठी न कोई संदेश, “साथ-साथ” का ये तेरा घर ये मेरा घर, “ट्रैफिक सिग्नल” का हाथ छूटे भी तो रिश्ते नहीं छुटा करते और “तेरे बिन का” कोई फरयाद तेरे दिल में दबी हो, जैसे गज़ल शामिल है।

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9. वर्ष 1967 में जगजीत सिंह पहली बार चित्रा सिंह से मिले थे। वे भी मशहूर गज़ल गायिका थी। वर्ष 1969 में चित्रा और जगजीत सिंह परिणय सूत्र में बंधे।

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10. वर्ष 2011 में जगजीत सिंह यूके से वापस आए और अपने मुंबई शो से पहली ही वे सितंबर 3, 2011 को सेरेब्रल हेमरेज (Cerebral hemorrhage) से ग्रसित हो गए और करीब दो हफ्ते कोमा में रहने के बाद वे इस दुनिया को अलविदा कह चले।

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11. जगजीत साहब को संगीत की सेवा में अद्वितीय योगदान के लिए पद्म भूषण, संगीत नाटक अकादमी, साहित्य कला अकादमी और लता मंगेशकर अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था।

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